छात्रवृत्ति में कमीशन खोरी करने वाले तीन ई-मित्रा संचालक व ऑपरेटर सहित चार आरोपी जेल भेजे

- एसीबी ने लेबर ऑफिस मेें खंगाला रेकॉर्ड

By: Raj Singh

Updated: 21 Nov 2020, 10:41 PM IST

श्रीगंगानगर. श्रमिक परिवार के बच्चों को मिलने वाली छात्रवृति में कमीशनखोरी के इस खेल में गिरफ्तार हुए तीन ई-मित्रा संचालक व एक ऑपरेटर को एसीबी अधिकारियों ने शुक्रवार को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है। श्रम विभाग के कई अफसर और कार्मिकों के तार इन ई मित्रा संचालकों से जुड़े हुए थे, जिनकी जांच व रेकॉर्ड के लिए अधिकारियों ने शुक्रवार को ही लेबर कार्यालय पहुंचकर पड़ताल की।


टीम ने गुरुवार शाम को पुरानी आबादी स्थित लेबर कोर्ट के सामने स्थित ई मित्रा की दुकानों पर दबिश दी थी। वहां से कई रेकॉर्ड और कम्प्यूटर में फीडिंग किए गए छात्रवृत्ति योजना की सूची भी जब्त की थी। कम्प्यूटर की हार्डडिस्क से उन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका के बारे में पता लगा रही है जो इस खेल का हिस्सा थे।


उप अधीक्षक पुलिस वेदप्रकाश लखोटिया के नेतृत्व में गुरुवार को गिरफ्तार किए गए ई मित्रा संचालक सहित चारों को आरोपियों को एसीबी की स्पेशल कोर्ट में पेश रिमांड पर लिया था। शुक्रवार को चारों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।


यह था मामला
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने सूरतगढ़ के बाबा रामदेव मंदिर रोड पर स्थित श्रीश्याम लाइब्रेरी एवं ई- मित्रा के संचालक रमेश शर्मा को छात्रवृत्ति की राशि दिलाने के एवज में साढ़े तीन हजार रुपए रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। जबकि इसी दुकान पर कम्प्यूटर ऑपरेटर बलराम उर्फ बालूराम छतरगढ़ पुलिस के सहयोग से गिरफ्तार किया गया। वहीं श्रीगंगानगर की टीम ने लेबर कोर्ट में सामने स्थित लेबर कॉलोनी में कृष्णा ई मित्रा संचालक के हरी किशन पुत्र देवी लाल व महादेव ई मित्रा संचालक नरेश पुत्र जय प्रकाश को भी गिरफ्तार किया था।


सर्वर डाउन की आड़ में पनपी दलाली
राज्य सरकार ने श्रम विभाग के माध्यम से श्रमिकों के कल्याण के लिए कई योजनाएं संचालित कर रखी है। ऑनलाइन आवेदन करने और योजना के लाभार्थियों को भुगतान की प्रक्रिया ऑनलाइन की हुई है लेकिन श्रम विभाग के दलालों ने इस ऑनलाइन सिस्टम का सर्वर जानबूझकर डाउन करवा कर कमीशनखोरी का अनूठा खेल रचा। लाभार्थी अपनी देय राशि के लिए श्रम विभाग ऑफिस में चक्कर काटते रहे।

यहां तक कि कई ई मित्र दुकानों पर भी ऑनलाइन सिस्टम से दुबारा आवेदन भी किए लेकिन सर्वर डाउन के कारण उनकी पेमेंट नहीं हुई। पिछले चौबीस घंटे की जांच में यह पहलू सामने आया है। एसीबी अधिकारियों ने स्वीकार किया कि ई मित्रा संचालकों के माध्यम से श्रम विभाग के अधिकारियों को रिश्वत राशि पहुंचाकर मजदूरों के श्रमिक कार्ड बनाने, श्रमिक कल्याण योजनाओं पर देय लाभों की स्वीकृति के कई प्रकरणों में आधी राशि बतौर रिश्वत के रूप में वसूली के साक्ष्य मिले है। इसको लेकर एसीबी की टीम ने शुक्रवार को लेबर ऑफिस से संबंधित रेकॉर्ड लिया है। जिसकी जांच जारी है।


ई मित्रा संचालकों में हडक़ंप
- एसीबी की इस कार्रवाई के बाद बुधवार रात से ही जिले में कई ई मित्रा संचालकों ने अपनी दुकानें बंद रखी है। कार्रवाई के बाद से ही संचालकों में हडक़ंप मचा हुआ है। एसीबी की टीमें अन्य संचालकों के यहां भी जांच कर सकती है।

Raj Singh Reporting
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