एक माह की बालिका को बच्चा वार्ड में छोड़ घर लौटे परिजन

राजकीय जिला चिकित्सालय के बच्चा वार्ड में बुधवार शाम भर्ती एक माह की बालिका को परिजन चिकित्सालय में ही छोडकऱ घर लौट गए। पूरी रात बालिका के आसपास किसी परिजन को नहीं देखकर चिकित्सालय स्टाफ ने इसकी जानकारी बच्चा वार्ड के प्रभारी तथा अन्य चिकित्सकों को दी।

By: jainarayan purohit

Published: 23 Apr 2020, 10:47 PM IST

-मामला पुलिस तक पहुंचा तो लेने आए
-राजकीय जिला चिकित्सालय के चिकित्सकों ने दी पुलिस नियंत्रण कक्ष को जानकारी
श्रीगंगानगर. राजकीय जिला चिकित्सालय के बच्चा वार्ड में बुधवार शाम भर्ती एक माह की बालिका को परिजन चिकित्सालय में ही छोडकऱ घर लौट गए। पूरी रात बालिका के आसपास किसी परिजन को नहीं देखकर चिकित्सालय स्टाफ ने इसकी जानकारी बच्चा वार्ड के प्रभारी तथा अन्य चिकित्सकों को दी। सुबह ड्यूटी पर पहुंचे चिकित्सकों ने इस संबंध में पुलिस नियंत्रण कक्ष को जानकारी दी। बालिका के चिकित्सालय में दर्ज पते के आधार पर पुलिसकर्मी बालिका के घर पहुंचे तथा परिजनों को बालिका को चिकित्सालय में छोडऩे के बारे में जानकारी दी। इस पर परिजन बालिका को लेने चिकित्सालय पहुंचे।

चिकित्सालय के बच्चा वार्ड के प्रभारी डॉ.राजेश अरोड़ा ने बताया कि बालिका को उसके पुरानी आबादी निवासी परिजन बुधवार शाम चिकित्सालय में भर्ती करवाने के लिए लाए थे। बालिका की आयु एक माह पांच दिन की थी। ऐसे में एक माह से अधिक आयु की होने के कारण उसे चिकित्सालय के बच्चा वार्ड में भर्ती किया गया। वहां से उसके परिजन उसे भर्ती करवाने के बाद घर लौट गए। रात तक परिजनों के नहीं लौटने पर उसे देखभाल के लिए चिकित्सालय की एसएनसीयू में रखा गया। वहां पूरी रात परिजनों के नहीं लौटने पर चिकित्सालय स्टाफ ने उसे संभाला।

सुबह करीब आठ बजे जब चिकित्सक ड्यूटी पर पहुंचे तो स्टाफ ने वार्ड में एक माह की बालिका के परिजन उसके पास नहीं होने की जानकारी दी। इस पर पुलिस नियंत्रण कक्ष को सूचना दी गई। वहां से आए पुलिसकर्मियों ने चिकित्सालय से बालिका के पते आदि की जानकारी लेकर संबंधित को उनकी बालिका के चिकित्सालय में होने तथा उनके उसे वहां छोड़ देने के बारे में बताया। इस पर परिजन पहुंचे तथा बालिका को संभाला।

परिजनों ने चिकित्सकों को बताया कि वे जब बालिका को चिकित्सालय लाए तो उनके यहां ठहरने के लिए कोई प्रबंध नहीं होने की जानकारी मिली। इस पर वे उसे यहीं छोड़ गए तथा सुबह वे जब तक बालिका को लेने आते पुलिसकर्मी उनके घर तक पहुंच चुके थे।

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