Geeta mahotsav:गीता के अध्ययन और प्रचार प्रसार का लिया संकल्प

देश भर के संत और विद्वानों ने तीन दिन दी उपस्थिति

By: sandeep chawrey

Published: 27 Dec 2019, 12:02 PM IST

स्‍पेशल

छिंदवाड़ा. श्रीमदभगवत गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है बल्कि यह निष्काम कर्म की यथार्थ शिक्षा देती है। भारतीय संस्कृति और अध्यात्म की सरिता प्रवाहित करने वाली विश्ववंद्य गीताका विश्व साहित्य में सर्वोच्च स्थान है। गीता के स्वाध्याय और अध्ययन के जरिए हम वो जीवन का सार तत्व पा सकते हैं जो योगेश्वर श्रीकृष्ण ने गीतामृत के रूप में प्रकट किया है। गीता जयंती पर छिंदवाड़ा में आयोजित तीन दिनी गीता महोत्सव के समापन पर यहां देश भर से आए संत,विद्वानों ने यह बात कही। समापन के दिन गुरुवार को इसके अध्ययन और प्रचार प्रसार का सभी ने संकल्प भी लिया। बाहर से आए विद्वानो ने तीन दिन के महोत्सव के लिए छिंदवाड़ा के आयोजकों को साधुवाद भी दिया। तीसरे दिन छह बजे से योग प्रशिक्षण के साथ दिन की शुरुआत हुई। सके बाद अखंड गीतापाठ यज्ञ किया गया। दोपहर 12 बजे विद्वान संतों, आमंत्रित अतिथियों ने विचार विमर्श कर संस्थान द्वारा शुरू किए गए कार्य और इसके लक्ष्य कानिर्धारण कर संकल्प लिया। दोपहर एक बजे विभिन्न प्रस्तुतियों के बाद पुरस्कार वितरण हुआ। शास्त्रीय नृत्य की समूह प्रस्तुति प्रभावी रही। इसके बाद तीन दिनी महोत्सव का समापन किया गया।
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