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2 हजार साल पुराने नाटक की प्रैक्टिस कर रहे युवा, प्राचीन परंपरा बचाने में जुटे

जयपुर . राजस्थान विश्वविद्यालय ने वैदिक कालीन शास्त्रीय नाटकों की महत्व को समझते हुए इन्हें मंच देने की कवायद शुरू की है। संगीत विभाग में 25 से अधिक युवा भास के नाटक प्रतिज्ञायौगन्धरायण की प्रैक्टिस कर रहे हैं। इसमें संगीत विभाग के साथ अन्य विभागों और कुछ बाहरी विद्यार्थी भी शामिल है। रंगकर्मी आचार्य भारतरत्न […]

जयपुरJun 30, 2024 / 01:54 pm

Girraj Sharma

जयपुर . राजस्थान विश्वविद्यालय ने वैदिक कालीन शास्त्रीय नाटकों की महत्व को समझते हुए इन्हें मंच देने की कवायद शुरू की है। संगीत विभाग में 25 से अधिक युवा भास के नाटक प्रतिज्ञायौगन्धरायण की प्रैक्टिस कर रहे हैं। इसमें संगीत विभाग के साथ अन्य विभागों और कुछ बाहरी विद्यार्थी भी शामिल है। रंगकर्मी आचार्य भारतरत्न भार्गव विद्यार्थियों को शास्त्रीय नाट्य की प्रैक्टिस करा रहे। कुलपति अल्पना कटेजा ने भार्गव को विश्वविद्यालय में आवास भी उपलब्ध कराया है, जहां वे नाटक की तैयारी करवा रहे हैं। वहीं संगीत विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. वंदना कल्ला सहयोग कर रही है। प्रस्तुत है आचार्य भारतरत्न भार्गव से बातचीत के अंश….
  1. शास्त्रीय नाट्य को फिर से मंच देना कठिन है, आपने इसे क्यों चुना?
    भार्गव
    – आजादी के बाद शास्त्रीय नृत्य और शास्त्रीय संगीत ने फिर से पूरी दुनिया में अपनी जगह बनाई है, लेकिन हमारा शास्त्रीय नाटक पूरी तरह से विलुप्त हो गया, उसे फिर से स्थापित करने के लिए यह प्रयास किया जा रहा है, जो राजस्थान विश्वविद्यालय के सहयोग से ही संभव है। जब इसकी तैयारी शुरू की तो युवाओं ने इसमें रुचि जताई। 18 से 25 साल की आयुवर्ग के 25 विद्यार्थी इस नाटक की प्रैक्टिस कर रहे हैं।
  2. भास के नाटक ‘प्रतिज्ञायौगन्धरायण’ को ही आपने क्यों चुना?
    भार्गव –
    कालीदास ने अपने नाटक में भास का जिक्र किया है। इससे यह साबित होता है कि महाकवि भास महाकवि कालीदास से पहले के हैं। भास ने 13 नाटक लिखे, जिसमें ‘प्रतिज्ञायौगन्धरायण’ भी एक नाटक है। 2 हजार साल पुराना यह नाटक आज के राजनैतिक व सामाजिक परिस्थितियों में अधिक प्रासंगिक है, अनुकूल है। भास का रचना कौशल अत्यन्त विलक्षण है, विश्वनाट्य साहित्य में ऐसा उदाहरण नहीं मिलता है। इस नाटक में राजा उदयन का जिक्र बार—बार आता है, लेकिन वह मंच पर नहीं आते हैं।
  3. इस नाटक की रोचकता क्या है?
    भार्गव
    – वत्स देश के राजा उदयन पराक्रमी व वीणावादक है। यौगन्धरायण उनका महामंत्री है। वहीं उज्जयिनी के राजा प्रद्योत अपनी बेटी वासवदत्ता के लिए योग्य वर की तलाश करते हैं। उदयन को वे जामाता के रूप में देखते है और उसे बंदी बना लेते हैं। नाटक की शुरुआत यहीं से होती है। नाटक में महामंत्री यौगन्धरायण तीन प्रतिज्ञा करते हैं। पहली प्रतिज्ञा राजा उदयन को शत्रु देश से बंधनमुक्त करवाना, लेकिन उदयन बंदी बनाने का बदला लेना चाहता है और इसके लिए वासवदत्ता को साथ लेजाना चाहते हैं। यौगन्धरायण की दूसरी प्रतिज्ञा राजा उदयन को वासवदत्ता के साथ सकुशल वत्सेदश पहुंचाना और तीसरी प्रतिज्ञा वासवदत्ता को वीणा के साथ लाना। वासवदत्ता अपनी वीणा से प्रेम करती है।
  4. नाटक के माध्यम के क्या संदेश देना चाहते है?
    भार्गव
    – नाटक में स्वामीभक्ति व देशभक्ति की सीख मिलती है। दुश्मन जिस प्रकार से छल—कपट से राजा को बंदी बनाता है तो महामंत्री उस राजा के घर में घुसकर सबक सिखाता है। वहीं राज्य की रक्षा करने वाला सारे सुख छोड़कर अपने जीवन का दांव पर लगा देता है और बिना रक्त की एक बूंद बहाए शत्रु को परास्त कर देता है।
प्राचीन परंपरा को पुन: प्रतिष्ठित करने का प्रयास
देश में हिन्दी नाटक तो हो रहे है, जो विदेशी विचारधारा व यथार्थवाद से प्रेरित है, ये भारतीय नाट्य अवधारणा के अनुकूल नहीं है। संस्कृत में शास्त्रीय नाट्य हमारी प्राचीन परंपरा है, उसे पुन: प्रतिष्ठित करने के लिए यह प्रयास किया जा रहा है। यह प्रोजेक्ट तीन माह का है, जो मई में शुरू हुआ, जुलाई तक यह चलेगा। भास का यह पहला संस्कृत नाटक अगस्त में होगा। इसे लेकर 40 युवाओं के आवेदन आए है, उसमें से हमने 25 युवाओं का चयन किया है।
प्रो. वंदना कल्ला, विभागाध्यक्ष, संगीत विभाग

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