श्रीगंगानगर में होगा चने का बंपर उत्पादन

-परीक्षण टीम की राष्ट्रीय प्रभारी से बातचीत

-इलाके में फसल देख प्रभावित हुई टीम

By: vikas meel

Published: 13 Mar 2018, 10:05 PM IST


श्रीगंगानगर.

जिले में चने की फसल अच्छी है और बंपर उत्पादन होने का अनुमान है। चना परीक्षण की राष्ट्रीय टीम की प्रभारी डॉ.अनिता बब्बर और अन्य वरिष्ठ वैज्ञानिक इलाके में फसल देख प्रभावित हुए हैं। मंगलवार को 'राजस्थान पत्रिका' से बातचीत में टीम प्रभारी ने श्रीगंगानगर की फलस को बहुत अच्छी बताते हुए कहा कि इसकी वृद्धि एवं झाड़ अच्छा है। कद अपेक्षाकृत काफी ऊंचा होने से इसकी मशीन से भी कटाई करवाई जा सकती है।

 

डॉ. बब्बर ने कहा कि यहां के कृषि अनुसंधान केंद्र की चना परियोजना ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर का जर्म प्लाजा संरक्षित कर रखा है। विकसित किस्में बेहतर परिणाम दे रही है। कद ऊंचा होने की वजह से मशीन से कटाई का काम करवाया जाए खेतीहर मजदूरों की कमी की समस्या काफी हद तक हल हो जाएगी, इसके अलावा समय एवं पैसे की भी बचत होगी। काम जल्दी होने से वर्षा आदि कारणों से होने वाले नुकसान की आशंका भी कम रहेगी। टीम प्रभारी के अनुसार श्रीगंगानगर में चना पर अनुसंधान अच्छा चल रहा है, किस्मों की रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी है, उपज ज्यादा है। पछेती बुवाई वाली किस्मों के लिए बढिय़ा काम हो रहा है।

 

शीर्ष वैज्ञानिकों में से एक डॉ.बब्बर भी टीम में

जबलपुर की डॉ.बब्बर का नाम चना के क्षेत्र में देश के शीर्ष वैज्ञानिकों में शामिल है। इन्होंने कुछ समय पहले चने की बड़े दाने वाली डॉलर किस्म जेजीके-5 को विकसित किया है, इसे काफी पसंद किया जा रहा है। इसके अलावा जेजी-14, जेजी-63, जेजी-12 एवं जेजी-36 किस्म को विकसित कर चुकी हैं। काबली चना कि किस्म जेजीके-1 को विकसित करने का श्रेय भी इनको जाता है।

 

खेत देखे, किसानों से की बात

चना परीक्षण की टीम ने मंगलवार को हिन्दुमलकोट, ओड़की, एक सी बड़ी, दो डी बड़ी, कालिया, मोहनपुरा क्षेत्र में चना के खेत देखे, फसल प्रदर्शनों का जायजा लिया तथा किसानों से बातचीत की। बूंद-बूंद और फव्वारा पद्धति से चने की खेती को भी देखा। किन्नू के बाग में लिए जा रहे चने का ब्यौरा भी लिया। वरिष्ठ वैज्ञानिक धोली (बिहार) की डॉ.माधुरी आर्य, कानपुर के डॉ.मंजूनाथ के अलावा स्थानीय परियोजना के प्रभारी डॉ.विजयप्रकाश आर्य, डॉ.दशरथ सागर एवं डॉ. रूपसिंह मीणा भी परीक्षण में साथ थे।


'दलहनी फसल चना की तरफ रुझान और बढऩा चाहिए। यह कम पानी में पकने के साथ-साथ चने को लेने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है'

-डॉ. अनिता बब्बर प्रभारी, राष्ट्रीय चना परीक्षण टीम

 

'जलवायु परिवर्तन को देखते हुए चना अधिक होना चाहिए। क्षेत्र में इसकी कई किस्मों के परिणाम अपेक्षा के अनुसार है, देश के अन्य हिस्सों में भी लिया जा रहा है'

-डॉ. विजयप्रकाश आर्य चना परियोजना प्रभारी, श्रीगंगानगर

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