scriptDue to laxity of new personnel, animal husbandry department is backwar | नए कर्मियों की ढिलाई के चलते लक्ष्य में पिछड़ा पशुपालन विभाग | Patrika News

नए कर्मियों की ढिलाई के चलते लक्ष्य में पिछड़ा पशुपालन विभाग

पशुपालन विभाग का मुख्य कार्य पशुओं के इलाज के साथ-साथ पशुओं की नस्ल सुधार करना भी है। इसके लिए अच्छी नस्ल के पशुओं के सीमन से कृत्रिम गर्भाधान करवाया जाता है। जिले में पशुओं की संख्या के हिसाब से हर वर्ष लक्ष्य मिलता है। इस साल श्रीगंगानगर जिला लक्ष्य से पिछड़ता जा रहा है। इसका कारण फरवरी 2020 में नियुक्त 65 नए कर्मियों की कमजोर परफॉर्मेन्स है। इससे पहले स्टाफ का टोटा लक्ष्य में बाधा बन रहा था।

श्री गंगानगर

Updated: October 29, 2021 03:01:25 am

-करीब डेढ़ साल पहले श्रीगंगानगर जिले को मिले थे 65 पशुधन सहायक
- पशुओं के इलाज में महिला पशुधन सहायक करती है संकोच
योगेश तिवाड़ी. श्रीगंगानगर. पशुपालन विभाग का मुख्य कार्य पशुओं के इलाज के साथ-साथ पशुओं की नस्ल सुधार करना भी है। इसके लिए अच्छी नस्ल के पशुओं के सीमन से कृत्रिम गर्भाधान करवाया जाता है। जिले में पशुओं की संख्या के हिसाब से हर वर्ष लक्ष्य मिलता है। इस साल श्रीगंगानगर जिला लक्ष्य से पिछड़ता जा रहा है। इसका कारण फरवरी 2020 में नियुक्त 65 नए कर्मियों की कमजोर परफॉर्मेन्स है। इससे पहले स्टाफ का टोटा लक्ष्य में बाधा बन रहा था।
नए कर्मियों की ढिलाई के चलते लक्ष्य में पिछड़ा पशुपालन विभाग
नए कर्मियों की ढिलाई के चलते लक्ष्य में पिछड़ा पशुपालन विभाग
श्रीगंगानगर जिले को नई भर्ती से ये पशुधन सहायक मिले थे। इनमें 27 महिला कर्मी है। महिला कर्मी पशुओं के इलाज में संकोच करती हैं जो विभाग के गले की हड्डी बन गया है। हालांकि कई महिला कर्मी सहायक की सहायता से प्रैक्टिस करने लगी हैं परन्तु जिला लक्ष्य में पिछड़ता जा रहा है। विभाग का संयुक्त निदेशक कार्यालय तीन-तीन माह से काम की समीक्षा करता है। लक्ष्य के अनुरूप काम नहीं करने पर 50 से अधिक कार्मिकों को नोटिस थमाए जा चुके हैं।
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मुर्रा भैंस व थारपारकर गाय पर जोर
विभाग भैंस लिए मुर्रा नस्ल और गाय के लिए राठी, गीर और थारपारकार नस्ल के लिए कृत्रिम गर्भाधान पर जोर देर रहा है। हालांकि विभाग के पास गाय की विदेशी नस्ल एचएफ के सीमन भी मौजूद है लेकिन वे स्थानीय वातावरण के हिसाब से अनुकूल नहीं होने से विभाग इस बचता है।
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विभाग करवा चुका दो बार प्रशिक्षण
पशुपालन विभाग उपनिदेशक डॉ.सुनील सोबती ने बताया कि पशुधन सहायकों की नियुक्ति के बाद विभाग उनके सात-सात दिन के दो बार प्रशिक्षण करवा चुका है। एक बार कार्मिकों की नियुक्ति के तुरत बाद उनके नजदीकी प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालय में और दूसरी बार संयुक्त निदेशक कार्यालय में प्रशिक्षण दिया गया।
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इलाज के लिए भटक रहे पशुपालक
गांव के पशुओं के इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है। पशुधन सहायक कभी-कभार उपकेन्द्र खोलती है। पशुपालकों को इलाज के लिए भटकना पड़ता है।
-धमेन्द्र खीचड़, ग्रामीण, कालवासिया
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बांडा कॉलोनी में उपचार की व्यवस्था नहीं
पशुपालकों को पशुओं के उपचार के लिए 4 किमी दूर बांडा गांव या 12 किमी अनूपगढ़ जाना पड़ता है। विभाग उपकेन्द्र या अस्पताल खोले तो पंचायत जगह देने को तैयार है।
-देवेन्द्रपाल सिंह, सरपंच, बांडा कॉलोनी
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अच्छा काम कर रही महिला कर्मी
हमारे गांव के पशु चिकित्सालय में हालांकि चिकित्सक का पद रिक्त पड़ा है परन्तु महिला पशुधन सहायक ने व्यवस्था संभाल रखी है। पशुओं का सही समय पर उपचार हो रहा है।
-मानक थालोड़, ग्रामीण, मुकलावा
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अब भी नहीं सुधरे तो करेंगे विभागीय कार्रवाई
मुख्यालय से दिए गए लक्ष्य हमें हर हाल में पूरे करने होते हैं। काम नहीं करने वाले कार्मिकों को नोटिस भी दिए गए हैं। अब भी उनके काम में सुधार नहीं होता है तो विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ.रामवीर शर्मा, संयुक्त निदेशक, पशुपालन विभाग, श्रीगंगानगर
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कृत्रिम गर्भाधान प्रगति
वर्ष.. लक्ष्य ..प्राप्ति
2018-19..135850..91937
2019-20..106700..87025
2020-21..112035..89855
2021-22..112035..34591(अक्टूबर तक)

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