कोरोना की दूसरी लहर को लेकर डिप्रेशन के मरीज हुए दोगुने, अभी बैठा हुआ सदमा

- अभी भी महसूस होते हैं कोरोना के लक्षण, बार-बार हाथ धोने की पड़ी आदत

By: Raj Singh

Published: 12 Jul 2021, 10:39 PM IST

श्रीगंगानगर. कोरोना की दूसरी लहर का खौफ तो गुजर गया लेकिन काफी लोगों के मन में अभी भी उस भयावह मंजर का डर बैठा हुआ है। इसके चलते लोग डिप्रेशन में आ गए और अभी भी कोरोना का असर मान रहे हैं। ऐसे मरीजों की संख्या दूसरी लहर के बाद बढ़ गई है।


राजकीय चिकित्सालय के मनोरोग विभाग व पोस्ट कोविड के आउटडोर में कोरोना की दूसरी लहर समाप्त होने के बाद कोरोना से समस्याओं को लेकर मरीज आ रहे हैं। जहां उनकी काउंसलिंग व इलाज किया जा रहा है। मनोरोग विशेषज्ञों ने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर के बाद डिप्रेशन के मरीज बढ़े हैं। जहां पहले प्रतिदिन दस-पंद्रह ऐसे मरीज आते थे लेकिन अब उनकी संख्या दो गुनी हो गई है।

यह लोग कोरोना की वजह से डिप्रेशन में आए हुए हैं। ऐसे मरीज आते हैं कि उनको अभी सांस लेने में समस्या महसूस होती है। जबकि उनकी जांच नार्मल आ रहा है। कोरोना की दूसरी लहर का भय लोगों के मन से अभी तक निकला नहीं है। जो कोरोना से पीडि़त हुए या जिनके परिवार में कोरोना से मौतें हुई। ऐसे लोग अभी खौफ जदा हैं। ऐसे मरीजों की काउंसलिंग करके उनको समझाइस की जा रही है। जिससे वे कोरोना के भय से उबर सकें।


ये शिकायत लेकर आ रहे लोग
- एक मरीज को उसके परिजन लेकर आए और बताया कि कोरोना की दूसरी लहर में इतना खौफ बैठ गया है कि वह बार-बार सैनेटाइजर से हाथ धोते हैं। घरवालों को भी बार-बार हाथ धोने के लिए बोलते हैं, जिससे घर वाले भी परेशान है।
- ऐसे मरीज भी आ रहे हैं, जिनको कोरोना हुआ था और अब वे बिलकुल ठीक है। लेकिन अभी उनको लगता है कि सांस नहीं आ रही है।
- कई मरीज ऐसे भी आए हैं जो कोरोना से ठीक होने के बाद गुमशुम हो गए हैं। उनको घर से बाहर निकलने में भी डर बना रहता है।
- कई लोग लॉक डाउन में काम-धंधे ठप होने से भी मानसिक तनाव में आकर डिप्रेशन के शिकार हो गए हैं।
- जिस परिवार में कोरोना से किसी सदस्य की मौत हो गई थी। उनके परिवार के लोग भी डरे हुए हैं। उनमें बच्चे और बड़े शामिल है।
दूसरी लहर के बाद बढ़े मरीज
- मनोरोग विशेषज्ञों ने बताया कि पहले राजकीय चिकित्सालय के मनोरोग विभाग में प्रतिदिन 60-70 मरीज आते थे लेकिन अब मरीजों की संख्या सौ से ऊपर पहुंच गई है। जो मरीज बढ़े हैं, उनमें डिप्रेशन के मरीज अधिक है। जहां पहले दस-पंद्रह मरीज डिप्रेशन के आते थे, वहीं अब तीस-तीस मरीज प्रतिदिन समस्याएं लेकर आ रहे हैं। उनकी सभी समस्याएं कोरोना की दूसरी लहर से जुड़ी है।


इनका कहना है
- कोरोना की दूसरी लहर के बाद लोगों पर मानसिक रूप से खासा असर पड़ा है। कुछ तो काम-धंधे चौपट होने से डिप्रेशन का शिकार हो गए और कुछ ऐसे भी है, जिनके परिवार में कोरोना से किसी की मौत हो गई। वहीं कोरोना से ठीक हुए लोग अभी तक संभल नहीं पा रहे हैं और उनको समस्याएं महसूस हो रही है। ऐसे मरीजों की काउंसलिंग की जा रही है और उनको दवाएं दी जा रही हैं।
डॉ. प्रेम अग्रवाल, मनोरोग विशेषज्ञ मनोरोग विभाग राजकीय चिकित्सालय।

Raj Singh Reporting
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