कब तक कुचली जाएगी धरती पुत्रों की आवाज... विशेष टिप्पणी पढे़ यहां...

Avinash Kewaliya

Publish: Feb, 15 2018 01:29:28 PM (IST)

Special
कब तक कुचली जाएगी धरती पुत्रों की आवाज... विशेष टिप्पणी पढे़ यहां...

जिले का एक महत्वपूर्ण बांध सरदारसमंद, जो लोगों को राहत देने की बजाय अधिकांश समय विवादों में ही रहता है

जिले का एक महत्वपूर्ण बांध सरदारसमंद, जो लोगों को राहत देने की बजाय अधिकांश समय विवादों में ही रहता है। कभी पानी के बंटवारे को लेकर तो कभी कैचमेंट एरिया में अतिक्रमण को लेकर। प्रभावित दर्जनों गांव के हजारों किसान इस बांध के पानी को तरस रहे हैं। लेकिन, राजनीति कहें या रसूखात कि इन किसानों की आवाज हर बार कुचल दी जाती है। जनता के लिए सडक़ों पर उतरने का दावा करने वाले और उपलब्धियों का श्रेय लेने वाले नेता क्यों इन किसानों के साथ खड़े दिखाई नहीं देते? बांध के कैचमेंट क्षेत्र में 11 सौ अतिक्रमण चिह्नित हैं, तो मनमर्जी के एनिकट इस बांध में पानी की आवक में रोड़ा बने हैं। न्यायालय के आदेश के बाद भी ऐसे एनिकट को हटाने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। सरकारी सिस्टम कहता है सब कुछ ठीक चल रहा है, लेकिन कोई इन किसानों से नहीं पूछता कि वे संतुष्ट क्यों नहीं है? नियती भी इन किसानों के साथ न्याय नहीं कर पा रही। इन गांवों का किसान खेत में कुआं खुदवाता हैं तो वह पानी भी सिंचाई लायक नहीं निकलता। ऐसे में किसान के पास सिवाय आंदोलन के कोई रास्ता नहीं रह जाता। हर बार धरतीपुत्रों की उपेक्षा कर उनको उद्वेलित होने के लिए मजबूर किया जाता है। क्या किसान उस क्षण को भी देख पाएंगे, जब उनकी 'धरती मां का आंचल बांध के पानी से तृप्त होगा? चिंता की बात तो ये है कि पानी के लिए यह मारामारी उस जिले में हो रही है जो कि पिछले दो साल से बाढ़ और अतिवृष्टि झेल रहा है। नजर उठा कर देखें तो ऐसे भी गांव और किसान हैं जो अतिवृष्टि की मार झेल चुके हैं। उनके लिए मुआवजे की दौड़ को कई नेता लगाते हैं, फिर बूंद-बूंद को तरसते इन किसानों के लिए कोई क्यों नहीं कदम बढ़ा रहा ? अरटिया, ढाबर, भाकरीवाला, माडपुरिया, मंडली और झीतड़ा जैसे गांवों के हजारों किसान हैं जो पानी के लिए आसमान की ओर टकटकी लगाए देखते हैं। आखिर कब इनकी यह हसरत पूरी हो पाएगी? आखिर रसूखात की यह राजनीति कब खत्म होगी? अगर ऐसे ही चलता रहा तो एक बात तय है कि न्याय के दरबार में अर्जी दाखिल कर चुके यह किसान फिर से अपना आपा खो सकते हैं। तीन पक्षों को ईमानदारी से अपना काम करना होगा। चाहे वह प्रशासनिक अधिकारी हो या जनप्रतिनिधि या फिर पूर्व राजपरिवार के प्रतिनिधि ही क्यों न हो... सभी को किसानों की यह वाजिब मांग सुननी होगी। अगर बांध के कमांड क्षेत्र इन गांवों के किसानों को जोड़ा है तो उन्हें सिंचाई के लिए पानी देना भी सरकार की जिम्मेदारी है। इस जिम्मेदारी को निभाने के लिए किसी को तो पहल करनी ही होगी।

डाउनलोड करें पत्रिका मोबाइल Android App: https://goo.gl/jVBuzO | iOS App : https://goo.gl/Fh6jyB

Ad Block is Banned