She News : आखिरी सफर में मददगार बन रहीं 'वर्षा'

मिसाल: लखनऊ की वर्षा जो कर रहीं वह आसान काम नहीं है। वे कोविड से जान गंवाने वालों के शवों को श्मशान पहुंचाने और उनका अंतिम संस्कार कराने में मदद करती हैं। वर्षा डॉ. राममनोहर लोहिया अस्पताल, गोमतीनगर के गेट के सामने पीपीई किट पहने खड़ी रहती हैं।

By: Neeru Yadav

Updated: 28 May 2021, 11:20 AM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क. लखनऊ.कोविड संकट के इस दौर में लोग मददगार बनकर सामने आ रहे हैं, बेड से लेकर दवा और ऑक्सीजन की व्यवस्था करा रहे हैं। ऐसे में लखनऊ की वर्षा वर्मा इंसानियत की मिसाल पेश कर रही हैं। वे कोविड से जान गंवाने वालों के शवों को श्मशान पहुंचाने और उनका अंतिम संस्कार कराने में मदद करती हैं। डॉ. राममनोहर लोहिया अस्पताल, गोमतीनगर के गेट के सामने पीपीई किट पहने वर्षा खड़ी रहती हैं। उनके हाथ में एक तख्ती होती है, जिस पर लिखा होता है, निशुल्क शव वाहन।

42 साल की वर्षा पिछले कई वर्षों से लावारिस शवों को अंतिम संस्कार के लिए शवदाहगृह तक पहुंचाती हैं। वे मानती हैं कि इस विकट समय में उनकी जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं। वे रोजाना सुबह अस्पताल पहुंच जाती हैं। उनके पति लोक निर्माण विभाग में इंजीनियर हैं और बेटी हाइ स्कूल की छात्रा है। उनका परिवार भी इस नेक काम में हाथ बंटाता है। वर्षा को शहर के विभिन्न अस्पताल भी फोन कर लावारिस शवों की जानकारी देते हैं। वे उन्हें वाहन में लेकर जाती हैं और कई बार तो स्वयं ही शवों को मुखाग्नि देती हैं।

विदेशों से भी आते हैं कॉल
वर्षा का कहना है कि अधिकतर फोन विदेशों से आते हैं। ऐसे लोग, जिनके माता-पिता लखनऊ में रह रहे थे और उनकी आकस्मिक मौत हो गई। वे फोन करके उनसे अंतिम संस्कार करने का अनुरोध करते हैं। इसी के साथ राजधानी में तमाम ऐसे लोग भी हैं, जिनका पूरा परिवार संक्रमित है और अस्पताल में भर्ती उनके परिजनों के भी फोन आते हैं।

सामाजिक कार्यों में सक्रिय
वर्षा बताती हैं कि उनकी संस्था 'एक कोशिश ऐसी भी' पिछले तीन वर्षों में 500 से अधिक लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करवा चुकी है। वे महिलाओं को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग भी देती हैं और जूडो भी सिखाती हैं। हाल ही उन्होंने शवदाहगृह में निशुल्क पेयजल की सेवा भी शुरू की है।

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