चेहरे पर मायूसी, मन में चिंता और वापसी की राह ताकती आंखें

Disappointment on face, anxiety in mind and eyes looking back for returnलॉक डाउन से टे्नों और बसों की आवाजाही बंद होने के कारण ऐसे लोगों की वापस का रास्ता भी बंद हो गया है।

श्रीगंगानगर. पूरे देश में एकाएक हुए लॉक डाउन से उन लोगों के लिए सबसे बडी पीड़ा है जिनके सदस्य जिले से बाहर है। टे्रनों और बसों की आवाजाही बंद होने के कारण ऐसे लोगों की वापस का रास्ता भी बंद हो गया है।

रोजाना फोन पर कुशलक्षेप पूछने के सिवाय कोई विकल्प नहीं बचा। जो लोग बाहर है, वे इतने अधिक सक्षम नहीं है कि मुंहमांगे दामों पर प्राइवेट वाहनों को किराये पर लेकर घर लौट आएं। हालात सुधरने तक स्थिति अधिक विकट हो रही है। यहां रहने वाले परिवारों को भी राशन सामग्री जैसे रोज मर्रा की वस्तुएं मिल नहीं रही है। जिनको मिल रही है उनके दाम बढ़ा दिए गए है। ऐसे में सबसे अधिक मार मध्यम वर्गीय परिवारों को मिल रही है।

केस-एक

पुरानी आबादी की सोनू के पति गुडगांव की एक कंपनी में काम करते है, इस कंपनी के काम के सिलसिले में जब गुवाहटी गए थे, वापसी आने के लिए प्रयास कर रहे थे कि पीएम नरेन्द्र मोदी ने लॉक डाउन की घोषणा कर दी। ऐसे में ट्रेनों की आवाजाही बंद हो गई। इस कारण बार बार अपने पति को फोन पर तसल्ली देने के सिवाय उसके पास कोई चारा नहीं है। वापसी कैसे हो पाएगी, यह तो ट्रेनों की आवाजाही पर भी निर्भर करता है।

केस-दो

चक 3 ई छोटी की पूनम के चेहरे पर मायूसी है और मन में गहरी चिंता, कारण सिर्फ एक कोरोना। इस महिला का भाई अपने दोस्तों के साथ पूना गया और वहां कोरोना वायरस की चपेट में आ गया। हालांकि उसकी जांच में रिपोर्ट नगेटिव आई लेकिन चिकित्सकों ने उसे किसी तरह का सफर करनी मनाही कर दी है। ऐसे में वह अगले दस दिन पूना एरिया में ही अपने रिश्तेदार के पास रुका रहेगा। उसका पूरा परिवार सुबह से शाम तक उसकी तबयीत के बारे में पूछ रहा है।

केस -तीन

ब्लॉक एरिया में रहने वाले अरोड़ा परिवार की बेटी कोटा पढऩे गई थी, होली पर कोचिंग से छुट्टी नहीं मिली तो वह वहीं रहने लगी। लेकिन जनता कफ्र्यू के बाद तीन सप्ताह लगातार अब लॉक डाउन रहने के कारण हॉस्टल वालों ने हॉस्टल खाली करवा दिया है। ऐसे में इस बेटी को वहां पिछले तीन दिन आई समस्या को देखते हुए परिवार वापस लाने के लिए जिला प्रशासन की मदद मांग रहा है। अब अनुमति मिलते ही उसे वापस लाया जा रहा है।

केस- चार

जवाहरनगर एरिया में शर्मा परिवार का विक्रांत गुजरात के नडियाल एरिया में प्राइवेट जॉब करता है। जनता क$फर्यू के बाद लॉक डाउन की घोषणा के बाद यह परिवार चिङ्क्षतत हो उठा है। विक्रांत का कहना था कि जिस फैक्ट्री में काम करता हे वहां उद्योग बंद हो चुका है। ऐसे में चाय पीने की समस्या हो गई है। ट्रेन और बस सेवाएं बंद होने के कारण उसकी यहां वापसी संभव नहीं हो रही है।

श्रीगंगानगर. पूरे देश में एकाएक हुए लॉक डाउन से उन लोगों के लिए सबसे बडी पीड़ा है जिनके सदस्य जिले से बाहर है। टे्रनों और बसों की आवाजाही बंद होने के कारण ऐसे लोगों की वापस का रास्ता भी बंद हो गया है। रोजाना फोन पर कुशलक्षेप पूछने के सिवाय कोई विकल्प नहीं बचा। जो लोग बाहर है, वे इतने अधिक सक्षम नहीं है कि मुंहमांगे दामों पर प्राइवेट वाहनों को किराये पर लेकर घर लौट आएं। हालात सुधरने तक स्थिति अधिक विकट हो रही है। यहां रहने वाले परिवारों को भी राशन सामग्री जैसे रोज मर्रा की वस्तुएं मिल नहीं रही है। जिनको मिल रही है उनके दाम बढ़ा दिए गए है। ऐसे में सबसे अधिक मार मध्यम वर्गीय परिवारों को मिल रही है।

surender ojha Reporting
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