आखिर चालीस साल बाद विवाद खत्म

- संपत्ति विवाद में तीन भाइयों ने लोक अदालत में किया राजीनामा

 

By: vikas meel

Published: 10 Feb 2018, 09:37 PM IST

श्रीगंगानगर.

सेशन कोर्ट में जब नरेश जैन ने अपने बड़े भाई विजय जैन के पांव छुए तो उनकी आंखें छलक उठीं। जैन पेट्रोल पंप के संचालक नरेश जैन और उनके दो भाइयों में चालीस साल से पैतृक संपत्ति विवाद कोर्ट में विचाराधीन था। शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत में जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरसिंहदास व्यास ने दोनों पक्षों के राजीनामे के फैसले पर मुहर लगाई तो यह परिवार एक-दूसरे के गले लगकर पिछली गलतियों और आरोप-प्रत्यारोप पर पछतावा करने लगा। सेशन जज व्यास के समक्ष ही जैन बंधुओं ने पैतृक संपत्तियों का बंटवारा करने और भविष्य में मुकदमेबाजी नहीं करने का संकल्प लिया। हालांकि, इस परिवार में राजीनामा पिछले साल हो चुका था लेकिन अंतिम मुहर नहीं लगी थी। लेकिन शनिवार को जैसे ही सैशन जज ने डिक्री का फैसला किया तो पक्षकार नरेश जैन, विजय जैन और प्रदीप जैन तीनों भाई एक साथ खड़े नजर आए।

 

साहब, आप ही करें मदद

सेशन जज के समक्ष किसी वकील के माध्यम से अपनी बात करने के बजाय कुछ लोगों ने खुद ही गुहार लगाई। कोई बिजली बिल अधिक आने की शिकायत लेकर आया तो कोई पैतृक संपत्ति विवाद के संबंध में कानूनी हवाला देकर मार्गदर्शन ले रहा था। शनिवार सुबह ग्यारह से दोपहर तीन बजे तक मामले निपटाए गए। सेशन जज के साथ अधिवक्ता अजय मेहता और नरेन्द्र सकलानी ने सदस्य के रूप में सहयोग किया। इस दौरान आए पक्षकारों की बातें सुनकर राजीनामे के लिए प्रेरित किया गया।

 

एडीजे रणवाह का किया शुक्रिया

अग्रसेन नगर, लक्कड़ मंडी और ई ब्लॉक में भूखण्ड, दुकानों और आवासीय मकान जैसे पैतृक संपत्ति विवाद में एक परिवार के बारह वारिसों में विवाद एडीजे संख्या दो कोर्ट में विचाराधीन था। इस कोर्ट का चार्ज शनिवार को एडीजे संख्या एक सुनील रणवाह के पास था। सुलह करवाई तो इस परिवार ने जिद्द छोड़ राजीनामे के लिए सहमत हुए। फिर परिवार की महिलाओं को कोर्ट में बुलाया गया। पूरे परिवार के साथ रिश्तेदारों का जमावड़ा लग गया। इस विवाद को निपटाने में परिवारिक सदस्यों ने एडीजे रणवाह का शुक्रिया अदा किया।

तलाक लेने आए थे, घर बसाने को राजी

फैमिली कोर्ट में चक 23 जैड की कुलविन्द्र कौर तलाक लेने आई थी। उसे समझाया गया। शनिवार को इस कोर्ट में लोक अदालत के दौरान इस महिला और उसके पति रेशम सिंह में सुलह करवाकर दोनों को फूल माला पहनाई गई। इसके बाद फैमिली कोर्ट के स्पेशल जज एलडी किराड़ू, काउंसलर परमजीतकौर जाखड़ व प्रियंका पुरोहित के समक्ष दंपती घर बसाने के लिए राजी हो गया। इस दंपती की शादी 2014 में हुई थी और ये डेढ़ साल से अलग थे। इसी तरह, पुरानी अम्बिका सिटी निवासी सोनू छाबड़ा और पुरानी आबादी चांदनी चौक निवासी मोहित में भी विवाद था।

 

इनमें भी सुलह कराई गई। इसी तरह, वार्ड 19 चावला कॉलोनी निवासी गुरप्रीत कौर बनाम हरविन्द्र सिंह में भी राजीनामा हुआ। गांव 6 ईए पदमपुर हाल रवि चौक वार्ड आठ पुरानी आबादी निवासी राजकुमारी की अपने पति पवन से अनबन थी। पुरानी आबादी धींगड़ा स्ट्रीट निवासी अंजू और पंजाब के बरनाला जिले के धनौला मंडी निवासी सिमरनजीत सिंह के साथ गत दो सालों से विवाद का मामला विचाराधीन था। साधुवाली के ओमप्रकाश और भादरा के वार्ड छह निवासी सुमनदेवी कुम्हार के बीच तीन साल से मुकदमेबाजी चल रही थी। समझाइश के बाद ये सभी युगल फिर से साथ रहने पर सहमत हुए।

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