यह भी अजीब नियम: पात्रता के लिए महिलाओं को शादीशुदा होना जरूरी

Also strange rule: Women must be married to be eligible- आंगनबाड़ी केन्द्र में कायज़्कताज़् और सहायिका के पदों के लिए अविवाहिता की नो एंट्री.

By: surender ojha

Published: 12 Jul 2021, 06:10 PM IST

श्रीगंगानगर. पिछले करीब 46 साल से आंगनबाड़ी केन्द्रों में कायज़्कताज़् और सहायिका की भतीज़् में महिलाओं का वचज़्स्व है। केन्द्र सरकार ने वषज़् 1975 राज्य सरकारों की मदद से छोटे बच्चों और गभज़्वती महिलाओं को कुपोषण से बचाने के लिए इन केन्द्रों का संचालन शुरू किया था।

इन केन्द्रों पर कायज़्कताज़् और सहायिका के पदों पर आवेदक महिला तो अनिवायज़् है ही, इसके साथ साथ वह विवाहिता भी होना जरूरी है। विवाहित महिला ही आवेदन के लिए पात्रता रखेगी।

विभागीय अधिकारियेां का कहना है कि बेटियां शादी करने के उपरांत संबंधित गांव या शहरी वाडज़् से चली जाती है, ऐसे में उनके शादी करने से पद खाली रह जाता है।

दुबारा चयन करने के लिए जटिल प्रक्रिया अपनाई जाती है। बदलते परिवेश के बावजूद अविवाहित युवतियों को कायज़्कताज़् या सहायिका के लिए एंट्री नहीं है।

महिला एवं बाल विकास विभाग हर साल खाली पदों के लिए संबंधित बाल विकास परियोजना अधिकारी कायाज़्लय में आवेदन आमंत्रित करता है। इन आंगनबाड़ी केन्द्रों में युवतियों के लिए एंट्री नहीं है।

सिफज़् विवाहिता को ही आवेदन करने का दजाज़् मिलेगा। पिछले चार दशक से इन नियम कायदों में कोई बदलाव नहीं आया है। इस कारण आंगनबाड़ी केन्द्र में शादीशुदा या तलाकशुदा या विधवा महिलाओं को प्राथमिता दी जाती है। अब तक एक भी अविवाहिता को इन केन्द्रों पर सेवाएं करने का मौका नहीं मिला है।

हालांकि इन केन्द्रों की मॉनीटरिंग के लिए महिला एवं बाल विकास में उपनिदेशक या निदेशक के पदों पर अफसर के रूप में अविवाहित काम कर सकती है लेकिन आंगनबाड़ी केन्द्रों में विवाहिता होना जरूरी है।
राज्य सरकार की ओर से वषज़् 1975 में आंगनबाड़ी केन्द्रों का संचालन शुरू किया गया था।

वषज़् 1975 से 2015 तक नियम कायदो में परिवतज़्न नहीं किया गया। वषज़् 2016 में नियम कायदों में बदलाव किया गया। इसमें पुराने नियम कायदों की रही खामियों और विसंगतियों को दूर किया गया।

लेकिन विवाहिता की अनिवायज़्ता में कोई बदलाव नहीं किया। इस कारण अविवाहित युवतियां इन पदों के लिए आवेदन नहीं कर सकती। महिला एवं बाल विकास विभाग का कहना है कि आशा सहयोगिनों के लिए अविवाहित युवती को सेवाएं करने का मौका दिया जा सकता है।

एक ओर राज्य सरकार ने आंगनबाड़ी केन्द्रों पर कायज़्कताज़्, सहायिका और आशा सहयोगिनों के लिए आयु की सीमा 21 से 40 तय कर रखी है। वहीं विधवा कोटे के लिए अधिकतम आयु की सीमा 45 वषज़् तक कर दी गई है।

लेकिन साठ साल पार होने पर सेवाएं समाप्त करने का नियम भी बना रखा है। साठ साल को बुजुगज़् की श्रेणी में मानकर उनसे काम नहीं करवाने के लिए बकायदा दिशा निदेज़्श भी दिए हुए है। इस संबंध में जिले की अधिकांश बुजुगज़् महिलाओंं को हटाया भी जा चुका है।

महिला एवं बाल विकास विभाग के उपनिदेशक तेज प्रकाश अग्निहोत्री का मानना है कि विभागीय नियम कायदों में महिला को विवाहिता होना जरूरी है। वषज़् 2016 में नियमों में संशोधन किया गया था लेकिन किसी ने इस संबंध में आपत्ति दजज़् नहीं कराई।

विवाहिता की अनिवायज़्ता इसलिए रखी गई कि बेटियां शादी के बाद अपने ससुराल चली जाती है, ऐसे में गांव की बहु को कायज़्कताज़् या सहायिका वहां नियमित काम कर सकेगी।

इसी मंंशा के अनुरुप विवाहिता जरूरी कर दिया गया था। यह सही है कि बदलते परिवेश मे युवतियों को भी आंगनबाड़ी कायज़्कताज़् या सहायिका के पदों पर आवेदन का मौका देना चाहिए। नियम कायदे बदलने का काम सरकार का है।

surender ojha Reporting
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