कोरोना पॉजिटिव का डर,नहीं करवा रहे ग्रामीण कोविड की सैंपलिंग

गांव-गुवाड़ में कोविड का कहर--पहले गांव में आरएमपी से उपचार करवाते हैं फिर तबीयत बिगडऩे पर जिला मुख्यालय रैफर कर देते हैं

By: Krishan chauhan

Published: 20 May 2021, 11:19 AM IST

गांव-गुवाड़ में कोविड का कहर--कोरोना पॉजिटिव का डर,नहीं करवा रहे ग्रामीण कोविड की सैंपलिंग

-पहले गांव में आरएमपी से उपचार करवाते हैं फिर तबीयत बिगडऩे पर जिला मुख्यालय रैफर कर देते हैं

-श्रीगंगानगर.कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर बहुत ज्यादा घातक बनी हुई है। शहर ही नहीं अब ग्रामीण अंचल में गांव-गांव में कोरोना संक्रमण फैल चुका है। नर्सिंग स्टाफ गांव-गांव में रोगियों का सर्वे कर रहा है। इस सर्वे में यह बात भी सामने आई है कि ग्रामीण कोविड की जांच नहीं करवाते हैं। इस इस कारण कोरोना संक्रमण की शुरू में जानकारी नहीं मिल पाती है। देहाती लोगों की सोच है कि खांसी-जुखाम व बुखार सामान्य बात है। यह तो हर साल होता ही है। गांव में सब स्टैंडर,पीएचसी-सीएचसी पर पर्याप्त डॉक्टर्स के अभाव में ग्रामीण आरएमपी डॉक्टर्स से उपचार करवाते हैं। जब ठीक नहीं होते हैं और तबीयत ज्यादा खराब हो जाती है तब सीएचसी या निजी अस्पताल में डॉक्टर्स को दिखाते हैं। वहां रोगी सामान्य होने पर उपचार कर देवा दे देते हैं जबकि इन दिनों अधिकांश रोगी संभावित कोविड के लक्षण होने पर जिला चिकित्सालय रैफर कर देते हैं।

---------हायर सैंटर पर जाना मजबूरी
श्रीगंगानगर जिले में ग्रामीण अंचल में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं ज्यादा मजबूत नहीं है। सीएचसी स्तर पर कोविड केयर सैंटर पर पर्याप्त सुविधाएं नहीं है। कुछ जगह है वहां पर पर्याप्त ऑक्सीजन,दवा व रेमडेसिवर इंजेक्शन की व्यवस्था नहीं है। इस कारण रोगी को मजबूरी में हायर सैंटर पर जाना पड़ता है। ग्रामीण अंचल में कोविड से बचाव के लिए लोगों ने वैक्सीनेशन भी बहुत कम करवा रखी है। इस कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। एम्युनिट पावर कम होती है। कई बार रोगी अन्य बीमारियों से पीड़त होता है तो कोविड का उस पर ज्यादा प्रभाव पड़ता है।

रोगी को बचाने के लिए हर संभव कोशिशजिला चिकित्सालय में रोगी को भर्ती करते हैं और फिर उसका कोविड का सैपंल देते हैं और 24 से 48 घंटे बाद कोविड की जांच रिपोर्ट मिलती है। इसके बाद डॉक्टर्स प्रोपर रोगी का उपचार शुरू करते हैं। जिला चिकित्सालय में संसाधन कम और कोविड के रोगी अधिक होते हैं। इस कारण रोगी की प्रोपर देखभाल भी नहीं हो पाती है। समय पर ऑक्सीजन लेवल,इंजेक्शन आदि नहीं मिलने पर कई बार रोगी की मौत भी हो जाती है।

—----कोरोना पॉजिटिव का डर
ग्राम पंचायत खाटलबाना के ग्राम विकास अधिकारी खैराती लाल तनेजा ने बताया कि गांव-गांव में घर-घर एएनएम व जीएनएम सर्वे कर रही है लेकिन ग्रामीण कोरोना लक्षण होने के बावजूद सैंपल नहीं करवा रहे हैं। ग्रामीणों में भय व डर बना हुआ है कि जांच करवाने पर कोरोना पॉजिटिव की रिपोर्ट आ जाएंगी और 14 दिन तक होम क्वॉरटेन रहना पड़ेगा। इस कारण गांवों में कोरोना संक्रमण की वजह से हालात बहुत ज्यादा खराब है। कोरोना को हराने के लिए कोरोना संक्रमण की चैन को तोडऩा बहुत जरूरी है।

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जिला चिकित्सालय में 250 से अधिक रोगी कोविड व संदिग्ध भर्ती है। इनमें ऑक्सीजन पर रोगी बहुत ज्यादा होते हैं। डॉक्टर्स व नर्सिंग स्टाफ रोगी का बेहतर उपचार करने के लिए हर संभव कोशिश करते हैं लेकिन कई बार रोगी गंभीर होने या ज्यादा तबीयत बिगड़ी होने पर कई रोगियों की मौत भी हो रही है। डॉ.बलदेव सिंह चौहान,प्रमुख चिकित्सा अधिकारी,जिला चिकित्सालय,श्रीगंगानगर।

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कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर गांव-गुवाड़ तक पहुंच चुकी है। नर्सिंग स्टाफ लगाकर गांव-गांव में सर्वे करवाया जा रहा है। रोगियों को दवा,जांच व उपचार के लिए सलाह दी जा रही है। डॉ.गिरधारी लाल मेहरड़ा,सीएमएचओ,श्रीगंगानगर।

Krishan chauhan Reporting
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