श्रीगंगानगर। सुखाडि़या सर्किल रामलीला मैदान में आयोजित हैंडलूम प्रदर्शनी और शिल्प कला मेला आयोजकों की लापरवाही से कुटीर उद्योग बनाने वाले स्वयं सहायता समूह का लाखों रुपए का सामान खराब हो गया। गुरुवार शाम को आई बरसात से रामलीला मैदान में जलभराव हो गया। आयोजकों ने इस मेले के लिए वाटरप्रूफ टैंट लगाने का आश्वासन स्टॉल लगाने वाले समूह की संचालकों को दिया था लेकिन यह साधारण टैँट बरसाती पानी झेल नहीं पाया। इससे करीब दस स्टॉलों पर कुटीर उद्योग से बनाई गई वस्तुएं और खाद्य सामग्री खराब हो गई। यह नुकसान तीन से चार लाख रुपए का बताया जा रहा है। स्थानीय निकाय विभाग राजस्थान जयपुर के आदेश पर नगर परिषद प्रशासन ने शहरी आजीविका केन्द्र नगर निगम जयपुर को सुखाडि़या सर्किल रामलीला मैदान 7 से 21 मई तक आवंटित किया था। इसके एवज में मैदान का किराया नगर परिषद की बजाय संबंधित संस्थान ने डीएलबी में जमा कराने का दावा किया। इसके आधार पर नगर परिषद ने यह मैदान शहरी आजीविका केन्द्र जयपुर को आवंटित कर दिया। बरसात से बचाव के पर्याप्त इंतजाम इन स्वयं सहायता समूह को भारी पड़े और गुरुवार शाम को हुई बारिश ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया।Instead of waterproof tent, a tent was installed in the fair, loss of lakhs of rupees due to rain
श्रीगंगानगर के राधे-राधे स्वयं सहायता समूह, राधा कृष्ण स्वयं सहायता समूह, बालाजी समूह, हनुमानगढ़ के गायंत्री समूह, प्रगतिशील समूह, सोनू समूह, जय बालाजी ग्रुप आदि की महिलाएं शुक्रवार को सुबह से लेक दोपहर तक अपना अपना सामान समेट रही थी। इन महिलाओं का कहना था कि अलग अलग समूह की ओर से विभिन्न प्रकार की वैरायटी बेचने के लिए रखी गई थी। इसमें भुजिया, बड़ी, आचार, विभिन्न प्रकार की नमकीन, पापड़, सॉफ़ट टॉयज, हैंडीक्रॉफ्ट का सामान, लडडू गोपाल की ड्रेस, पूजा के काम आने वाली विभिन्न प्रकार डिवाइजन किए गए सामान, लकड़ी के छोटे छोटे आइटम बरसाती पानी में खराब हो गए। इन महिलाओं का कहना था कि आयोजकों ने पर्याप्त सुविधा नहीं दी। यहां तक कि प्लास्टिक या तिरपाल का पर्याप्त बंदोस्त तक नहीं किया। जितना कमाया नहीं उससे ज्यादा सामान खराब होने के कारण नुकसान हुआ है।
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इस मैदान में कुटीर उद्योग से जुड़े स्वयं सहायता समूह की ओर से बनाए गए सामान को प्रदर्शन करना और संबंधित समूह की बेचान करने के लिए निशुल्क स्टॉल लगाई गई थी। लेकिन आयोजकों ने इस मैदान में बड़े बड़े झूले तक लगवा दिए। इसके अलावा वहां कुल्फी की रेहडि़यों को बकायादा स्टाल की तरह अनुमति दी गई। जबकि झूलों लगाने की लिखित अनुमति नहीं थी। इस संबंध में नगर परिषद के तत्कालीन आयुक्त और लेखा अधिकारी तारसिंह सोलंकी ने भी स्वीकारा कि झूलों की अनुमति के लिए डीएलबी के आदेश में कोई जिक्र नहीं था। इसके बावजूद झूले लगाए गए है। इस संबंध में सोलंकी ने आयोजकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगने का दावा किया है। उन्होंने बताया कि इतने बड़े झूले लगाने से पहले बकायदा अनुमति ली जानी चाहिए थी। लेकिन आयोजकों ने ऐसा कोई भी जिक्र आदेश के दौरान नहीं किया है।
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https://www.patrika.com/sri-ganganagar-news/damage-to-crops-due-to-rain-increased-concern-of-farmers-8134079/
इधर, सीएलजी के हनुमानगढ ब्रांच इंचार्ज और मेला आयोजक प्रदीप अरोड़ा ने स्वीकारा कि इस मेले में वाटरप्रूफ टैँट नहीं था, जिस क्वालिटी का टैंट चाहिए था वह नहीं मिला। ऐसे में स्टाल पर लगे पंडाल पर तिरपाल की व्यवस्था कराई गई थी लेकिन बरसात और तेज अंधड़ के कारण आशा के अनुरुप व्यवस्था नहीं हो पाई। मेला स्थल पर झूले लगाने का भी आदेश डीएलबी ने जारी किया था, हमारे पास कागज है। कागज भिजवाने के सवाल पर इस आयोजक का कहना था कि वह अभी व्यस्त है, समय मिलते ही दिखा दूंगा। उधर, नगर परिषद ने झूले बिना अनुमति लगाने पर नोटिस जारी करने का दावा किया है।
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जैसे आदेश आए तो 21 मई तक दी अनुमति
डीएलबी के आदेश की पालना में हमने रामलीला मैदान 21मई तक आंवटित किया। इसके बाद यह मेला 28 मई तक बढ़ाने के लिए डीएलबी का नया आदेश आया लेकिन इसमें नगर परिषद प्रशासन को सिर्फ सहयोग करने की बात कही है। इस संबंध में नगर परिषद ने मेले की समय अवधि बढ़ाई या नहीं, मुझे ज्यादा जानकारी नहीं है।
– लीलाधर बंसल, सहायक लेखा अधिकारी नगर परिषद
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अनुमति मैंने दी लेकिन झूलों का जिक्र नहीं
यह सही है कि मैंने ही डीएलबी आदेश की पालना में अनुमति दी थी। लेकिन इसमें झूले लगाने के लिए कोई भी आदेश नहीं है। यह किस आधार पर लगे, समझ से परे है। अब संबंधित आयोजकों को नोटिस जरूर दिए जाएंगे। नगर परिषद को इस मेले के एवज में एक भी रुपया राजस्व नहीं मिला है। अमूमन तौर पर बीस हजार रुपए प्रतिदिन के हिसाब से मैदान का किराया वसूला जाता है।
– तारसिंह सोलंकी, लेखा अधिकारी नगर परिषद श्रीगंगानगर
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पीडि़तों को मिले नुकसान का मुआवजा
सामाजिक समाज कल्याण संगठन के सचिव पूनम बिश्नोई ने बताया कि इलाके में कई स्वयं सहायता समूह काम कर रहे है। आयोजकों ने संपर्क किया तो पांच समूह की महिलाओं को मेले में स्टॉल लगाने के लिए भिजवाया था। आयोजकेां की गलती की वजह से ज्यादा नुकसान हुआ है। इस संबंध में डीएलबी से नुकसान का मुआवजा दिलाने की मांग की है। इस संबंध में जिला प्रशासन को भी अवगत कराया गया है।