सिर चढक़र बोलेगा सिनेमा का जादू, उल्लासपूर्ण माहौल में शुरू हुआ इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ श्रीगंगानगर

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-एनएसडी चेयरमैन अर्जुनदेव चारण सहित ख्यातनाम लोग पहुंचे
-अड़तीस देशों की बासठ फिल्मों की रहेगी भागीदारी
श्रीगंगानगर.

नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) के चेयरमैन डॉ. अर्जुनदेव चारण ने कहा है कि मूर्तिकला, संगीत, नाटक और अन्य सभी विधाएं आपस में जुड़ी हुई हैं यानी अंतरसंबद्ध है। एक को समझने के लिए दूसरे का ज्ञान जरूरी है। उन्होंने कहा कि फिल्म और नाटक में सीधा अंतर यही है कि फिल्म को देखने के लिए कैमरे की निगाह जरूरी है जबकि नाटक सीधा देखा जाता है और उसमें रीटेक का अवसर नहीं होता। फाउंडर डायरेक्टर डॉ.दुष्यंत ने कहा कि इस आयोजन के माध्यम से हम अच्छे और बुरे सिनेमा में फर्क दिखाना चाहते हैं।

मिसेज एशिया पेसेफिक शिवानीसिंह ने कहा कि आयोजन में अर्थपूर्ण फिल्में दिखाई जाएंगी और इससे इलाके को आर्थिक लाभ भी होगा। फिल्म चम के निर्देशक राजीव कुमार ने कहा कि किसी भी फिल्म में कैमरे की नजर होती है लेकिन सिनेमा पूरी तरह से टीम के प्रयासों का नतीजा होती है।

फाउंडर डायरेक्टर सुभाष सिंगाठिया ने कहा कि जब हम साहित्य से जुड़ते हैं तो सपने देखने का नजरिया बदल जाता है और आयोजन के रूप में हमारा सपना साकार हुआ है। स्कूल की प्राचार्य निम्फिया एस. रेड्डी ने आयोजन को सराहनीय बताया । कार्यक्रम में संवाद लेखक मयंक सक्सेना, डॉ.वीना बंसल, मुश्ताक अली अहमद खान, राजाराम कस्वां, ललित शर्मा, विमल बिहाणी, धर्मेंद्र सहारण, क्रिएटिव डायरेक्टर इरा टाक सहित कई लोग मौजूद थे। कार्यक्रम की शुरुआत एनएसडी के चेयरमैन डॉ.चारण ने हिन्दी, अंग्रेजी और राजस्थानी में की।

 

 

 

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