24 मई 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

रेत को बनाया आवाज, Tal Chhapar का युवा सैंड आर्टिस्ट बिना रंग-तूलिका रच रहा अनूठी दुनिया

रेत पर बनी ये तस्वीरें भले ही हवा के एक झोंके या वक्त के साथ मिट जाती हैं, लेकिन टोनी आर्य का सामाजिक संदेश लोगों के दिलों में गहराई तक उतर जाता है।

2 min read
Google source verification
Sand Artist Tony Arya

Oplus_0

भागीरथ सुथार

छापर. कला की दुनिया में जहां लोग महंगे कैनवास, रंगों और आधुनिक संसाधनों के लिए हजारों रुपए खर्च करते हैं, वहीं चूरू जिले के छापर के रहने वाले सैंड आर्टिस्ट टोनी आर्य उर्फ भीमराज ने मिट्टी और रेत के ढेरों को ही अपनी अभिव्यक्ति का माध्यम बना लिया है। बिना किसी खास संसाधन और बिना किसी खर्च के, केवल अपनी कड़ी मेहनत और लगन के दम पर वे रेत के कणों में जान फूंक देते हैं।

पर्यावरणीय से जुड़ी कला
टोनी आर्य की कला सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि वे अपनी कलाकृतियों के जरिए समाज को एक बड़ा संदेश देते हैं। ''तालछापर बर्ड फेस्टिवल'' (Talchhapar Bird Festival) में उनके द्वारा बनाई गई खूबसूरत सैंड आर्ट ने देश-भर से आए फोटोग्राफर्स, वन्यजीव प्रेमियों और प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया। टोनी अपनी कला के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीवों और प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा, ''बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ'' (Beti Bachao Beti Padhao) और ''जलसंरक्षण'' (Water Conservation) जैसे ज्वलंत सामाजिक मुद्दों को अपनी रेत कला के केंद्र में रखते हैं।

अस्थायी कला, लेकिन गहरा प्रभाव
रेत पर बनी ये तस्वीरें भले ही हवा के एक झोंके या वक्त के साथ मिट जाती हैं, लेकिन टोनी आर्य का सामाजिक संदेश लोगों के दिलों में गहराई तक उतर जाता है। उनका मानना है कि: अगर रेत पर बनी कोई अस्थायी कलाकृति किसी इंसान को सोचने पर मजबूर कर दे और समाज में सकारात्मक बदलाव लाए, तो वही एक कलाकार की असली सफलता है।

सीमित साधनों में बड़ा बदलाव
ग्रामीण परिवेश से निकलकर अपनी कला को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने वाले टोनी आर्य आज युवाओं के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। उनकी यह कला सीख देती है कि यदि मन में दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो सीमित साधनों में भी बहुत बड़ा बदलाव संभव है। स्थानीय लोगों और कला प्रेमियों का मानना है कि यदि टोनी आर्य को सरकारी स्तर पर उचित मंच और आर्थिक सहयोग मिले, तो इस अनूठी लोककला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दिलाई जा सकती है।

सुदर्शन पटनायक की कलाकृतियों से हुए प्रेरित
8 वीं तक पढ़ाई करने वाले कस्बे के सेंड आर्ट कलाकार टोनी ने जब मशहूर सेंड आर्टिस्ट सुदर्शन पटनायक की समुद्र किनारे रेत पर उकेरी गई कलाकृतियाँ अख़बारों आदि में देखीं, तो उनके मन में गहरी जिज्ञासा जाग उठी। पटनायक की रचनाओं में छिपे सामाजिक संदेशों से टोनी प्रभावित हुए और इस कला की ओर मुड़ गए। उनका यह शौक एक गहरे जुनून में बदल गया और प्रकृति और समाज की रोज़मर्रा की घटनाओं से प्रेरणा लेकर रेत को अपनी कला का मुख्य जरिया बना लिया।

मिट्टी पर उकेरे संदेश
मिट्टी को माध्यम बना सामाजिक सरोकारों से जुड़े संदेश देने वाले सेंड आर्ट कलाकार टोनी आर्य (Sand Art Artist Tony Arya) ने जिले के कई कार्यक्रमों में अपनी कला का प्रदर्शन किया है। स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, जल बचाव और सामाजिक जागरूकता जैसे विषयों पर उनकी कलाकृतियां दर्शकों को सोचने पर मजबूर किया।बावजूद इसके, जिले से बाहर उन्हें अब तक वह पहचान नहीं मिल पाई, जिसके वे हकदार हैं। स्थानीय नागरिकों ने टोनी का सहयोग कर प्रोत्साहित करने की सरार से अपेक्षा की है।