पता-पुत्र के खिलाफ कोविड जांच रिपोर्ट में फर्जीवाड़े की चिकित्सा प्रशासन ने कराई एफआईआर

दो चिकित्सकों की कमेटी ने की थी मामले में जांच

By: Raj Singh

Published: 28 May 2021, 11:23 PM IST

श्रीगंगानगर. रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी मामले में फरार चल रहे आरोपी राहुल व उसके पिता धीरज गहलोत के खिलाफ फर्जी कोविड जांच रिपोर्ट प्राप्त करने व सहयोग करने का मामला दर्ज हुआ है। पुलिस ने मामले में जांच शुरू कर दी है। इस संबंध में राजकीय चिकित्सालय से रेकॉर्ड लिया जा रहा है। वहीं मामले में पुलिस अधीक्षक कार्यालय के साइबर एक्सपर्ट से भी जांच कराई जाएगी।


सदर थाना प्रभारी हनुमानाराम बिश्नोई ने बताया कि राजकीय चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी की तरफ से वरिष्ठ सहायक गोविंद्र सिंह की ओर से रिपोर्ट दर्ज कराई है कि 22 मई को नर्सिंग अधीक्षक कार्यालय के मोबाइल नंबर से धीरज गहलोत की ओर से कम्प्यूटर ऑपरेटर पवन कुमार को फोन कर राहुल केआरटीपीसीआर सैंपल ऑनलाइन करने को कहा। इसके लिए दूसरे मोबाइल नंबर से राहुल का आधार कार्ड भेजा गया। लेकिन राहुल सैंपल देने को उपस्थित नहीं हुआ।

इस पर कोविड लैब में भेजे जाने वाली लिस्ट में राहुल का नाम नहीं भिजवाया गया। क्यों कि राहुल का सैंपल प्राप्त नहीं हुआ था। जांच में पाया गया कि राहुल सैन का सैंपल में प्रोसेस नहीं हुआ है। उसकी रिपोर्ट लैब में नहीं बनाई गई है। कमेटी ने इस जांच में पाया कि राहुल सैनी आरटीपीसीआर रिपोर्ट किसी ऐसे व्यक्ति की ओर से आईसीएमआर पोर्टल पर अपलोड की गई है। जिसके पास कोविड लैब से आईसीएमआर अपलोड किए जाने की जानकारी है और उसके पास यूजर आईडी व पासवर्ड उपलब्ध है।

इस मामले में संदिग्ध व्यक्तियों के खिलाफ अपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए। पुलिस ने 420, 467, 468 व 120बी के तहत मामला दर्ज किया है। इस मामले की जांच एएसआई कृष्णचंद को सौंपी गई है। थाना प्रभारी के नेतृत्व में जांच अधिकारी व टीम ने प्रकरण में जांच शुरू कर दी है। इसके लिए राजकीय चिकित्सालय से रेकॉर्ड लिया जा रहा है। वहीं मामले में पुलिस अधीक्षक कार्यालय के साइबर एक्सपर्ट की भी मदद ली जाएगी। जिससे पोर्टल को खोलने व फर्जी रिपोर्ट भेजने वाले का पता लगाया जा सकेगा।


ये था फर्जी कोविड रिपोर्ट का मामला
- चिकित्साकर्मियों ने बताया कि चिकित्सालय के सहायक प्रशासनिक अधिकारी धीरज ने नर्सिंग अधीक्षक कार्यालय के मोबाइल नंबर से कंप्यूटर ऑपरेटर को फोन कर अपने बेटे राहुल सैन की आइडी भेजकर कर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवा लिया। जबकि वहां पर सैंपल दिया नहीं। इस पर कंप्यूटर ऑपरेटर ने लैब में ना सैंपल भेजा और ना ही सूची में नाम गया।

ऑपरेटर ने उसको मोबाइल पर कोविड नेगेटिव होने की रिपोर्ट भेज दी। बताया जा रहा है कि यह नेगेटिव रिपोर्ट आरोपी ने पुलिस से बचने के लिए विदेश भागने के लिए कराई है। जिससे उसे कोई परेशानी नहीं हो। वहीं जिले से बाहर निकलने के बाद अन्य प्रदेशों में आवागमन करने के लिए भी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े और आसानी से यहां से बाहर निकल जाए।


इंजेक्शन कालाबाजारी प्रकरण- आरोपी राहुल की लोकेशन ट्रेस कर रही पुलिस
श्रीगंगानगर. रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी के मामले में पुलिस आरोपी राहुल का लुक आउट सर्कुलर जारी करने के बाद तलाश में जुटी हुई है और शुक्रवार को पुलिस ने कई जगह तलाश की और लोकेशन ट्रेन करने का प्रयास कर रही है।


थाना प्रभारी विश्वजीत सिंह ने बताया कि इंजेक्शन वाले मामले में पांचों आरोपी न्यायिक अभिरक्षा में चल रहे हैं। पुलिस की ओर से राहुल की गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और रोजाना पुलिस उसके घर व संभावित स्थानों पर दबिश की कार्रवाई कर रही है। उसकी ओर से कोविड की फर्जी नेगेटिव रिपोर्ट लेने के संबंध में विदेश भागने की आशंका को देखते हुए लुक आउट सर्कुलर जारी कर दिया था। शुक्रवार को पुलिस ने संभावित स्थानों पर दबिश की कार्रवाई की। वहीं अब पुलिस टीम आरोपी की लोकेशन ट्रेन करने का प्रयास कर रही है। इसके लिए एक्सपर्ट लगे हुए हैं।


