कल्पना सी उड़ान पर उड़ रही देहाती बेटियां

कल्पना सी उड़ान पर उड़ रही देहाती बेटियां

Rajender pal nikka | Publish: Mar, 17 2019 08:13:56 PM (IST) | Updated: Mar, 17 2019 08:15:57 PM (IST) Sri Ganganagar, Sri Ganganagar, Rajasthan, India

-कोई बॉलीवुड, मार्शल आर्ट तो कोई फौज में कमा रही नाम

रायसिंहनगर. अक्सर घर की चारदीवारी में रखी जाने वाली बेटियां इस मिथक को तोडक़र बहुत आगे बढ चुकी है। कल्पना चावला की तरह अपने सपनों को इन बेटियों ने हकीकत में बदल दिखाया। इलाके की कितनी ही बेटियां अब घरों से कोसों दूर रहकर न केवल अपने परिवारों का सहारा बनी हुई है बल्कि नाम भी कमा रही है। इनमें अधिकांश ऐसी है जिनका बचपन बेहद तंगहाली व गरीबी में बीता। इसके बावजूद इन्होने उन मुकामों को छूआ जहां पहुंचने के बारे में कभी वो सोच भी नहीं सकती थी।

इलाके की इन लड़कियों में कई बॉलीवुड में जलवा दिखा रही है तो कई मार्शल आर्ट में अपने हुनर का लोहा मनवा रही है। कंधे पर बंदूक तानकर देश की सरहदों को भी बेटियां महफूज रखे हुए है। गांवों के सरकारी स्कूलों में पढी लिखी इन बेटियों के लिए अपने मुकाम तक पहुंचने का सफर भले ही मुश्किलों भरा रहा लेकिन अब इनके लिए यह सामान्य बात हो गई है। पारिवारिक रीति रिवाजों व परम्पराओं के मिथक तोड़ते हुए ये लड़कियां आगे बढ रही है।

-किरणदीप कौर, चक 64 एनपी रायसिंहनगर, बालीवुड में कमा रही नाम
किरणदीपकौर चक 64 एनपी निवासी ट्रक ड्राइवर भजनसिंह की बेटी है। किरण का जन्म चक 64 एनपी में सामान्य परिवार में हुआ। पिता ड्राइवरी करते हुए मेघालय पहुंच गए। किरण की पढाई वहीं हुई। अपनी प्रतिभा के बल पर किरण ने पूणे विश्वविद्यालय को टॉप किया।

विजय माल्या की कंपनी में एअर होस्टेस की नौकरी की। इस कंपनी के फेल हो जाने पर किरण मुम्बई चली गई तथाा बॉलीवुड में काम शुरु किया। अब किरण अनुराग कश्यप के साथ फिल्मों में काम कर रही है तथा कई टीवी सीरियलों में काम कर चुकी है। किरण न केवल एक्टिंग बल्कि गायन में भी हुनर रखती है।

-प्रमोद कुमारी भारी, चक 84 आरबी ए रायसिंहनगर-सरहद की हिफाजत में तैनात
चक 84 आरबी में गरीब परिवार में पली बढी प्रमोद कुमारी की पढाई लिखाई गांव में ही हुई। पूरा परिवार सामाजिक रीति रिवाजों व परम्पराओं पर चलने वाला होने के बावजूद प्रमोद ने इस मिथक को तोड़ा। लगन से तैयारी की तो उसका चयन सशस्त्र सीमा बल में हुआ। पिछले दस साल से वह अपने कंधे पर बंदूक रखकर भारत नेपाल सीमा पर देश की सरहद की रक्षा करते हुए अपने परिवार का भी सहारा बनी हुई है।

-रुचि ग्रोवर,रायसिंहनगर-मार्शल आर्ट में दिखा रही जलवा
रुचि ग्रोवर सामान्य परिवार में जन्मी, पली व बढी। स्नात्तक में अध्ययनरत रुचि ग्रोवर अपनी पढ़ाई के साथ कुछ अलग करना चाहती थी। उसकी यही चाह उसे मार्शल आर्ट की तरफ खींच ले गई। हालांक रुचि के लिए यह कर पाना आसान नहीं था क्योंकि मार्शल आर्ट सीखने के लिए जाने लगी तो वहां सिर्फ लडक़े ही लडक़े थे।

परिवार को भी एक बार तो संकोच हुआ कि लडक़ों के बीच वह मार्शल आर्ट कैसे सीख पाएगी। लेकिन रुचि ग्रोवर ने हार नहीं मानी। धीरे धीरे सब कुछ सामान्य हो गया तथा मार्शल आर्ट में दक्ष हो गई। अपनी दक्षता का लोहा उसने हाल ही में मार्शल आर्ट की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक जीतकर मनवाया।

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