scriptWhy not the joy of silver jubilee of becoming a district | क्यों नहीं आमजन में जिला बनने की रजत जयंती की खुशी। | Patrika News

क्यों नहीं आमजन में जिला बनने की रजत जयंती की खुशी।

करौली जिला स्थापना की हो गई रजत जयंती।
दिखी मायूसी और नीरसता।

क्यों नहीं आमजन में जिला बनने की रजत जयंती की खुशी।

करौली जिला स्थापना की रजत जयंती पर नीरसता और मायूसी के माहौल से साफ संकेत मिलता है कि लोगों में जिला बनने की खुशी 25 वर्ष में काफूर हो चुकी है। खुशी हो भी कैसे, जो उम्मीदें जिला बनने पर संजोयीं थीं, वे अभी भी उम्मीदें ही हैं।

करौली

Published: July 20, 2022 11:34:04 am

करौली जिला स्थापना की हो गई रजत जयंती।
दिखी मायूसी और नीरसता।

क्यों नहीं आमजन में जिला बनने की रजत जयंती की खुशी।

करौली जिला स्थापना की रजत जयंती पर नीरसता और मायूसी के माहौल से साफ संकेत मिलता है कि लोगों में जिला बनने की खुशी 25 वर्ष में काफूर हो चुकी है।
खुशी हो भी कैसे, जो उम्मीदें जिला बनने पर संजोयीं थीं, वे अभी भी उम्मीदें ही हैं। जवानी की दहलीज पर चढ़ चुके जिले को तीन वर्ष पहले प्रदेश के पांच पिछड़े जिलों में शामिल किया गया था लेकिन जिला अभी पिछड़ेपन से उभर नहीं सका है। जिला बनने पर डांग इलाके के गांव- ढाणियों तक विकास की किरण पहुंचने और फटाफट समस्याओं के समाधान की आस आमजन ने लगाई थी लेकिन 25 वर्ष बाद भी स्थिति यह है कि जिला मुख्यालय पर ही लोग पानी-बिजली, सड़क-सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं की समस्याओं से त्रस्त हैं। टूटी सड़क, जगह-जगह गंदगी के ढेर, राह में विचरण करते आवारा जानवर, बिजली की बार-बार ट्रिपिंग, गली-मोहल्लों में अंधेरा, पानी के लिए भटकते लोग, बेलगाम अतिक्रमण, अनियंत्रित यातायात व्यवस्था और निरकुंश पार्किंग की की समस्या करौली जिला मुख्यालय की कस्बे जैसी तस्वीर पेश करने के लिए काफी है। ऐसे हाल जिला मुख्यालय पर हंै तो गांव-कस्बों में दशा सुधार की उम्मीद करना फिजूल है।
वन अधिनियम की सख्ती से बीते दो दशकों से यहां का प्रमुख खनन व्यवसाय एकदम मंदा है जबकि रोजगार के नए अवसर उपलब्ध नहीं सके हैं। धार्मिक, प्राकृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से परिपूर्ण होने के कारण जिले में पर्यटन की अपार सम्भावनाएं हैं। बावजूद इसके पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयास न जनप्रतिनिधियों के स्तर पर हुए न अफसरों ने इस बारे में गंभीरता दिखाई। ऐसे में जिले में रोजगार की समस्या सुरसा की तरह बढ़ रही है। लोग रोजगार के लिए पलायन तक को मजबूर हैं।
चम्बल पुल और करौली में हाइवे निर्माण को विकास की दृष्टि से गिनाया जा सकता है लेकिन जिला बनने पर भी रेल का सपना अधूरा है। और तो और जिला मुख्यालय से आवागमन सुविधा बेहतर बनाने को एक दशक पहले खोला गया रोडवेज डिपों कागजों में हिण्डौन डिपो के साथ संचालित है। इसके स्वतंत्र संचालन के लिए जनप्रतिनिधि उदासीन रहे हैं। संयोग से यहां मेडिकल कॉलेज की स्वीकृति मिली तो इसके निर्माण की 3 वर्ष में नींव भी नहीं रखी जा सकी है। करौली का इंजीनियरिंग कॉलेज भरतपुर और डिप्लोमा कॉलेज अलवर में चल रहा है। इंजनीयरिंग कॉलेज को तो भूमि भी नहीं मिल पा रही है। इसके करौली में शुरू होने से पहले बंद होने की तैयारी है। जबकि डिप्लोमा कॉलेज के लिए 5 वर्ष में अधूरा भवन तैयार हो सका है। इन कॉलेजों के लिए भवन नहीं है तो उधर जिले के बड़े अफसरों के लिए दो दशक से भवन तैयार हैं। वे उनमें शिफ्ट नहीं हो रहे। इससे लाखों की राशि से निर्मित आवास बिना उपयोग के जर्जर हो रहे हैं।
करौली जिला नहीं बनने पर लोग समस्याओं के लिए 110 किलोमीटर दूर सवाईमाधोपुर जाते थे। वहां से जब भी जिलाधिकारी यहां आते तो समस्याओं के समाधान के साथ कुछ सुधार की उम्मीद बनती थी। आज उस स्तर के अधिकारी यहां बैठते हैं। रोज दर्जनों लोग शिकायत-समस्याओं को लेकर उनके यहां पहुंचते हैं लेकिन ज्यादातर को प्रभावी कार्रवाई के नाम पर निराशा मिलती है। गांव-कस्बों की बात तो दूर की रही करौली मुख्यालय पर सार्वजनिक समस्याओं की सुध लेने की किसी अफसर को फुरसत नहीं। ऐसे में दीया तले अंधेरा जैसी स्थिति हो रही है। जिले की वर्षगांठ पर परम्परानुसार सरकारी भवनों और प्रमुख चौराहों पर रोशनी की औपचारिकता की गई लेकिन गली-मोहल्लों और कई बाजारों में रोज के अंधेरे को दूर करने की सुध रजत जयंती दिवस पर भी किसी को न आई।
करौली को जिला बनाने के लिए यहां के लोगों ने संघर्ष किया था। आंदोलनों में लोगों ने लाठियां भी खाई थीं। जिले की मांग यहां के लोग लगातार करते रहे। इस बीच दिवंगत हुए तत्कालीन विधायक हंसराम ने एक मौका आने पर मंत्री पद का त्याग करके करौली को जिला बनवा दिया था, तब लोगों में अनेक उम्मीदों को लेकर खुशी थी। लेकिन 25 वर्ष में भी जब दशा नहीं सुधरी हो और वो ही गंदगी, अंधेरा, टूटी सड़क सहित बेलगाम अव्यवस्थाएं नजर आ रहीं हों तो फिर भला आमजन को जिला बनने की रजत जयंती पर खुशी कैसे हो।
क्यों नहीं आमजन में जिला बनने की रजत जयंती की खुशी।
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