जान बचाने 500 किमी चली बाघिन, 76 दिनों में रास्ता तय कर वापस घर लौटी

Dharmendra Chouhan

Publish: Oct, 12 2017 01:33:07 (IST) | Updated: Oct, 12 2017 01:35:03 (IST)

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जान बचाने 500 किमी चली बाघिन, 76 दिनों में रास्ता तय कर वापस घर लौटी

नरभक्षी हो चुकी बाघिन को मारने का आदेश दिया था। बाघिन को पकड़कर दूसरी जगह रखा गया, लेकिन वह भाग गई वापस अपने घर लौट आई।

नागपुर. नरभक्षी हो जाने के कारण एक बाघिन को मारने का आदेश हुआ था। लोगों की जान को खतरा मानकर उसे ५०० किमी दूर से पकड़ कर एक टाइगर रिजर्व में रखा गया था, लेकिन बाघिन वहां से भाग निकली और चलते-चलते वापस वहीं पहुंच गई जहां से उसे पकड़ा गया था। इस तरह से वह अपने घर वापस पहुंच गई। इस सफर को तय करने में बाघिन को ७६ दिन लगे। इस बीच इस बाघिन ने दो इंसानों की जान ली और कुछ जानवरों को मारकर अपनी भूख मिटाई। यह सारे आंकड़े बाघिन को गोली मारने के लिए पीछा कर रही टीम ने जीपीएस कॉलर से बताए हैं। जीपीएस कॉलर बाघिन के गले में बंधा है, जिससे उसकी लोकशन पता चलती रहती है।

कैद में रहेगी या मरेगी, आज हो सकता है फैसला
पशु प्रेमियों ने बाघिन को गोली मारे जाने के आदेश के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। मामले पर बहस भी पूरी हो चुकी है। गुरुवार को फैसला आ सकता है। केस की सुनवाई के दौरान बताया गया है कि इस बाघिन ने इंसानों को मारा है। इसके बाद या तो उसे कैद में रखा जाए या फिर उसे गोली मार दी जाए। इस पर कोर्ट आज फैसला दे सकता है। वन विभाग ने इस बाघिन का तकनीकी नाम 27-सी1 रखा था। इसी के कारण पर उसकी लोकेशन ट्रेस की जा रही थी।

ब्रह्मपुरी से पकड़ा था, वापस वहीं पहुंच गई
बाघिन (27-सी1) को 10 जुलाई को महाराष्ट्र में चंद्रपुर जिले के दक्षिणी ब्रह्मपुरी से कैद किया गया। इसके बाद इसे 29 जुलाई को हिंगानी जिले स्थित बोर टाइगर रिजर्व लाया गया, लेकिन बाघिन यहां एडजस्ट नहीं हो सकी और भाग गई। वन विभाग को जैसे ही बाघिन के टाइगर रिजर्व से निकलने की सूचना मिली। बाघिन के पीछे एक टीम लगा दी गई। बाघिन के गले में एक रेडियो कॉलर लगा था जो बाघिन का लोकेशन बता रहा था।

दो बार नेशनल हाइवे भी किया पार
बोर से अपने घर दक्षिणी ब्रह्मपुरी का सफर बाघिन ने 500 किलोमीटर की दूरी में भटकते हुए तय किया, इसमें बाघिन को कुल 76 दिन लगे। 500 किमी के लंबे रास्तें कई नदी-नाले, घास के मैदान और सड़कें आती है। आश्चर्य की बात है कि फोर लेन वाला नेशनल हाइवे-६ भी बाघिन ने दो बार पार किया और ब्रह्मपुरी लौट आई। बाघिन का पीछा कर रही वन विभाग की टीम में एक शूटर शिकारी भी था जिसे आदेश था कि वह बाघिन को गोली मार दे।

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