श्रीगंगानगर की पूर्व विधायक कामिनी जिन्दल सहित चार जनों पर एफआईआर दर्ज

FIR registered on four people including former legislator Kamini Jindal of Sriganganagar- विकास डब्ल्यूएसपी में मजदूर की खुदकुशी का मामला गहराया, जिला प्रशासन के आदेश पर सदर थाने में मुकदमा दर्ज, मृतक के परिजनो को एक करोड़ रुपए देने की मांग पर अड़े मजदूर

By: surender ojha

Published: 28 Jan 2021, 01:34 PM IST

श्रीगंगानगर. बकाया पन्द्रह माह के वेतन नहीं मिलने पर तनाव में आए रीको स्थित विकास डब्ल्यूएसपी के मजदूर हनुमान सुथार के खुदकुशी करने का मामला गहरा गया है। जिला प्रशासन के आदेश पर सदर पुलिस ने विकास डब्ल्यूएसपी कम्पनी प्रबन्धन की अध्यक्ष और पूर्व विधायक कामिनी जिन्दल, उमेश बंसल, अमित बाबर, लोकेश के खिलाफ आत्महत्या के दुष्प्रेरित करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है।

परिवादी विकास डब्ल्यूएसपी कर्मचारी मजदूर यूनियन संघर्ष समिति अध्यक्ष आत्माराम वर्मा ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि लालगढज़ाटान निवासी हनुमान सुथार विकास डब्ल्यूएसपी में जनरेटर फोरमैन के पद पर कार्यरत था लेकिन पन्द्रह माह से वेतन नहीं मिलने से परेशान था। बुधवार को उसने फैक्ट्री के मैनेजर उमेश बसंल, अमित बाबर और लोकेश से बकाया वेतन की बात कही तो उन्होंने संचालिका और पूर्व विधायक कामिनी जिन्दल से आदेश लाने के निर्देश दिए। इन तीनों की बातों पर उसने कामिनी जिन्दल से उनके घर पर जाकर बात की तो उसने कहा कि पूरे देश में सैंकड़ों लोग है किस किस को वह बेटी की ब्याह के लिए रूपए देगी। फैक्ट्री में जब बजट आएगा तब भुगतान कर दिया जाएगा। मजदूर हनुमान ने कामिनी को यह भी बताया था कि उसकी बेटी की शादी है, रुपयों का जुगात नहीं हो रहा है। यहां तक कि वेतन भी पिछले पन्द्रह माह से नहीं मिल रहा है, एेसे में वह करेगा क्या।

कामिनी ने उसकी बातें सुनने की बजाय वहां से भगा दिया। इस तनाव में मजबूरन हनुमान ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। पुलिस ने कामिनी जिन्दल सहित चार जनों पर आत्महत्या के लिए दुष्पे्ररित करने और साजिश रचने के आरोप में मामला दर्ज किया है।
इधर, मजदूरों ने शव को फैक्ट्री से बाहर नहीं निकाला और एक करोड़ रुपए परिजनों को देने की मांग को लेकर फैक्ट्री के अंदर ही धरना लगा दिया। इस फैक्ट्री में एडीएम प्रशासन भवानी सिंह पंवार, एसडीएम उम्मेद सिंह रतनू, तहसीलदार संजय अग्रवाल, एडिशनल एसपी सहीराम बिश्नोई, सीओ सिटी अरविन्द बेरड़ आदि अधिकारियों ने यूनियन पदाधिकारियों से वार्ता की। मजदूरों ने मृतक के परिजनों को एक करोड़ देने और बकाया पन्द्रह माह के वेतन सहित बाइस सूत्र मांग को लेकर नारेबाजी की।
मजदूर कर्मचारी यूनियन ने मृतक हनुमान सुथार के परिजनों को एक करोड़ रुपए का मुआवजा देने की मांग रखी है। लेकिन फैक्ट्री की मैनेजमेंट की ओर से पन्द्रह लाख रुपए, पन्द्रह माह का बकाया वेतन और पीएफ राशि देने की पेशकश की थी, इसे यूनियन ने ठुकरा दिया। इस मजदूर ने बुधवार शाम को इसी फैक्ट्री में जनरेटर रूम में जाकर फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी।

पिचपन वर्षीय यह मजदूर लालगढ़ जाटान का रहने वाला था। उसके तीन बेटियां और एक बेटा है। इस फैक्ट्री में पिछले पन्द्रह माह से मजदूरों को वेतन नहीं दिया जा रहा है। यूनियन और सीटू के पदाधिकारियों का कहना है कि जब तक मुआवजा राशि एक करोड़ रुपए का नकद भुगतान नहीं किया जाता तब तक मृतक का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।
इससे पहले फैक्ट्री में सैंकड़ों मजदूर एकत्र हो गए। इस मौके पर सीटू के वीएस राणा, प्रकाश, मोहनलाल, यूनियन के आत्माराम वर्मा,हनुमान मेहरड़ा, करनी सिंह, निर्मल सिंह, राजेन्द्र सिंह, विनोद खुडिय़ा, मंगत गौड़, रणवीर सिंह, ईशरराम, सम्पत्त सिंह, हरीसिंह स्वामी आदि ने मृतक हनुमान के परिजनों को एक करोड़ रुपए का मुआवजा देने, सभी मजदूरों की बकाया पन्द्रह माह की मजदूरी, कर्मचारियों का वेतन, जबरन छंटनी किए गए कर्मचारियों और मजदूरों को वापस काम पर लेने आदि बाइस सूत्री मांगें एसडीएम उम्मेद सिंह रतनू के समक्ष रखी।

एसडीएम ने इन मांग पत्रों के आधार पर मैनेजमेंट के साथ यूनियन पदाधिकारियों की वार्ता का दौर शुरू कराया। बुधवार रात दो बजे वार्ता सफल नहीं हुई तो गुरुवार सुबह दस बजे वार्ता का दौर शुरू किया। लेकिन दूसरे दौर की वार्ता में सहमति नहीं बनी।

विकास डब्ल्यूएसपी कर्मचारी मजदूर यूनियन संघर्ष समिति अध्यक्ष आत्माराम ने बताया कि कर्मचारी और मजदूर पिछले पन्द्रह माह से अधिक समय से वेतन नहीं मिलने के कारण परेशान है। इनके परिवार भूखे भरने के रास्ते पर आ गए है। तनाव को झेल नहीं पाने के कारण मजदूर हनुमान सुथार ने मजबूरन खुदकुशी कर ली। विकास डब्ल्यूएसपी कम्पनी प्रबन्धन की यही हठधर्मिता पूर्ण नीति रही तो कई और मजदूर भी आत्महत्या को मजबूर हो जाएंगे।

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