कोरोना से मां रिकवर, सवा साल की दूधपीती बच्ची की मौत, अस्पताल में चल रहा था इलाज

- जिले में एक से 20 साल के 1038 पॉजिटिव आ चुके, 1 से 16 तक के 118 एक्टिव

By: Raj Singh

Published: 23 May 2021, 11:51 PM IST

श्रीगंगानगर/श्रीकरणपुर. कोरोना से जंग में मां ने तो वायरस को हरा दिया लेकिन उसकी दूधपीती सवा साल की बच्ची संक्रमण का शिकार हो गई। केसरीसिंहपुर निवासी कोरोना पीडि़त मां छह दिन से जिला मुख्यालय पर उपचाराधीन थी। बच्ची की मौत होने पर रात को ही नगरपालिका प्रशासन की ओर से कोरोना प्रोटोकॉल के तहत उसका अंतिम संस्कार कराया गया।


जिले में एक से बीस साल तक के 1038 जने कोरोना पॉजिटिव आ चुके हैं। जिसमें एक से दस साल तक के 185 संक्रमित हुए। अब एक से 16 साल तक के 118 बच्चे व किशोर कोरोना पॉजिटिव है, जिनका इलाज चल रहा है।


बीसीएमओ डॉ. जसवंत सिंह ने बताया कि ब्लॉक अन्तर्गत केसरीसिंहपुर निवासी ओमप्रकाश भार्गव की पत्नी पिंकी कोरोना पॉजिटिव होने पर 18 मई से जिला चिकित्सालय के कोविड केयर वार्ड में उपचाराधीन थी। इस दौरान उसकी दूधपीती सवा साल की बच्ची गरिमा को भी उसके साथ रखा गया।

लेकिन रविवार को बच्ची की तबीयत अचानक बिगड़ी और शाम को उसकी मौत हो गई। हालांकि, उसकी मां की रिपोर्ट नेगेटिव आ गई। इओ केसरीसिंहपुर दिनेश शर्मा ने बताया कि बच्ची का शव पहुंचने पर रविवार रात आठ बजे कोरोना प्रोटोकॉल के तहत उसका अंतिम संस्कार किया गया। बताया गया कि बच्ची का पिता केसरीसिंहपुर में बिजली की दुकान पर श्रमिक है।


इधर चिकित्सा अधिकारियों ने बताया कि जनवरी से मई तक के बीच जिले में एक से बीस साल तक 1038 कोरोना पॉजिटिव आ चुके हैं। जिसमें एक से दस साल तक के 185 व ग्यारह से बीस साल तक 853 कोरोना पॉजिटिव आए चुके हैं। फिलहाल जिले में एक से 16 साल तक के 118 बच्चे कोरोना एक्टिव केस हैं। जिनका विभिन्न अस्पतालों व होमआइसोलेशन में इलाज चल रहा है।


अब जाकर चेता चिकित्सा प्रशासन
- जिले में कोरोना के आंकड़ों को देखा जाए तो वर्ष 2021 में एक से बीस साल तक के 1038 कोरोना पॉजिटिव आना दिखाया है। वहीं एक से दस साल तक के 185 बच्चे शामिल हैं। वहीं अब एक से सोलह साल तक के 118 बच्चे कोरोना एक्टिव केस हैं।

अभी तक सरकार, प्रशासन, चिकित्सा विभाग बच्चों में आ रहे कोरोना को लेकर गंभीर नहीं था और ना ही इसके लिए अलग से कोई प्रयास नहीं हुए। अब जबकि कोरोना की दूसरी लहर में बच्चों में संक्रमण फैलने का खतरा बढऩे लगा तो चिकित्सा विभाग सतर्क हुआ है। अब इसके लिए अलग से वार्ड भी बनाया गया है।

Raj Singh Reporting
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