मूंग पैटर्न बिगाड़ेगा 'मूड' किसान होंगे परेशान

pawan uppal

Publish: Feb, 15 2018 07:15:02 (IST)

Sri Ganganagar, Rajasthan, India
मूंग पैटर्न बिगाड़ेगा 'मूड' किसान होंगे परेशान

इसमें बिना बदलाव किए क्रियान्वित किया गया तो निश्चित रूप से सभी के लिए मुश्किलें बढ़ेगी।

श्रीगंगानगर.

रबी की प्रमुख फसल गेहूं की सरकारी खरीद का मूंग पैटर्न 'मूड' बिगाड़ सकता है। मूंग में ऑन लाइन रजिस्ट्रेशन, कई तरह की औपचारिकताओं तथा बीच-बीच में रजिस्ट्रेशन बंद होने से किसानों को परेशानी हुई। एक बार में अधिकतम 25 क्विंटल मूंग लाने की बाध्यता ने परेशानी में बढ़ोतरी की। अब गेहूं की सरकारी खरीद को मूंग पैटर्न पर करने का निर्णय किया गया है, इसमें बिना बदलाव किए क्रियान्वित किया गया तो निश्चित रूप से सभी के लिए मुश्किलें बढ़ेगी।

 

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इधर, जिला कलक्टर ज्ञानाराम ने आगामी सीजन में गेहूं की सरकारी खरीद के संबंध में गुरुवार दोपहर 12.30 बजे अपने कार्यालय में बैठक बुलाई है, वहीं भारतीय खाद्य निगम के क्षेत्र प्रबंधक प्रिन्स हेमराज वर्मा, कृषि विपणन विभाग के क्षेत्रीय संयुक्त निदेशक शिवसिंह भाटी ने तैयारियों पर अधीनस्थ अधिकारियों से बुधवार को राय-मशविरा किया।


गौरतलब है कि जिले में मूंग की तुलना में गेहूं का बुवाई क्षेत्रफल बहुत अधिक है, इसके अलावा कई व्यावहारिक अड़चन आना भी तय है। गेहूं की कटाई आम तौर पर कम्बाइन से होती है। कटाई होते ही किसान सीधे मंडी में गेहूं लाता है। सीजन में रात-दिन काम करने वाली कम्बाइन की उपलब्धता को लेकर कई बार अनिश्चित स्थिति रहती है। ऐसे में किसान रजिस्ट्रेशन पर पशोपेश में रहेगा। इसके अलावा एक दिन में 25 क्विंटल की बाध्यता की बात किसी दृष्टि से सही नहीं है।


व्यापारियों की मांग
क्षेत्र के व्यापारी गेहूं की सरकारी खरीद को पंजाब-हरियाणा की तरह करने की मांग काफी समय से कर रहे हैं। वहां व्यापारी के बिल पर माल खरीदा जाता है। यहां के व्यापारियों का कहना है कि जब उन्हें आढ़त दी जाती है तो फिर बिल पर माल खरीदने में दिक्कत नहीं होनी चाहिए।


यह था मूंग पेटर्न
मूंग की सरकारी खरीद के लिए ऑन लाइन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया था। इसके लिए भामाशाह कार्ड, आधार कार्ड एवं गिरदावरी की मूल प्रति, बैंक खाते की पासबुक साथ लाना जरूरी किया गया। रजिस्ट्रेशन के लिए ई मित्र पर 21 रुपए, समिति कार्यालय पर 10 रुपए किसान को देने पड़े। तुलाई की तारीख की सूचना किसान के रजिस्टर्ड मोबाइल पर दी गई। एक दिन में अधिकतम 25 क्विंटल मूंग ही स्वीकार किया गया। भुगतान ऑन लाइन किसान के खाते में डाला गया।


गेहूं की खरीद मूंग की तर्ज पर की गई तो डटकर विरोध किया जाएगा। गेहूं की खरीद पूर्व की तरह करनी चाहिए। व्यापारी हरियाणा-पंजाब की तरह खरीद की मांग कर रहे हैं, ऐसा किया जाए तो किसानों को ऐतराज नहीं। ऐसा करने से किसानों को लाभ ही होगा।
रणजीत सिंह राजू, संयोजक, गंगानगर किसान समिति


खरीद के मामले में सरकार को व्यावहारिक होना चाहिए। मूंग और गेहूं में काफी अंतर है। मूंग की खरीद काफी कम होती है, गेहूं बहुत अधिक खरीदना पड़ता है। माल लाने की सीमा भी नहीं होनी चाहिए। खरीद व्यवस्था पर समय रहते मंथन कर बदलाव करना चाहिए।
हनुमान गोयल जिलाध्यक्ष, श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ व्यापार संघ


गेहूं की सरकारी खरीद की तैयारी चल रही है। बारदाना पर्याप्त संख्या में उपलब्ध है। भण्डारण के लिए जगह की कोई कमी नहीं है। सरकार जो औपचारिकताएं निर्धारित करेगी, उसी अनुसार खरीद की जाएगी। किसानों को इस बारे में जागरूक किया जाएगा।
प्रिन्स हेमराज वर्मा, क्षेत्र प्रबंधक, भारतीय खाद्य निगम

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