ऑनलाइन पढ़ाई: साइबर खतरों के चलते अभिभावकों और विद्यार्थियों के लिए बोर्ड की चेतावनी

—इंटरनेट प्रयोग से लेकर रिवेंज पोर्नोग्राफी तक किया आगाह, सीबीएसइ की जारी हैंडबुक का करें उपयोग

By: Krishan chauhan

Published: 28 May 2020, 09:13 AM IST

ऑनलाइन पढ़ाई: साइबर खतरों के चलते अभिभावकों और विद्यार्थियों के लिए बोर्ड की चेतावनी

—इंटरनेट प्रयोग से लेकर रिवेंज पोर्नोग्राफी तक किया आगाह, सीबीएसइ की जारी हैंडबुक का करें उपयोग

पत्रिका एक्सक्लूसिव--कृष्ण चौहान
श्रीगंगनगर. कोरोना महामारी की वजह से देशभर में शिक्षण व्यवस्था पूरी तरह से ऑनलाइन हो रही है। अभिभावक जिस मोबाइल को हाथ लगाने से ही बच्चों को रोका करते थे, उसी मोबाइल पर अध्ययन का सारा दारोमदार आ गया है। यहां तक की अभिभावकों और शिक्षकों की भी अध्ययन, नोट्स व टेस्ट के लिए मोबाइल पर निर्भरता बढ़ गई है। मोबाइल के इस बढ़ते उपयोगों को देखते हुए सीबीएसइ ने विद्यार्थियों को ऑनलाइन अध्ययन के समय में तमाम खतरों से बचने के लिए एक गाइड लाइन जारी की है। इसमें डिजिटल नागरिकता के नौ आयामों डिजिटल पहुंच, साक्षरता, संवाद, शिष्टाचार, स्वास्थ्य, कुशलक्षेम, अधिकार, स्वतंत्रता तथा जवाबदेही और कानून को शामिल किया है।

इन खतरों से रहें सावधान, सजगता से करें पढ़ाई

1.साइबर बुलिंग

सुरक्षा मैनुअल में कहा है कि साइबर बुलिंग साइबर खतरों में से एक है जिनका सामना विद्यार्थी कर रहे हैं। इसमें इंटरनेट या मोबाइल टेक्नोलॉजी का प्रयोग करके अशुद्ध, घटिया, तकलीफदेह, संदेश या इमेल भेजकर किसी को जानबूझकर तंग किया जाता है। इससे बचने के लिए विद्यार्थी केवल उन्हीं लोगों को ऑनलाइन जोड़े जिन्हें वे ऑफलाइन जानते हैं।

2. साइबर ग्रुमिंग
साइबर ग्रूमिंग एक बढ़ता साइबर थ्रेट है जो किशोरावस्था के विद्यार्थियों को अधिक प्रभावित करता है। इसमें अपराधी की ओर से जाली अकाउंट बनाकर बच्चे जैसा व्यवहार करता है तथा शोषण या यौन उत्पीडऩ के उद्देश्य से विद्यार्थियों के साथ भावनात्मक संबंध स्थापित किए जाते हैं।

3. रिवेंज पोर्नोग्राफी से सतर्कता

सीबीएसइ की जारी हैंडबुक में कहा गया है कि 14 साल से 18 साल के किशोर विद्यार्थी इसके सबसे बड़े शिकार होते हैं और इसी आयु वर्ग के टीनेजर्स इस काम को सबसे ज्यादा अंजाम देते हैं। इसमें बताया है कि कोई भी व्यक्ति ईष्र्या में, संबंधों को तोड़ लेने पर या बात न करने पर भी ऐसा कर सकता है।

4.ऑनलाइन खेलों से नुकसान
अक्सर देखा जा रहा है कि विद्यार्थियों में पढ़ाई के साथ-साथ खेल भी ऑनलाइन शुरू कर रखे हैं। ऑनलाइन खेल डाउनलोड करने के साथ स्पैम, वायरस, द्वेषपूर्ण सॉफ्टवेयर साथ में डाउनलोड हो जाते हैं जो कि विद्यार्थियों के कंप्यूटर, मोबाइल फोन या गेमिंग कंसोल को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करते हैं। इसलिए बोर्ड ने कहा है कि भूलकर भी अवैध गेम और सॉफ्टवेयर इंस्टॉल नहीं करने चाहिए।

अभिभावकों की भी रहेगी भूमिका

1. मोबाइल व लेपटॉप पर पढ़ाई अपनी देखरेख में करवाएं।

2. मोबाइल की बैकअप हिस्ट्री से गतिविधियों पर नजर रखें।
3. मोबाइल डाटा चोरी व अन्य हानि से बचने के लिए पढ़ाई के अलावा डाटा बर्बादी पर पाबंदी लगाएं।

4.सोशल मीडिया पर विशेष सावधानी बरतें, बच्चे की ओर से शेयर करने वाली जानकारी और सूचनाओं से अवगत रहें।

फैक्ट फाइल
-जिले में कुल विद्यालय-3019

-प्रा.व उ.प्रा. स्तर के विद्यार्थी- 291284
-मा.व उ.मा.स्तर के विद्यार्थी- 117542

-जिले में कुल विद्यार्थी-408826

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वर्तमान में ऑनलाइन शिक्षण के लिए विद्यार्थी डिजिटल प्लेटफार्म का अधिक प्रयोग कर रहें हैं। मोबाइल, इंटरनेट, सर्च इंजन, वेबसाइट आदि के इस्तेमाल की पूरी जानकारी के अभाव में बच्चे साइबर खतरों को बुलावा न दें। इसके लिए पढ़ाई के साथ-साथ विद्यार्थियों और अभिभावकों का बिना डरे सतर्क व सजग रहना बेहद जरूरी है। सीबीएसइ ने साइबर सुरक्षा मैनुअल सभी विद्यार्थियों के लिए लाभदायक है।

-भूपेश शर्मा, सहसंयोजक, विद्यार्थी सेवा केंद्र माध्यमिक शिक्षा, श्रीगंगानगर

Krishan chauhan Reporting
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