करोड़ों की कृषि भूमि हड़पी, एसीबी की जांच में उजागर हुआ फर्जीवाड़ा

Crops of agricultural land seized, fake investigation uncovered in ACB investigation- तहसीलदार, पटवारी, भू-अभिलेख निरीक्षक, प्रोपर्टी डीलर सहित 7 जनों के खिलाफ मामला दर्ज.

By: surender ojha

Published: 03 Apr 2021, 12:27 PM IST

श्रीगंगानगर. भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की करीब दो साल लंबी पड़ताल के बाद करोड़ों रुपए की कृषि भूमि हड़पने का मामला उजागर हुआ है। एसीबी के डीएसपी वेदप्रकाश लखोटिया की जांच रिपोर्ट के आधार पर अब श्रीविजयनगर पुलिस थाने में तत्कालीन राजस्व तहसीलदार, पटवारी, भूअभिलेख निरीक्षक, प्रॉपर्टी डीलर सहित सात जनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

करीब ढाई साल पहले डीएसपी वेदप्रकाश लखोटिया को किसी मुखबिर ने आकर सूचना दी कि श्रीबिजयनगर तहसील क्षेत्र में चक 1-टीएसएम में करीब साढ़े 16 बीघा नहरी कृषि भूमि को फर्जी तरीके से हड़प कर लिया गया है।

इसकी जांच शुरू की तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। इस भूमि की जमाबंदी 16 जुलाई 1982 को गुरदीप सिंह के नाम से इस कृषि भूमि का पुख्ता आवंटन हुआ था। इस नाम का कोई व्यक्ति भूमि आवंटन से आज तक सामने नहीं आया। एक दलाल ने पूरी कहानी रची।

तत्कालीन राजस्व तहसीलदार, गिरदावर, पटवारी आदि से मिलीभगत कर आवंटी के नाम से मिलते जुलते कालियां गांव के रहने वाले गुरदीपसिंह को इस भूमि का आंवटी बनाकर उसके दस्तावेज पेश किए। यह आवंटी मृतक था एेसे में कालियां गांव के शख्स को भी मृतक बताकर उसके नाम से पूरी जमीन का इंतकाल कराया गया।
डीएसपी ने बताया कि प्रोपर्टी डीलर ने कालियां निवासी गुरदीपसिंह का हरियाणा से 11 नवंबर 1998 को जारी मृत्यु प्रमाण पत्र के साथ हनुमानगढ़ जिले में ग्राम पंचायत फतेहगढ़ द्वारा 15 अक्टूबर 2018 की तारीख में जारी वारिसनामा एवं शपथ पत्र को आधार मानते हुए मनजीत कौर नामक महिला की ओर से इस जमीन के लिए आवेदन करवाया गया।

इसमें बताया गया कि गुरदीपसिंह पुत्र नगेंद्रसिंह की 10 जून 1998 को मृत्यु हो गई थी, जिसका 11 नवंबर 1998 को मृत्यु प्रमाण पत्र जारी हुआ। इस मृत्यु प्रमाण पत्र के आधार पर ग्राम पंचायत फतेहगढ़ ने मनजीतकौर के नाम वारिसनामा नंबर जारी कर दिया।

मनजीतकौर की ओर से 11 अक्टूबर 2018 को राजस्व तहसीलदार श्रीविजयनगर के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया गया। इस पर तहसीलदार ने तत्कालीन हल्का पटवारी द्वारा 18 अक्टूबर को पुष्टि किए जाने के 5 दिन बाद ही 23 अक्टूबर को इंतकाल खोल दिया। साथ ही विरासतन इंतकाल स्वीकृति भी प्रदान कर दी।
डीएसपी के अनुसार मृत्यु प्रमाण पत्र में बताए गए स्थान कालिया में भी इसकी जांच नहीं करवाई गई। ग्राम पंचायत फतेहगढ़ द्वारा जारी जिस वारिसनामा के आधार पर इंतकाल खोला गया, उसकी भी जांच नहीं करवाई।

यही नहीं विरासतन इंतकाल से पहले किसी न्यूज पेपर में आपत्ति सूचना भी प्रकाशित नहीं करवाई। पटवारी से इस भूमि का इंतकाल फर्जी वारिस मनजीत कौर आदि के नाम दर्ज करवाकर तहसीलदार ने महज 5 दिन में ही इंतकाल स्वीकृति प्रदान करते हुए तस्दीक कर दिया। नियमानुसार इंतकाल दजज़् होने के उपरांत एक महीने तक ग्राम पंचायत द्वारा इंतकाल स्वीकृत नहीं करने पर ही तहसीलदार इंतकाल स्वीकृति के लिए सक्षम होता है।
जांच में पाया गया कि फर्जी वारिस मनजीत कौर से प्रॉपर्टी डीलर हरीश सोनी ने इस भूमि को नाम मात्र राशि पर अपने किसी जानकार के नाम बेचान करने के लिए सौदा पहले ही करवा लिया था।

जांच में उजागर हुआ कि इस कृषि भूमि के मूल आवंटन की पत्रावली भी रिकॉर्ड से गायब की जा चुकी है। जांच में अनुशंसा की गई कि मनजीतकौर तथा अन्यों के विरुद्ध विधिवत मुकदमा दजज़् कर इस भूमि घोटाले और भू-माफिया गिरोह में शामिल लोगों व अधिकारियों के विरुद्ध कानूनी कारज़्वाई की जाए।

यह जांच रिपोर्ट एसीबी के मुख्यालय जयपुर को प्रेषित की गई। वहां से यह मामला पिछले माह यहां पुलिस अधीक्षक को भेजा गया। पुलिस अधीक्षक के आदेश पर श्रीविजयनगर थाने में यह प्रकरण दर्ज किया गया है।

surender ojha Reporting
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