श्रीगंगानगर में जर्जर हो गई पुरानी सरकारी बिल्डिंग, अब हादसे के बाद जीर्णोद्धार

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By: surender ojha

Updated: 19 Jan 2019, 08:44 PM IST

श्रीगंगानगर। जिला मुख्यालय पर पुराने राजकीय जिला चिकित्सालय और वर्तमान में सीएमएचओ ऑफिस भवन की छतें देश की आजादी के समय की है, इन छतों की हालत जर्जर हो चुकी है। पुराने राजकीय जिला चिकित्सालय की बिल्डिंग में भ्रष्टाचार निरोधक मामलों की स्पेशल कोर्ट से सटे एक कमरे में सरकारी वकीलों का दफ्तर खोला गया है।

इस दफ्तर का भवन काफी पुराना है। इस दफ्तर में अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण प्रकरणों की स्पेशल कोर्ट के विशिष्ट लोक अभियोजक बनवारीलाल कड़ेला और एनडीपीएस कोर्ट के स्पेशल लोक अभियोजक केवल कृष्ण अग्रवाल के साथ चार न्यायिक कर्मचारी वहां बैठते है। इस दफतर की छत काफी पुरानी होने के कारण आए दिन वहां से बरसात के दौरान पानी टकपने की शिकायतें रहती थी। इस ऑफिस की छत का अधिकांश प्लस्तर पिछले सप्ताह गिर चुका है, ऐसे में विशिष्टि लोक अभियोजक कड़ेला ने जिला कलक्टर से अब लिखित में फिर से गुहार लगाई है कि यह छत आजादी से पहले की बनी हुई है, यह छत इतनी जर्जर हो चुकी है कि कभी भी गिर सकती है। इस कारण बड़ा हादसा हो सकता है।
लोक अभियोजक का कहना था कि उन्हेांने सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिकारियों को पिछले दो सालों में बीस बार पत्र लिखे थे ताकि इस दफ्तर की छत को बदला जा सके। लेकिन किसी ने भी सुनवाई नहीं की। यहां तक कि राज्य के विशिष्ट शासन सचिव को भी पत्र पिछले साल जुलाई में भिजवाया था। लेकिन कोई असर नहीं पड़ा। गत सप्ताह जैसे ही ऑफिस खोला तो छत से प्लस्तर उखडऩे लगा और देखते देखते यह मेज पर आने लगे। एक बड़ा प्लस्तर का टुकड़ा ऐसे गिरा जैसे पूरी छत ही आकर गिर गई हो।

यह शोर सुनते ही पूरा स्टाफ दफ्तर से अपनी जान बचाकर बाहर निकल आया। इन न्यायिक कर्मचारियों के एकाएक भागने पर पास में संचालित हो रही पारिवारिक न्यायालय, एसीबी कोर्ट, एनडीपीएस कोर्ट, एमएसीटी कोर्ट, कंजूमर कोर्ट, एसीजेएम कोर्ट संख्या दो का पूरा स्टाफ दौडकऱ मौके पर पहुंचा।

ज्ञात रहे कि पिछले साल जिला सैशन कोर्ट परिसर में भी एपीपी रूम की छत गिरने से बड़ा हादसा टल गया था। इस एपीपी रूम में उस समय एडीजे वन कोर्ट के अपर लोक अभियोजक श्रीकृष्ण कुक्कड़ अपनी फाइल लेने के लिए जैसे ही कोर्ट से आ रहे थे तब यह छत गिरी थी। तब भी यह गनीमत रही कि वहां स्टाफ का एक भी कार्मिक दफ्तर की बजाय बाहर खड़ा था। इस हादसे के बाद सार्वजनिक निर्माण विभाग ने इस बिल्डिंग की छत का दुबारा से निर्माण कर दिया।

surender ojha Reporting
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