ट्रिपल तलाक से मुस्लिम महिलाओं को मिली आजादी

सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम समुदाय की तीन तलाक को गैर कानूनी बताया है। 

By: surender ojha

Published: 22 Aug 2017, 07:46 PM IST

श्रीगंगानगर।

सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम समुदाय की तीन तलाक को गैर कानूनी बताया है। इस फैसले से इलाके के कानूनविदों ने देश की आजादी के बाद मुस्लिम महिलाओं को आखिर अधिकार दिया है। अधिवक्ताओं का कहना है कि लंबे समय से तीन तलाक के खिलाफ महिला आयोग समेत विभिन्न संगठनों ने आवाज उठाई थी लेकिन वोट बैँक के कारण इस कानूनी पहलूओं को अनदेखी की गई। लेकिन अब देश की सर्वोच्च अदालत ने इस पर मुहर लगाकर मुस्लिम महिलाओं को सम्मान के साथ जीने का हक दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार से छह महीने के अंदर नया कानून बनाने का आदेश दिया है, इससे हिन्दूओं की तरह मुस्लिम महिलाएं भी अब पति की मनमानियों से सुरक्षित रह पाएगी।


गाइड लाइन बनती तो अधिक बेहतर रहता
युवा अधिवक्ता खुर्शीद आलम खान का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिपल तलाक को गैर कानूनी बताया है। इस मामले में गाइड लाइन बनती तो अधिक बेहतर रहता। नशे या बहकावे में दिया गया या बोला गया तलाक गैर कानूनी हो सकता था, एेसे मार्गदर्शन की जरूरत थी न कि एक तरफा फैसले की।


देश एक तो फिर कानून दो क्यों
वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव कौशिक का कहना है कि जब देश में संविधान एक है तो फिर मुस्लिम महिलाअेां को तीन तलाक का कानून अलग क्यों। सुप्रीम कोर्ट ने आजाद देश में पहली बार महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए यह फैसला किया है। इससे मुस्लिम महिलाओं को समाज में सम्मान से जीने का अधिकार मिल सकेगा। तीन तलाक समाजिक कुरीति है।


कानून से ऊपर नहीं है कोई फरमान
युवा अधिवक्ता विजय चावला का मानना है कि देश में कानून से बड़ा कोई धर्म नहीं हो सकता। मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक के दंश से अब मुक्ति मिल सकेगी। सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम महिलाओं के पक्ष में सबसे बड़ा फैसला देकर महिलाओं के जीने के अधिकार पर मुहर लगाई है।

surender ojha Reporting
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