आज के युवा हाथों में हॉकी स्टिक थामने से क्यों हट रहे पीछे, जानें एक्सपर्ट ओपिनियन ?

पत्रिका कीनोट सलोन में सवालों के जवाब देते हुए अशोक ध्यानचंद ने खुद के बारे में बताया कि विरासत में उन्हें नाम तो मिला लेकिन इसके पीछे उनकी मेहनत, जुनून और काबिलियत है।

By: Prashant Jha

Published: 04 May 2020, 06:48 PM IST

खेल

नई दिल्ली। ओलंपिक विजेता और हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के बेटे अशोक ध्यानचंद ने कहा कि आज के युवाओं में हॉकी के प्रति खेल की रुचि कम होती जा रही है। उसकी मुख्य वजह स्कूल है। बच्चों के भीतर शुरू से ही खेलों की भावना को जगना उसके माता-पिता और सरकार की है। खेल की सही जगह स्कूल है। इसके लिए सरकार को इसे एक सबजेक्ट के तौर पर रखना चाहिए। राज्य सरकारों को इसे गंभीरता से लेने की जरूरत है। इससे बच्चे और उनके माता-पिता भी जुड़ेंगे।

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पत्रिका कीनोट सलोन में सवालों के जवाब देते हुए अशोक ध्यानचंद ने खुद के बारे में बताया कि खेल उन्हें विरासत में मिला. लेकिन नाम के पीछे खुद की मेहनत, जुनून और काबिलियत है। जब खेलना शुरू किया था तो उस समय करियर नाम की चीज़ नहीं थी लेकिन मन में ढान लिया था कि ओलंपियन अशोक ध्यानचंद कहलाना है । काफी मेहनत और त्याग के बाद इस जगह तक पहुंचा हूं। लिहाजा बच्चों को स्कूल लेवल पर इसकी शुरुआत हो जानी चाहिए। तभी जाकर बच्चों में खेल के प्रति इच्छा बढ़ेगी और आगे चलकर हॉकी स्टिक थामेंगे।

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