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पंचायती रहेगी इनकी, हस्ताक्षर करेंगे पढ़े-लिखे

पंचायत का सरपंच बनने के लिए दो साल से तैयारी कर रहे थे, अब राज्य सरकार ने शैक्ष...

नागौर

Updated: January 16, 2015 12:09:36 pm

नागौर। पंचायत का सरपंच बनने के लिए दो साल से तैयारी कर रहे थे, अब राज्य सरकार ने शैक्षणिक योग्यता के साथ घर में शौचालय की अनिवार्यता भी लागू कर दी। रही-सही कसर आरक्षण लॉटरी ने पूरी कर दी।

कहीं अनुसूचित जाति तो कहीं महिला सीट। अब तो निर्वाचन आयोग ने चुनावों का कार्यक्रम भी घोषित कर दिया हैं। अगले 15-20 दिन में चुनाव भी हो जाएंगे, इतने कम समय में शौचालय तो बन सकता है, लेकिन आठवीं व दसवीं की अंकतालिका डिग्री कहां से लाएं।

इस स्थिति में गांवों के पूंजीपति ऎसे युवाओं की तलाश कर रहे हैं जो गरीब परिवार से हैं और चुनाव लड़ने की स्थिति में नहीं हैं, लेकिन उनके पास आठवीं व दसवीं पास की योग्यता जरूर है।

चुनाव की तैयारी में जुटे पंूजीपति ऎसे युवाओं (महिला एवं पुरूष) को अपने हाथों की कठपुतली बनाने की तैयारी कर रहे हैं, ताकि गांव की पंचायती उनके हाथ में रहे और हस्ताक्षर कठपुतली बनने वाले पढ़े-लिखे युवा करे।

राज्य निर्वाचन आयोग ने 24 दिसम्बर को पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव का कार्यक्रम घोषित कर दिया है। इससे तीन दिन पहले ही सरकार ने सरपंच के लिए आठवीं एवं पंचायत समिति व जिला परिषद सदस्यों के लिए दसवीं पास की योग्यता अनिवार्य कर दी थी।

चुनाव कार्यक्रम घोçष्ात होने के साथ ही गांवों की राजनीति गरमा गई है।
जहां सामान्य की सीट है, वहां वर्षो से पंचायती कर रहे दिग्गज मैदान में बने रहने के लिए उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश सहित अन्य स्थानों से आठवीं व दसवीं की अंकतालिका लाने के लिए हजारों रूपए खर्च कर रहे हैं, जबकि जहां महिला एवं अनुसूचित जाति की सीट है, वहां ऎसे लोगों की तलाश तेज हो गई है जो उनके इशारे पर सरकारी कागजों पर हस्ताक्षर करते रहे और सरपंचाई वे खुद करे।

आधी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित
जिला परिषद में 47 में से 24 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं, जबकि जिले की 14 पंचायत समितियों की 370 सीटों में से 192 महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। गत कार्यकाल पर नजर डालें तो करीब आधे से ज्यादा सदस्य दसवीं की योग्यता नहीं रखते, ऎसे में आने वाले चुनाव में ज्यादातर महिलाएं ऎसी होंगी, जो पहली बार चुनाव लड़ेंगी। इसके साथ अनुसूचित जाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित सीटों में महिला सीट पर शैक्षणिक योग्यता वाला प्रत्याशी तलाशना भी मुश्किल है।

तैयार होंगे नए राजनेता
पंचायतीराज चुनाव में शैक्षणिक योग्यता की अनिवार्यता लागू करने से गांवों में अब राजनेताओं की नई पौध तैयार होगी। अब तक ऎसे लोगों की बारी नहीं आती थी जो शिक्षित तो हैं पर आर्थिक एवं सामाजिक दृष्टि से कमजोर होने के कारण उन्हें मौका नहीं मिल पाता था। अब मजबूरी में ही सही, पर धीरे-धीरे गांवों की राजनीति में ऎसे लोगों का प्रवेश बढ़ेगा, जो शिक्षित हैं और विकास कार्यो पर ध्यान देंगे।

एक नजर
जिला परिषद सदस्य सीटों पर आरक्षण की स्थिति
कुल सदस्य - 47
महिला - 24
अनुसूचित जाति - 10
अन्य पिछड़ा वर्ग - 10

प्रधान सीटों पर आरक्षण की स्थिति
कुल - 14
महिला - 7
अनुसूचित जाति - 3
अन्य पिछड़ा वर्ग - 3

14 पंचायत समिति सदस्य सीटों पर आरक्षण
कुल सदस्य - 370
महिला - 192
अनुसूचित जाति - 84
अन्य पिछड़ा वर्ग - 78

खिलौना नहीं बने राजनीति
ग्रामीण राजनीति में सुधार के लिए सरकार ने शैक्षणिक योग्यता की अनिवार्यता लागू कर अच्छा संदेश दिया है। इस व्यवस्था के लागू होने से जो लोग प्रभावित हो रहे हैं, वे शुरूआती दौर में विरोध करेंगे और राजनीति में बने रहने के लिए सारे दांव भी लगाएंगे।

हमारी यह जिम्मेदारी है कि हम जनता को जागरूक करें। राजनीति खिलौना नहीं बने, इसके लिए शिक्षित लोगों को अपनी समझ से काम लेना होगा। इस व्यवस्था से निश्चित ही भविष्य अच्छा होगा और राजनीति की छवि भी सुधरेगी।
- सुनिता गुप्ता, प्राचार्य, महिला कॉलेज (व्याख्याता, राजनीति विज्ञान)

क्या कहते हैं युवा
दूसरों के हाथों की कठपुतली बनने से गांवों में वंशवाद की परम्परा का अंत नहीं होगा। सरकार ने अपना काम कर दिया है, अब युवाओं को चाहिए कि वे पंूजीपतियों के हाथों की कठपुतली नहीं बनकर गांवों के विकास में अपनी भागीदारी निभाएं।
- श्रवणराम, कॉलेज छात्र, जोधियासी

दूसरों के दम पर चुनाव लड़कर उनके हाथों की कठपुतली बनने की बजाए युवाओं को खुद के स्तर पर लड़ना चाहिए। यदि शिक्षित दूसरों के दम पर चुनाव लड़ेंगे तो उन्हें पांच साल तक गलत कार्यो के लिए भागीदार बनना पड़ेगा।
- प्रेमसिंह चारण, छात्र झोरड़ा

यदि कोई राजनीति में पैर जमाए रखने के लिए किसी को कठपूतली बनाकर चुनाव लड़ाता है तो प्रशासन को इस पर पूरी नजर रखनी चाहिए और जीतने के बाद सरकारी कार्यक्रम में महिलाओं एवं पढ़े-लिखे जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति पर जोर देना चाहिए।
- लक्ष्मी विश्नोई, कॉलेज छात्रा, नागौर

हमें अपनी काबिलियत पर चुनाव लड़कर समाज को शक्ति का अहसास कराना होगा। मुख्यमंत्री यदि एक महिला हो सकती है तो फिर ग्राम पंचायत व समिति में महिला राजनीति क्यों नहीं कर सकती। इसके लिए महिलाओं को जागरूक करना होगा।
- मंजू चोयल, रोल

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