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दो सरकारें बदली लेकिन कृषि उपज मण्डियों के नहीं हुए चुनाव

सवाईमाधोपुर. प्रदेश में दो सरकारें बदली है लेकिन सत्ता में आने के बाद ना तो कांग्रेस और ना ही भाजपा सरकार ने कृषि उपज मण्डियों के चुनाव कराए है। राजस्थान की कृषि उपज मंडियों में पिछले लगभग आठ साल से सदस्यों व अध्यक्ष के चुनाव नहीं हो रहे। ऐसे में मंडी से जुड़े कामकाज अब […]

सवाई माधोपुरJun 25, 2024 / 11:27 am

Subhash Mishra

सवाईमाधोपुर. आलनपुर रोड स्थित कृषि उपज मण्ड परिसर।

सवाईमाधोपुर. प्रदेश में दो सरकारें बदली है लेकिन सत्ता में आने के बाद ना तो कांग्रेस और ना ही भाजपा सरकार ने कृषि उपज मण्डियों के चुनाव कराए है। राजस्थान की कृषि उपज मंडियों में पिछले लगभग आठ साल से सदस्यों व अध्यक्ष के चुनाव नहीं हो रहे। ऐसे में मंडी से जुड़े कामकाज अब अधिकारी ही संभाल रहे हैं।
हर पार्टी चुनावों में किसानों से जुडे मुद्््दे उठाती है लेकिन धरातल पर काम नहीं हो रहे। गत भाजपा सरकार के समय मंडी समितियों का कार्यकाल पूरा होने पर चुनाव कराने की प्रक्रिया अमल में लाई गई थी। इसके तहत वार्ड वार मतदाता सूचियां भी तैयार की गई थी। कांग्रेस सरकार ने पांच साल तक मंडियों के चुनाव कराने में रुचि नहीं दिखाई। अब एक बार फिर भाजपा सत्ता में आई है।
नई सरकार के भी छह माह बीते
नई सरकार से मंडी समितियों के चुनाव की उम्मीद जगी थी मगर छह माह बीतने के बाद भी चुनाव को लेकर को तैयारी नहीं है। सवाईमाधोपुर में आलनपुर रोड स्थि कृषि उपज मंडी समिति में 2016 के बाद चुनाव नहीं हुए। ऐसे में प्रशासक से ही काम चलाना पड़ रहा है। सवाईमाधोपुर में 2016 में रेशबना बानो अध्यक्ष बनी थी। उसके बाद चुनाव नहीं हुए है।
चुनाव के क्या है नियम…
राजस्थान कृषि उपज मंडी अधिनियम 1961 के तहत हर पांच साल में कृषि उपज मंडी समितियों के चुनाव होने चाहिए लेकिन प्रदेश की 141 से ज्यादा मंडियों में लम्बे समय से चुनाव नहीं हो रहे। राज्य में मण्डी समितियों के अध्यक्षों की कुल संख्या के अनुपात में 16 प्रतिशत एससी, 12 प्रतिशत एसटी और 21 प्रतिशत पद ओबीसी के लिए आरक्षित हैं। आरक्षित पदों में से पचास प्रतिशत पद संबंधित वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित रखे जाते हैं। ऐसे में कई महिलाएं अध्यक्ष रह चुकी।
किस मंडी में कितने सदस्य
क श्रेणी की मंडी में कुल 17 सदस्य होते हैं। इनमें आठ किसान, दो व्यापारी व अन्य होते हैं। ख, ग व घ श्रेणी की मंडी में कुल 10 सदस्य होते हैं। इनमें छह किसान, एक व्यापारी व अन्य होते हैं।
चुनाव के अभाव में चल रही अधिकारियों की मनमर्जी
मंडी समितियों के चुनाव नहीं होने से कृषि मंडियों का बजट उचित जगह खर्च नहीं हो रहा है। सरकार ने अधिकारियों को प्रशासक बना रखा है। इनको पहले तो खुद के काम से फुर्सत नहीं मिलती और दूसरा जनता के प्रतिनिधि नहीं होने से अधिकारी अपनी मनमर्जी से काम कर रहे हैं। किसानों एवं मंडी व्यापारियों का कहना है कि बजट उचित जगह खर्च नहीं हो रहा है। साथ ही ऐसी कई समस्याएं हैं। इनमें मण्डी विकास व किसानों के लिए सुविधाएं सहित कई समस्याएं शामिल है। जिनका मंडी समिति के अभाव में समाधान भी नहीं हो रहा है।
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इनका कहना है
कृषि उपज मण्डी समिति के 2016 के बाद से चुनाव नहीं हुए है। ऐसे में मंडी से जुड़े कामकाज देखना पड़ रहा है। चुनाव का उच्च स्तरीय मामला है। वहां से ही चुनाव की प्रक्रिया का निर्धारण होता है।
जगदीश आर्य, अतिरिक्त जिला कलक्टर, सवाईमाधोपुर

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