विश्व स्तर पर धाक जमाने के लिए आसान बनानी होगी पेटेंटिंग की राह

Mazkoor Alam

Publish: Sep, 16 2017 03:33:00 (IST)

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विश्व स्तर पर धाक जमाने के लिए आसान बनानी होगी पेटेंटिंग की राह

भारत को विश्‍वस्‍तर पर मैन्‍युफैक्‍चरिंग हब बनाने में सबसे बड़ी बाधा पेटेंटिंग की जटिल प्रक्रिया है।

सरकार भारत को दुनिया का सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना चाहती है। इसके लिए कई कार्यक्रम चल रहे हैं। पर इस राह में सबसे बड़ी बाधा पेटेंटिंग की जटिल प्रक्रिया है। सरकार के पास करीब 2.5 लाख पेटेंटिंग के आवेदन पेंडिंग हैं। जानकारों का कहना है कि सिर्फ विदेशी निवेश के बूते भारत मैन्यूफैक्चरिंग हब नहीं बन सकता। इसके बल पर योजनाओं को गति दी जा सकती है, पर घरेलू स्तर पर नवाचार की राह आसान किए बिना लक्ष्य पाना संभव नहीं।

एक मार्च, 2017 तक पेटेंट के 2.5 लाख तो ट्रेडमार्क आवेदनों की संख्या 7,53,471 है। ये सभी फाइल एक से लेकर दो साल से पेंडिंग हैं। सरकार के पास पेंडिंग कुल 2,47,824 आवेदनों में से 2,06,836 परीक्षा चरण में लंबित हैं। जनवरी, 2016 में 2,46,495 पेटेंट व ट्रेडमार्क के 5.32 हजार आवेदन लंबित था। यह हाल तब है, जब भारत पेटेंट में अमरीका, ब्रिटेन, द. कोरिया, जापान, फिनलैंड व चीन से बहुत पीछे है। सरकार को इसका अहसास है। इसलिए उसने 18 महीनों में पेटेंट से संबंधित आवेदनों की पेंडेंसी को इन देशों के स्तर पर ला खड़ा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

 पेटेंट हासिल करना जटिल क्यों

सरकार की प्राथमिकताओं में पेटेंट प्रक्रिया अभी तक शामिल नहीं रही है। अधिकारियों व शोधकर्ताओं तक को पेटेंट संबंधी प्रक्रियाओं का पता नहीं होता। पेटेंट कार्यालयों में भारी संख्या में कर्मियों की कमी है। इसके अलावा शोधार्थियों के समक्ष पैसों व फंडिंग भी बड़ी समस्या है।

 कितना पड़ेगा असर

भारत में 1.92 लाख युवा शोधरत हैं। इसके बावजूद पेटेंट की जटिल प्रक्रियाओं और नौकरशाही की लेटलतीफी मानसिकता से युवा उद्यमियों को निजात नहीं दिलाई गई तो स्टार्टअप इंडिया जैसे सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं को ग्रहण लग सकता है। वैसी भी अभी तक के संकेत उत्साहजनक नहीं है।

 लोस और रास में उठे सवाल

लोकसभा व राज्यसभा में जब सवाल उठाए गए तो सरकार ने लंबित आवेदनों को एक से दो साल में निस्तारण का भरोसा दिलाया। जनवरी, 2016 के बाद 1,000 से ज्यादा रिक्तियों को भरा। 130 अतिरिक्त नियुक्ति की प्रक्रिया जारी है। 108 और पदों को सृजित करने की भी स्वीकृति दी है, जिनमें 62 पेटेंट निरीक्षक होंगे।

 ईयू संगठनों से समझौता

डेढ़ साल में पेंडेंसी को अमरीका व जापान के स्तर पर लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। पेटेंट की फाइलों के तीव्र निस्तारण के लिए यूरोपियन यूनियन के साथ बिलेटरल ट्रेड एंड इनवेस्टमेंट एग्रीमेंट (बीटीआईए) व ट्रेड एंड इकॉनोमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (टीईपीए) यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन एग्रीमेंट पर साइन भी किया है।

 पेटेंट प्रोसेस को अहमियत मिले

वरिष्ठ वैज्ञानिक सीएनआर राव का कहना है कि पेटेंट की संख्या और प्रक्रियाओं की गुणवत्ता से इस बात का पता चलता है कि किसी भी देश में विकास की कितनी गुंजाइश है। घरेलू पेटेंट की स्थिति बेहतर होने से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि में सुधार और विकास होता है।

 शीर्ष 10 देशों से बाहर भारत

विश्व बौद्धिक संपदा संगठन की 2015 की रिपोर्ट में पेटेंट दाखिल कने वाले में शीर्ष 10 देशों में भारत का नाम नहीं है। ब्लूमबर्ग के 2014 की नवाचार वाले प्रमुख 50 देशों की सूची में भारत का नाम नहीं है। ब्लूमबर्ग ने शोध व अनुसंधानों की संख्या, हाई-टेक डेंसिटी और विनिर्माण क्षमताओं के आधार पर दुनियाभर के देशों की रैंकिंग तय की है।

 कंट्रोलर जनरल ऑफ पेटेंट, डिजाइन एंड ट्रेडमार्क (सीजीपीडीटीएम) के पास पेटेंट के लिए लंबित फाइलें

 वर्ष                आवेदन

2009-10      34,287

2010-11      39,400

2011-12      43,197

2012-13     43,674

2013-14     42,991

2014-15      -------

2015-16     46,904

 ट्रेडमार्क पेंडेंसी

वर्ष                आवेदन

2009-10      1,41,947

2010-11       1,79,317

2011-12       1,83,588

2012-13       1,94,216

2013-14      2,00,005

 4 महानगरों में पेटेंट के पेंडिंग मामले

महानगर         आवेदन

दिल्ली           88,297

चेन्नई           78,405

कोलकाता       39,911

मुम्बई            31,058

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