एशियाई मुक्केबाजीः विकास फाइनल में, तीन भारतीय मुक्केबाजों को कांस्य पदक    

विश्व चैंपियनशिप के पूर्व कांस्य पदक विजेता विकास कृष्णन ने शुक्रवार को एशियाई मुक्केबाजी चैंपियनशिप के फाइनल में जगह बना ली।

By: balram singh

Published: 05 Sep 2015, 10:48 AM IST

विश्व चैंपियनशिप के पूर्व कांस्य पदक विजेता विकास कृष्णन ने शुक्रवार को एशियाई मुक्केबाजी चैंपियनशिप के फाइनल में जगह बना ली।

अन्य तीन भारतीय मुक्केबाजों को सेमीफाइनल में हार का सामना करना पड़ा है जिससे उनको कांस्य पदक से ही संतोष करना पड़ा।

विकास (75 किग्रा) ने सेमीफाइनल में अपने दमदार खेल से इराक के वहीद को एकतरफा मुकाबले में 3-0 से पटकनी दी।

Vikas KrishanVikas Krishnan

खिताब के लिए शनिवार को विकास का सामना उज्बेकिस्तान के बेकटेमिर मेलिकूजीव से होगा। एशियन गेम्स के कांस्य पदक विजेता विकास ने इराक के पहलवान को अंत तक कोई मौका नहीं दिया।

अन्य मुकाबलों में सतीश कुमार (91 किग्रा से अधिक), एल देवेंद्रो सिंह (49 किग्रा) और गत चैम्पियन शिव थापा (56 किग्रा) को कड़ी चुनौती पेश करने के बावजूद अपने सेमीफाइनल मुकाबलों में शिकस्त के साथ कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा.

अन्य भारतीयों ने प्रशंसकों को निराश किया है। सतीश कुमार (प्लस 91 किग्रा) को चीन के वांग के हाथों 0-3 से शिकस्त का सामना करना पड़ा।

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एल देवेंद्रो (49 किग्रा) को शीर्ष वरीयता प्राप्त उज्बेकिस्तान के हसनबाय दुस्तमातोव से 1-2 से हार मिली, जबकि गत चैंपियन शिव थापा (56 किग्रा) को भी उज्बेकिस्तान के मुरोदजोन से 1-2 से ही हार का सामना करना पड़ा।

खुशी की बात तो ये है कि शिकस्त के बावजूद ये सभी मुक्केबाज सेमीफाइनल में पहुंचते ही अक्टूबर में होने वाली विश्व चैंपियनशिप के लिए जगह पक्की कर चुके हैं, जो 2016 में होने वाले रियो ओलंपिक खेलों के लिए पहली क्वालीफाइंग प्रतियोगिता है।

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इनके अलावा मदन लाल (52 किग्रा) और मनोज कुमार (64 किग्रा) भी शुक्रवार को विश्व चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई कर गए। इन दोनों भारतीय मुक्केबाजों को क्वार्टर फाइनल में हराने वाले प्रतिद्वंद्वियों के फाइनल में पहुंचने के कारण विश्व चैंपियनशिप का टिकट मिला। मदन को दूसरे वरीय शाखोबिदीन जोइरोव ने जबकि मनोज को फाजलिद्दीन गेबनाजारोव ने हराया था।

एशियाई खेलों के कांस्य पदक विजेता विकास भारतीय मुक्केबाजों में सबसे आखिर में रिंग में उतरे और  भारतीय टीम को खुशी मनाने का मौका दिया। आम तौर पर रक्षात्मक रवैया अपनाने वाले विकास ने आक्रामक अंदाज अपनाया और अपने ताकतवर मुक्कों से वहीद को बैकफुट पर धकेल दिया।

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राष्ट्रीय कोच गुरबक्श सिंह संधू ने कहा कि विकास की मुक्केबाजी में ताकत थी। उसने शुरु से ही दबदबा बना लिया था और अंतिम राउंड में उसने दिखाया कि कैसे कुछ नया करते हैं।

इससे पहले सतीश को कड़ी चुनौती पेश करने के बावजूद चीन के वैंग झिबाओ के खिलाफ 3-0 से शिकस्त का सामना करना पड़ा। इस हार पर संधू ने कहा कि इतने करीबी मुकाबले में हारना हमेशा निराशाजनक होता है
संधू ने कहा कि देवेंद्रो की हार के बावजूद मुझे उस पर गर्व है, उसकी हार से मेरा दिल टूट गया है पर उसने अच्छी कोशिश की थी। मैच के दौरान उज्बेकिस्तान का मुक्केबाज भाग्यशाली रहा क्योंकि उसके ज्यादा झुकने और कोहनी से देवेंद्रो को पीछे धकेलने की रणनीति पर रैफरी का ध्यान नहीं गया और उसे कोई चेतावनी नहीं मिली अन्यथा नतीजा कुछ और होता।
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