कोरोना के कारण बढ़ी सरकारी अस्पताल में मरीजों के लिए सुविधाएं, खर्च हुए करोड़ों

- सुविधाओं का लाभ उठा रहे जिले व पंजाब इलाके के मरीज

By: Raj Singh

Published: 29 Nov 2020, 10:32 PM IST

श्रीगंगानगर. कोरोना संक्रमण के दौर में जहां सभी सुविधाओं में कमी आई लेकिन इसके चलते चिकित्सा सेक्टर में लोगों की सुविधाओं के लिए करोड़ों की राशि खर्च हुई। जिसका लाभ जिले व पंजाब के सीमावर्ती इलाके के गांवों के लोगों को भी मिल रहा है।


कोरोना संक्रमण के पहले जहां कई सुविधाओं से राजकीय चिकित्सालय जूझ रहा था। वहीं कोरोना आते ही धीरे-धीरे सुविधाएं मिलना शुरू हुई और केन्द्र व राज्य सरकार की ओर से चिकित्सा सुविधाओं पर करोड़ों की राशि खर्च की गई। इन सुविधाओं का लाभ मरीजों को कोरोना काल के बाद भी लंब समय तक मिलता रहेगा। कई मामलों में राजकीय चिकित्सालय आत्मनिर्भर हुआ है।


कोरोना लैब का निर्माण
- कोरोना संक्रमण की शुरूआत के साथ ही यहां कोरोना संदिग्ध व्यक्तियों के सैंपल जांच के लिए बीकानेर भेजे जाते थे। जिनकी रिपोर्ट आने में समय लगता था और गलतियां भी हो जाती थी। इसको देखते हुए यहां कोरोना जांच लैब बनाई गई। जिस पर कई करोड़ रुपए का खर्चा आया है। इस आधुनिक लैब में कोरोना संक्रमितों के सैंपलों की जांच हो रही है और उसी दिन या दूसरे दिन रिपोर्ट मिल पा रही है। जब तक कोरोना चलेगा लैब में सैंपलों की जांच होती रहेगी और यह इसके बाद भी मरीजों की जांचों के काम आएगी।


ऑक्सीजन उत्पादन प्लांट
- गंभीर मरीजों को हमेशा ही ऑक्सीजन की आवश्यकता पड़ती है। कोरोना में तो इसकी बहुत ही आवश्यकता रहती है। कोरोना का संक्रमण फेफेड़ों में फैलता है और जाम कर देता है। ऐसे में मरीज को तबीयत बिगडऩे पर तत्काल ऑक्सीजन की आवश्यकता रहती है। इसलिए यहां लाखों की लागत से ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया। जिसका मरीजों को लाभ मिल रहा है। अन्यथा अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी के चलते मौतें तक हो गई थी। अब हमेशा इसका मरीजों का लाभ मिलता रहेगा। जिसमें अब तक 35 हजार 500 जांच हो चुकी है।


ऑक्सीजन सप्लाई प्लांट
- अस्पताल में ऑक्सीजन उत्पादन प्लांट के साथ ही ऑक्सीजन सप्लाई प्लांट का निर्माण भी हुआ है। दोनों में एक करोड़ से अधिक की राशि खर्च हुई है। ऑक्सीजन उत्पादन प्लांट को ऑक्सीजन सप्लाई प्लांट से जोड़ा गया है। जहां प्लांट की आक्सीजन व बड़े सिलेण्डरों की ऑक्सीजन को जोड़ा गया है। यदि प्लांट की ऑक्सीजन का प्रेशर कम हो तो सिलेण्डरों की ऑक्सीजन प्रेशर स्वत ही बढ़ जाए। यह ऑटोमेटिक प्लांट है। जिसका कोरोना संक्रमितों सहित अन्य मरीजों को पूरा लाभ मिल रहा है।


कोविड अस्पताल
- कोरोना के दौर में संक्रमितों को अलग रखने के लिए मुख्य अस्पताल के बगल में ही कोविड अस्पताल का नया भवन बना है। जहां संक्रमितों को भर्ती किया जा रहा है। जिससे अन्य मरीजों में संक्रमण नहीं फैले। यहां अलग स्टाफ, अलग चिकित्सक व उपकरण आदि मंगवाए गए हैं। जिसका भी मरीजों का लाभ मिल रहा है।


वेंटीलेटर आए
- कोरोना के दौर से पहले राजकीय चिकित्सालय में वेंटीलेटर की संख्या 8 थी। लेकिन जैसे ही कोरोना आया तो यहां वेंटीलेटर की संख्या बढ़ती गई। कोरोना के दौर में अस्पताल को नए 18 वेंटीलेटर भेजे गए हैं थे। जिनका यहां भर्ती होने वाले कोरोना संक्रमितों को लाभ मिल रहा है।


भरपूर मात्रा में दवाएं उपलब्ध
- अस्पताल में कोरोना मरीजों के लिए रेमडेसीवीर इंजेक्शन फ्री लगाया जा रहा है, जिसकी कीमत करीब साढ़े चार हजार रुपए है। वहीं टोसिली जुमैब इंजेक्शन भी लगाए जा रहे हैं, जिसकी कीमत चालीस हजार रुपए है। सरकार की ओर से मरीजों के लिए भारी मात्रा में एंटीबायोटिक व अन्य दवाएं उपलब्ध कराई जा रही है।


कोविड अस्पताल में पाइप लाइन
- अभी हाल ही कोविड अस्पताल में पाइप लाइन के जरिए ऑक्सीजन प्लांट से ऑक्सीजन सप्लाई करने के लिए प्रस्ताव को मंजूरी मिली है। जिसका कार्य शुरू हो चुका है। इस लाइन के लगाए जाने के बाद मरीजों को सीधे ऑक्सीजन मिल सकेगी। अभी यहां सिलेण्डरों से ऑक्सीजन सप्लाई की जा रही है।


इनका कहना है
- कोरोना के दौर में चिकित्सालय कई तौहफे मिले हैं। जिसमें सबसे बड़ा तो लैब की स्थापना है। इसके अलावा यहां ऑक्सीजन उत्पादन प्लांट, ऑटोमेटिक सप्लाई प्लांट सहित अन्य सुविधाएं मिली है। जो हमेशा मरीजों के लिए लाभकारी साबित होंगी।
डॉ. केएस कामरा, पीएमओ राजकीय चिकित्सालय श्रीगंगानगर

COVID-19 virus
Raj Singh Reporting
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned