रिश्वत मांगने की लंबी फहरिस्त, आला अफसरों ने भी मींच ली थी आंखें

Long list of asking for bribe, top officers also took their eyes- सीएमएचओ ऑफिस में लंबे समय से जाखड़ और वर्मा चला रहे थे घूस का खेल

By: surender ojha

Updated: 27 Jun 2021, 01:18 PM IST

श्रीगंगानगर. मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ऑफिस में घूस का खेल लंबे समय से चल रहा था। इस ऑफिस में संदीप जाखड़ और पंकज वर्मा की जोड़ी ने रिश्वत मांगने के लिए कोई कसर नहींं छोड़़ी। यहां तक कि अपने ही स्टाफ के चपरासियों के सेवानिवृत्ति संबंधित दस्तावेज को दुरुस्त कराने के लिए भी रिश्वत के लिए दवाब बनाने लगे।

जिसने यह सुविधा शुल्क दिया उसका तत्काल काम हुआ। जिसने यह रकम देने से इंकार किया या कम किया तो उसके दस्तोवजों में कोई न कोई कमी बताकर उसे चक्कर कटवाएं।

आए दिन शिकायतों के बावजूद इन दोनों बाबूओं को बाल बांका न हो सका। सीएमएचओ की गुड बुक में दोनों बाबू थे। इस कारण उनके खिलाफ आई शिकायतों को नजर अंदाज कर दिया जाता। कथित या झूठे आरोप बताकर जांच को प्रभावित किया जाता।

आखिरकार लंबे समय बाद एसीबी की टीम ने इन दोनों को काबू कर पुराना हिसाब किताब चुकता कर दिया।
सीएमएचओ ऑफिस की ओर से पिछले काफी समय से इलाके में झोलाछाप चिकित्सकों की धरपकड़ अभियान में अफसरो ंकी टीम में बाबू संदीप जाखड़ को साथ लिया जाता था।

जिसने अफसरों को मोटी रकम नहीं दी उसके यहां कार्रवाई की जाती थी। आरोप है कि इस जाखड़ ने कई झोलाछाप चिकित्सकों से अफसरों के नाम पर वसूली भी की।

इन झोलाछाप चिकित्सकों ने भी अपनी गलती पर पर्दा डालने के लिए घूस की रकम को सुविधा शुल्क मानकर चुकाई। जाखड़ खुद भी अफसर की तरह रहता था। उसने सीएमएचओ के चैम्बर के पास अपना ऑफिस का जुगाड़ कर लिया था।

जाखड़ के इस चैम्बर में एसी भी लगा हुआ था। इस संबंध में तत्कालीन एडीएम प्रशासन गुंजन सोनी ने जांच भी की थी लेकिन यह जांच आगे नही सरकी।

जाखड़ राजस्थान राज्य मंत्रालियक कर्मचारी महासंघ का प्रदेश उपाध्यक्ष बना हुआ था। इस यूनियन के माध्यम से उसने अपनी पहचान जयपुर में कई अफसरों से की थी। इसका फायदा भी मिला। वह यहां से जयपुर के लिए पंकज वर्मा के साथ काम करवाने जाता भी था।
सीएमएचओ ऑफिस में किसी कर्मचारी का तबादला हो या फिर सेवानिवृत्ति दस्तावेज बनाने की प्रक्रिया, सब काम वर्मा के जिम्मे था।

यही वजह है कि शिवपुर फतूही के सरकारी चिकित्सक डा.़प्रिंस भाटिया ने इस बाबू से तंग आकर जहरीला पदार्थ का सेवन कर लिया। यह तो गनीमत रहा कि उसका तत्काल उपचार से वह बच गया। उसने अपनी शिकायत और मरने के प्रयास से पहले सुसाइड नोट में भी पंकज वर्मा की ओर से लगातार प्रताडि़त करने का आरोप लगाया था।

इस संबंध में हिन्दुमलकोट थाने में मामला भी दर्ज हुआ। लेकिन जांच की प्रक्रिया आगे नही सरकी। हालांकि इस मामले में उसे बीकानेर एपीओ कर दिया था लेकिन अपनी राजनीतिक और उच्चाधिकारियों की एप्रोच के बलबूते पर फिर से उसी सीट पर आया गया जहां से उसके खिलाफ शिकायतेां का दौर चला।
एसीबी टीम ने जैसे ही सीएमएचओ मेहरड़ा के चैम्बर से सटे कक्ष में लिपिक जाखड़ को काबू किया तो उसने बेहोशी की नौटंकी की।

जांच टीम ने उसी समय चिकित्सक से उसका चेकअप कराया तो वह सही था। पानी के छींटे देते हुए उसे होश दिलाया गया तो वह फफक होकर रोने लगा। सीआई सुभाष ढील और उनके साथ आई टीम सदस्यों ने सख्त लिहाज से बोलने का दौर शुरू किया तो वह चुपचाप गुमसुम होकर अपने चेहरे पर मास्क लगाकर बैठ गया।

इस नौटंकी को देखकर टीम सदस्यों ने जांच प्रक्रिया में सहयोग करने की नसीहत दी। इधर, पंकज वर्मा जैसे ही कलक्ट्रेट से आया तो वह काबू में आ गया। वह कुछ समझता उससे पहले जाखड़ ने घूस लेने की पूरी कहानी बयां कर दी।

surender ojha Reporting
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