लंबे समय बाद खुली आंख

-आज बीबीएमबी बोर्ड बैठक में हो सकता है निर्णय

By: pawan uppal

Published: 24 May 2018, 09:21 AM IST

हनुमानगढ़.

प्रदेश में जल संकट की स्थिति विकट होती जा रही है। हालत यह है कि सिंचाई पानी के अभाव में नहरी क्षेत्र में खरीफ फसलों की बिजाई प्रभावित हो रही है। दूसरी तरफ पंजाब की तरफ से मनमानी लगातार जारी रहने से इसका खामियाजा राजस्थान के किसान लगातार भुगत रहे हैं। प्रदेश में जल संकट की स्थिति गहराने के बाद अब राजस्थान सरकार रणजीत सागर बांध के लेवल निर्धारण के संबंध में स्पष्ट नीति बनाने को लेकर गंभीर हुई है।

इससे भविष्य में प्रदेश को हक का पानी मिलने की उम्मीद जगी है। चंडीगढ़ में गुरुवार को भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) की होने वाली बोर्ड बैठक में लेवल निर्धारण का मुद्दा जोर-शोर से उठने की संभावना है। बताया जा रहा है कि वर्तमान में रणजीत सागर बांध का न्यूनतम लेवल 500 से 505 मीटर निर्धारित कर डिप्लीशन अवधि में जल निकासी किया जाता है। यही स्थिति भराव अवधि की है। बांधों के भराव को लेकर भी कोई स्थिति स्पष्ट नहीं है।


मानसून सत्र में इस बांध को अधिकतम 527 मीटर तक ही भरा जाता है। जबकि इसकी भराव क्षमता 532 मीटर है। भराव व निकासी लेवल निर्धारण को लेकर लंबे समय बाद राजस्थान सरकार की आंख खुली है। गुरुवार को संभावित बीबीएमबी बोर्ड बैठक को लेकर राजस्थान के अफसरों ने जो एजेंडा तैयार किया है, उसमें रणजीत सागर बांध का भराव लेवल 532 मीटर रखने व डिप्लीशन अवधि में न्यूनतम भराव का लेवल 495 मीटर करने की मांग की है।

जल संसाधन विभाग उत्तर संभाग हनुमानगढ़ के मुख्य अभियंता केएल जाखड़ के अनुसार रणजीत सागर बांध के संचालन का अधिकार पंजाब के पास है। इसके कारण वह मनमाने तरीके से भराव व न्यूतनम लेवल का निर्धारण करता है। जिसका खामियाजा राजस्थान को भुगतना पड़ रहा है। रणजीत सागर बांध के लेवल निर्धारण के अलावा बांधों पर बनने वाली बिजली व इसके विक्रय को लेकर रेट निर्धारण संबंधी मुद्दों पर ठोस निर्णय लेने के लिए 24 मई को बीबीएमबी बोर्ड बैठक बुलाई गई है। इसमें अंतरराज्यीय जल संबंधी मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।


लेवल अपने हिसाब से
वर्ष 2012 से 2017 तक के लेवल निर्धारण पर नजर डालने पर यह प्रतीत होता है कि इसे लेकर पंजाब ने कोई स्पष्ट नीति नहीं अपनाई। वर्ष 2012 में 20 मई को रणजीत सागर बांध का लेवल 499.83 मीटर, 2013 में 507.20, 2014 में 520.48, 2015 में 522.97, 2016 में 502.56, 2017 में 514.17 मीटर था। पंजाब की मनमानी इस कद्र बढ़ गई है कि उसने विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर गत दिनों अंतरराज्यीय जल समझौते को अप्रासंगिक बताकर मानने से इनकार किया। यह मामला वर्तमान में केंद्र सरकार के पास विचाराधीन है।


शेयर हमारा सबसे ज्यादाशेयर हमारा सबसे ज्यादा
अंतरराज्यीय जल समझौते के अनुसार पौंग व रणजीत सागर बांध के शेयर में सर्वाधिक हिस्सा राजस्थान का निर्धारित है। दोनों बांधों में कुल आवक के अनुपात में राजस्थान का हिस्सा 50 प्रतिशत के करीब है। शेयर के अनुपात में ही राजस्थान सरकार पंजाब को बांधों के रख-रखाव व बिजली संयंत्रों के संचालन को लेकर होने वाले खर्चे वहन करता है। जिसका आंकड़ा करोड़ों में हैं। मगर जल समझौते के अनुसार रणजीत सागर बांध का संचालन पंजाब के अधीन होने के कारण वह अक्सर मनमानी करता है।

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