ये था रेमडेसिविर इंजेक्शन का मामला
जिला विशेष प्रभारी को मुखबिर से सूचना मिली थी कि कुछ लोग कोरोना मरीजों को लगने वाले रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी कर 27 हजार रुपए में बेच रहे हैं। विशेष टीम के साथ बोगस ग्राहक को बीरबल चौक स्थित राजेन्द्र मेडिकल स्टोर पर भेजा गया। जहां मेडिकल स्टोर वाले ने दूसरे दिन आने की बात कही। बोगस ग्राहक फिर इंजेक्शन लेने पहुंच गया। जहां 27 हजार रुपए में एक इंजेक्शन देना तय हुआ। मेडिकल स्टोर वाले ने कुछ देर रुकने को कहा।

मांग के अनुसार मेडिकल स्टोर वाले ने एक युवक से दो रेमडेसिविर इंजेक्शन मंगवाए। ग्राहक ने पास ही घेराबंदी किए खड़ी पुलिस टीम को ईशारा कर दिया और स्पेशल टीम व जवाहरनगर पुलिस ने स्टोर संचालक डी ब्लॉक निवासी लोकेश कुमार पुत्र चंद्रप्रकाश गोयल व इंजेक्शन लेकर आने वाले युवक को दबोच लिया। इससे दो इंजेक्शन बरामद कर लिए। पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ की तो पता चला कि यह इंजेक्शन आरके डिस्ट्रीब्यूटर संचालक गणपति नगर निवासी साहिल गोयल पुत्र पवन से लेकर आया है। पुलिस ने साहिल गोयल को भी गिरफ्तार कर लिया।

वहीं आरके डिस्ट्रीब्यूटर के यहां कार्य करने वाले हाउसिंग बोर्ड हनुमान मंदिर के पास निवासी गौरव पुत्र मदनलाल अरोडा व इंजेक्शन की कालाबाजारी के लिए ग्राहक लाने वाले गणपति मेडिकल पर कार्य करने वाले वृद्धाश्रम रोड निवासी सुभाष पुत्र आशाराम को बिना लाइसेंस व बिना डॉक्टर की पर्ची के इंजेक्शन रखने व मिलकर षड्यंत्र पूर्वक कालाबाजारी करने के मामले में गिरफ्तार किया था। बाद में एक अन्य आरोपी लक्ष्य को भी गिरफ्तार किया था।


कोरोना लैब से जुड़े थे कई दलाल, पुलिस जांच में खुलेगी हकीकत
- राज्य सरकार के निर्देश पर जिला प्रशासन ने बाहर से आने वाले लोगों को आरटीपीसीआर सैंपल जांच रिपोर्ट की अनिवार्यता कर दी थी। इस कारण इलाके से कई लोग जरुरी काम या बारात या अन्य कारणों से पंजाब, दिल्ली, हरियाणा या अन्य राज्यों में आवाजाही करने के लिए स्वयं या अपने साथ आवाजाही करने वाले लोगों की आरटीपीसीआर रिपोर्ट के लिए कोविड जांच केन्द्रों से संपर्क किया।

राजकीय जिला चिकित्सालय की कोरोना जांच लैब से कई दलाल संपर्क में थे, जो हाथों हाथ मोबाइल में आरटीपीसीआर रिपोर्ट देते थे। दलाल छह सौ रुपए से लेकर एक हजार रुपए प्रति सैम्पल जांच के एवज में राशि वसूल करते थे। जबकि कई लोगों ने अपने सैम्पल देने की बजाय सिर्फ रिपोर्ट के लिए इन दलालों से संपर्क किया तो उनसे दो हजार रुपए तक मांगे थे।

राजकीय जिला चिकित्सालय के सहायक प्रशासनिक अधिकारी धीरज गहलोत ने अपने बेटे आरोपी राहुल गहलोत की फर्जीवाड़े से कोविड की जांच रिपोर्ट तैयार करवाई थी। यह मामला उजागर होने के कारण चिकित्सा विभाग ने अब पुलिस थाने में मामला दर्ज कराया है। इस मामले में कोरोना लैब से जुड़े कई युवाओं से गहनता से जांच हुई तो पूरे नेटवर्क का खुलासा होने की संभावना है।


फ्री सेवा के नाम पर लैब से जुड़े थे कई युवा
- सूत्रों की माने तो लैब में सैम्पलिंग का काम अधिक होने पर कई कार्मिकों से युवाओं के एक ग्रुप ने फ्री में सेवा देने की बात कही थी। कई लैब के काम से वाकिफ थे। इनमें कई पर फर्जी कोविड जांच रिपोर्ट भेजने जाने का अंदेशा है। पिछले तीन महीने में लोग अपने किसी निजी काम से बाहर जाते तो वापस आते समय उनको आरटीपीसीआर की रिपोर्ट दिखाने पड़ती।

Raj Singh Reporting
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