कराटे प्लेयर हरिओम चाय बेचने को मजबूर, जीत चुके हैं 60 से अधिक मेडल

देश-विदेश में 60 से अधिक मेडल जीत चुके मथुरा के कराटे खिलाड़ी हरिओम आर्थिक तंगी के चलते अपने परिवार का खर्चा चलाने के लिए चाय बेचने को मजबूर।




By: भूप सिंह

Updated: 25 Jun 2021, 09:47 PM IST

नई दिल्ली। भारत में कई खिलाड़ी ऐसे हैं जो जब तक खेल रहे थे तो उनका स्टारडम आसमान छू रहा था, लेकिन जैसे ही खेल से दूर हुए तो गुमनामी में खो गए। यहां तक कि आर्थिक तंगी के चलते फल और सब्जियां बेचने को मजबूर हो गए। उन्हीं में से एक हैं मथुरा के कराटे स्टार हरिओम शुक्ला ( karate Hari Om Shukla )। उन्होंने एक समय कराटे के अपने कौशल से देश-विदेश में नाम कमाया था, लेकिन अब वह चाय बेचने को मजबूर हैं। वह चार बेचकर अपने 11 सदस्यीय परिवार का खर्चा चला रहे हैं। लक्ष्मी नगर निवासी हरिओम शुक्ला ने मात्र 13 साल की उम्र में कराटे की दुनिया में कदम रख दिया था, लेकिन पिछले 6 साल से वह खेल में शिरकत नहीं कर पा रहे हैं।

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पैसा बना कॅरियर में रोड़ा
खेल की दुनिया से अचानक गायब हुए कराटे स्टार हरिओम शुक्ला ने 2006 में खेलना शुरू किया था। जल्द ही उन्होंने देश और विदेश की तमाम प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। कही सोना झटका तो कहीं चांदी की झोली भरी। इंटरनेशनल ब्लैक बेल्ट यूएसए से प्रशिक्षित हरिओम ने श्रीलंका, काठमांडू, बांग्लादेश, थाईलैंड में आयोजित प्रतियोगिताओं में पदक जीते।

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कामयाबी नहीं दूर सकी गरीबी
भले ही हरिओम ने गोल्ड और सिल्वर मेडल जीते हो, लेकिन उनका खेल उनकी गरीबी को दूर नहीं कर सका। इसके बाद उन्होंने अपना घर चलाने के लिए बच्चों को कोचिंग देना शुरू किया मगर कोरोना ने उन्हें यह काम भी नहीं करने दिया। अब वह अपने पिता की पुश्तैनी चाय की दुकान चलाने को मजबूर हैं। इसी चाय की दुकान से उनके तीन भाइयों के 11 सदस्यीय परिवार का खर्चा चलता है। इससे इतनी आय नहीं होती कि वे खेल को जारी रख सकें। हरिओम आर्थिक तंगी के चलते 2015 के बाद कहीं बाहर खेलने नहीं जा सके हैं। कहते हैं कि इतना पैसा नहीं है कि आने-जाने के किराए की व्यवस्था हो सके। ऐसे में प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना ही छोड़ दिया।

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100 से अधिक मेडल जीते
हरिओम ने वर्ष 2006 में मथुरा में प्रशिक्षक इरफान खान से कराटे का प्रशिक्षण लेना शुरू किया। श्रीलंका, मलेशिया, बांग्लादेश, थाईलैंड, काठमांडू के साथ ही देश में मुंबई, भोपाल, बटाला, नागपुर, कर्नाटक के मांड्या समेत कई अन्य स्थानों पर हुई कराटे प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर 60 से अधिक पदक और सर्टिफिकेट झटके।

भूप सिंह
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