ढाई वर्ष बाद मिनी सचिवालय निर्माण कार्य का जिन्न आया फिर बाहर

-जिला कलक्टर ने मिनी सचिवालय निर्माण कार्य शुरू करवाने का लिया निर्णय
-पूर्व के प्लान के मुताबिक बना तो सात मंजिला 25 बीघा भूमि पर बनेगा मिनी सचिवालय

By: Krishan chauhan

Published: 20 Nov 2020, 11:06 AM IST

ढाई वर्ष बाद मिनी सचिवालय निर्माण कार्य का जिन्न आया फिर बाहर

-जिला कलक्टर ने मिनी सचिवालय निर्माण कार्य शुरू करवाने का लिया निर्णय
-पूर्व के प्लान के मुताबिक बना तो सात मंजिला 25 बीघा भूमि पर बनेगा मिनी सचिवालय

श्रीगंगानगर. पुरानी शुगर मिल की 128 बीघा भूमि में से 25 बीघा भूमि पर प्रदेश का पहला सात मंजिला मिनी सचिवालय बनकर जल्दी तैयार होगा। इसकी भव्यता ऐसी होगी कि छह लिफ्ट लगेंगी। जी-प्लस सात का यह भवन बनेगा औ प्रदेश में इतना बड़ा मिनी सचिवालय यह पहला होगा। पीडब्ल्यूडी और टाउन प्लानर की ओर से इस भवन का ले-आउट प्लान तैयार कर राज्य सरकार से पहले ही स्वीकृत करवाया जा चुका है। साथ ही मिनी सचिवालय की निर्माण कार्य की एजेंसी आरएसआरडीसी को पहले बनाया गया था। तब यह भवन दो साल में जुलाई 2020 तक बनकर तैयार किया जाना था। इस बीच मामला किसी कारण से अटक गया और मिनी सचिवालय का निर्माण कार्य सिरे नहीं चढ़ पाया। अब ढाई साल बाद फिर से श्रीगंगानगर में मिनी सचिवालय निर्माण कार्य का जिन्न बाहर निकलकर आया है। गुरुवार को जिला कलक्टर महावीर प्रसाद वर्मा ने महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए इस कार्य को दोबारा शुरू करवाने की घोषणा जिला कलक्ट्रेट सभागार में हुई बैठक में की।

एक छत के नीचे होंगे सभी ऑफिस
इस मिनी सचिवालय में जिला कलक्टर, पुलिस अधीक्षक, एडीएम प्रशासन, एडीएम सर्तकता, एसडीएम, समाज कल्याण, जल संसाधन, पेयजल, अनुसूचित जाति, जनजाति, कृषि, उद्यान, सांख्यिकी, रोजगार, श्रम, ग्रामीण विकास सहित विभिन्न विभागों के कार्यालय संचालित होंगे।

15 दिन में यूआइटी जारी करेगी एनआइटी
यूआइटी की ओर से 15 दिन की एनआइटी जारी की जाएगी। इसमें 21 प्लॉट जो (36 बीघा) के है, की बिक्री की जाएगी। बाद में बचे हुए प्लॉट्स के टुकड़े कर इन्हें बेचा जाएगा। इसकी बिक्री का 90 प्रतिशत हिस्सा वित्त विभाग को जमा होगा, जिसे बाद में आरएसआरडीसी को ट्रांसफर कर दिया जाएगा तथा 10 प्रतिशत भाग यूआइटी को जाएगा। मिनी सचिवालय बनने के बाद कई महत्वपूर्ण विभाग इसमें शिफ्ट हो जाएंगे।

कलक्टर ने कार्य स्थल का किया निरीक्षण
जिला कलक्टर वर्मा ने गुरुवार दोपहर को निर्माणाधीन स्थल मिनी सचिवालय का दौरा किया एवं उसके आसपास के सभी क्षेत्र को स्वयं देखकर नक्शे द्वारा इस प्रोजेक्ट को समझकर आवश्यक दिशा निर्देश दिए हैं। उन्होंने वहां से निकलने वाली सडक़ों को तुरन्त बनाए जाने का निर्देश दिया ताकि मिनी सचिवालय तक पहुंचने का रास्ता सुगम हो। इस क्षेत्र को पूर्णतया विकसित करने से ना सिर्फ वहां पहुंचना सरल होगा बल्कि देखने में भी यह क्षेत्र खूबसूरत लगेगा। श्रीगंगानगर के विकास के लिए यह प्रोजेक्ट अति महत्वपूर्ण है।

एक दशक की मांग, अब फिर से जगी उम्मीद
जिला मुख्यालय पर सभी सरकारी कार्यालय अलग-अलग जगह बिखरे होने से जिले के लोग वर्षों से परेशान थे। वर्तमान कलक्टे्रट में वाहनों की पार्किंग की जगह बिल्कुल नहीं है। कलक्ट्रेट भवन 1927 में गंगनहर के आने के दौरान बनाया गया था। तब यह जल संसाधन विभाग का कार्यालय था। लेकिन श्रीगंगानगर के जिला बनने के बाद यहां कलक्ट्रेट स्थापित कर दिया गया। इस प्रोजेक्ट को तत्कालीन जिला कलक्टर ज्ञानाराम ने बनाकर लागू करने की पूरी प्लानिंग की लेकिन उनके बाद कई मामला बीच में अटक गया। अब फिर से कलक्ट्रेट भवन बनने की उम्मीद जगी है।

यह होगा मिनी सचिवालय में खास
—छह लिफ्ट सिस्टम लगेंगे- हर मंजिल पर आने-जाने को छह लिफ्ट सिस्टम लगेंगे। दोहरी सीढिय़ां भी बनेंगी।

-25 बीघा में मिनी सचिवालय की बनेंगी बिल्डिंग-हनुमानगढ़ का मिनी सचिवालय भी इतनी ही जगह पर बना हुआ है।
दो कॉन्फ्रेंस हॉल-भवन में दो मीटिंग हॉल बनेंगे। वर्तमान कलक्ट्रेट सभा कक्ष से दो गुना बड़े होंगे।

-दो वीसी रूम- वीडियो कॉन्फ्रेंस के लिए भवन में दो वीसी रूप बनेंगे। साथ में ही निक ऑफिस होगा।
-पांच बीघा जमीन पर पार्किंग स्पेस- अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए अलावा वाहनों के भी पार्क करने का पूरा स्पेस होगा।

पार्क और हरियाली भी-मिनी सचिवालय परिसर के पास ही पार्क और हरियाली विकसित की जाएगी।

Krishan chauhan Reporting
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