अब अस्पताल ने खुद लगाया 95 प्रतिशत शुद्ध ऑक्सीजन उत्पादन प्लांट, सप्लाई प्लांट भी तैयार

- 35 बड़े सिलेण्डर ऑक्सीजन का होगा प्रतिदिन उत्पादन, प्रेशर कम पड़ा तो सप्लाई प्लांट होगा ऑटोमेटिक चालू

By: Raj Singh

Published: 03 Oct 2020, 11:33 PM IST

श्रीगंगानगर. कोरोना संक्रमण काल में जहां प्रदेश के कई बड़े अस्पताल ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे हैं और मरीजों को समय पर ऑक्सीजन नहीं मिलने के कारण मौतें तक हो रही है लेकिन अब श्रीगंगानगर राजकीय चिकित्सालय ने खुद ही 95 प्रतिशत शुद्ध ऑक्सीजन का उत्पादन का प्लांट लगा दिया है। इसके साथ ही एक सप्लाई प्लांट भी चालू किया गया है। इसके चलते अस्पताल में कभी ऑक्सीजन की कमी नहीं आएगी।


राजकीय चिकित्सालय के मैनेजर सवेन्द्र सिंह ने बताया कि कोरोना काल में संक्रमित मरीजों सहित अन्य मरीजों को ऑक्सीजन की बहुत ही जरुरत पड़ती है। ऐसे में ऑक्सीजन सिलेंडर मंगवाए जाते हैं। कोरोना को देखते हुए अब अस्पताल में ही दो प्लांट पूरी तरह तैयार हो चुके हैं।

जिसमें एक पहला प्लांट है, जिसमें 95 प्रतिशत शुद्ध ऑक्सीजन का उत्पादन होगा। जो पाइप लाइनों के जरिए अस्पताल में उन स्थानों पर पहुंचाया जाएगा, जहां ऑक्सीजन देना आवश्यक है, जिसमें आईसीयू, ऑपरेशन थियेटर, एमसीएच आदि शामिल है। इसके अलावा एक अन्य प्लांट भी तैयार हो गया है,

जहां एक साथ बीस बड़े ऑक्सीजन सिलेण्डर लगाए जा सकते हैं। यदि ऑक्सीजन उत्पादन सयंत्र में कोई तकनीकी कमी आए या बंद हो जाए तथा प्रेशर कम होगा तो दूसरे प्लांट से ऑटोमेटिक पेशर मिलता रहेगा। जिससे मरीज को कोई दिक्कत नहीं आएगी। दोनों प्लांटों का ट्रायल कर लिया गया है। जो कभी चालू किए जा सकते हैं।


ऐसे होगा ऑक्सीजन उत्पादन
- बड़ी फैक्ट्रियों में तो लिक्विड ऑक्सीजन तैयार की जाती है लेकिन इस प्लांट में लगा सयंत्र चालू करने के बाद हवा से ऑक्सीजन को खींच लेगा और अन्य गैसों को हटा देगा। यहां से ऑक्सीजन सीधा दूसरे सप्लाई प्लांट में जाएगा। वहां लगे सयंत्रों की मदद से पूरे अस्पताल में बिछाई गई पाइप लाइन के जरिए मरीजों तक पहुंचेगी। यदि ऑक्सीजन उत्पादन में प्रेशर कम होगा तो सप्लाई प्लांट में लगे बड़े सिलेण्डरों की मदद से अपने आप ही प्रेशर बनता रहेगा। सयंत्र एक दिन में करीब 10 से 30 बड़े सिलेण्डर ऑक्सीजन उत्पादन कर सकता है।


कोविड मरीजों के लिए बनाया ब्रिज
- राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष रविन्द्र शर्मा ने बताया कि अभी ऑक्सीजन की पाइप लाइन कोविड अस्पताल तक नहीं बिछ पाई है। इसके चलते कोविड अस्पताल व एमसीएच अस्पताल की पहली मंजिल को जोड़ दिया गया है। यहां ओवर ब्रिज तैयार हो चुका है। जो कुछ ही दिन में चालू कर दिया जाएगा। इस ब्रिज के जरिए कोविड अस्पताल व एमसीएच में आवागमन शुरू होगा। एमसीएच में ऑक्सीजन लाइन बिछी हुई है। ऐसे में यदि किसी कोरोना मरीज को ऑक्सीजन की आवश्यकता होगी और कोई दिक्कत आएगी तो उसको तत्काल बगल में एमसीएच में लाकर ऑक्सीजन दी जा सकेगी।


करीब एक करोड़ की आई है लागत
- चिकित्सा अधिकारियों ने बताया कि ऑक्सीजन उत्पादन प्लांट व सप्लाई प्लांट लगाने में करीब एक करोड़ रुपए से अधिक की लागत आई है। यह चिकित्सा विभाग जयपुर की ओर से प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में लगाए जाने हैं। लेकिन श्रीगंगानगर में कोविड को देखते हुए शीघ्र ही इसको तैयार कर लिया गया है।


इनका कहना है
- चिकित्सा विभाग जयपुर की ओर से एक कंपनी ने यहां दो प्लांट लगाए हैं। जिसमें एक प्लांट में ऑक्सीजन का उत्पादन होगा और दूसरा प्लांट ऑक्सीजन को सप्लाई करेगा। इससे अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी नहीं आएगी। वहीं कोविड वाले मरीजों के अस्पताल में ऑक्सीजन पाइप लाइन नहीं है। इसको देखते हुए एमसीएच व कोविड अस्पताल के बीच ब्रिज तैयार कर लिया गया है। जरुरत पड़ी तो मरीज को एमसीएच में लाया जा सकेगा, जहां ऑक्सीजन सैटअप तैयार है।
- डॉ. केएस कामरा, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी राजकीय चिकित्सालय श्रीगंगानगर

Raj Singh Reporting
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