गांव के सरकारी अस्पताल में निजी जैसी सुविधाएं

गांव के सरकारी अस्पताल में निजी जैसी सुविधाएं

Yogesh Tiwari | Updated: 14 Aug 2019, 01:12:21 AM (IST) Sri Ganganagar, Sri Ganganagar, Rajasthan, India

राजकीय चिकित्सालय का नाम सामने आते ही टूटी-फूटी बिल्डिंग, फर्नीचर का अभाव और दवाइयों की कमी की तस्वीर उभरती है। लेकिन जिले में एक एेसा राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय भी है जहां न केवल शानदार भवन और फर्नीचर है बल्कि निजी चिकित्सालयों जैसी सुविधाएं नि:शुल्क उपलब्ध हैं।

जनसहयोग से आदर्श बना नेतेवाला का राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय
श्रीगंगानगर. राजकीय चिकित्सालय का नाम सामने आते ही टूटी-फूटी बिल्डिंग, फर्नीचर का अभाव और दवाइयों की कमी की तस्वीर उभरती है। लेकिन जिले में एक एेसा राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय भी है जहां न केवल शानदार भवन और फर्नीचर है बल्कि निजी चिकित्सालयों जैसी सुविधाएं नि:शुल्क उपलब्ध हैं।
नेतेवाला स्थित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय भी चार साल पहले अन्य राजकीय चिकित्सालयों के समान था। श्रीगंगानगर जिला मुख्यालय स्थित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में कार्यरत आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ.विनोद शर्मा को चार साल पहले यहां से सात किलोमीटर दूर नेतेवाला लगाया गया। उन्होंने पहले तो सरकारी स्तर पर आयुर्वेदिक चिकित्सालय की दशा सुधारने का जतन किया। लगातार प्रयासों के बाद सफलता मिलने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने गांव के जनप्रतिनिधियों, भामाशाहों और ग्रामीणों से मिलकर आयुर्वेदिक चिकित्सालय की दशा सुधारने के लिए सहयोग देने का आग्रह किया। इसमें उन्हें कामयाबी मिली और जहां जीर्णशीर्ण भवन था चकाचक भवन बनकर तैयार हो गया था। फिर बारी थी फर्नीचर, दवाइयों और अन्य उपकरणों की। ये भी जनसहयोग से जुटा लिए गए।
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आज ये सुविधाएं
आयुर्वेदिक चिकित्सालय में वर्तमान में कोटा स्टोन फर्श, वाल टाइल, फाल्स सीलिंग, वालपेपर आदि लगे हैं। टेबल, कुर्सी, इनवर्टर आदि उपलब्ध हैं। सामान्य बीमारियों में काम आने वाली दवाइयां सलीके से रखी हैं। इस चिकित्सालय में कम्प्यूटर और प्रिंटर भी उपलब्ध है। हर साल उपचार के लिए आने वाले रोगियों का ग्राफ तक बनाकर दीवार पर लगाया गया है जो यह दर्शाता है कि रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसी वर्ष २८ मई को आयुर्वेदिक विभाग बीकानेर के अतिरिक्त निदेशक अशोक शर्मा ने इस चिकित्सालय का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को शानदार बताते हुए चिकित्सक को धन्वंतरि पुरस्कार की अनुशंसा की थी।
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फिजियोथैरेपिस्ट के पास जाने की जरूरत नहीं
आजकल जीवनचर्या में कंधे में या कमर में जकडऩ आम बीमारी हो गई है। एलोपैथिक चिकित्सालय में जाने पर चिकित्सक दवाई तो देते हैं परन्तु साथ ही फिजियोथैरेपिस्ट के पास जाने की सलाह देते हैं जहां रोगी के हजारों रुपए खर्च हो जाते हैं परन्तु नेतेवाला जैसे छोटे गांव के इस आयुर्वेदिक चिकित्सालय में फ्रोजन शोल्डर (व्हील व पुलिंग) लगा हुआ है। इसके सहायता से एक्सरसाइज कर रोगी नि:शुल्क रोग से निजात पाते हैं।

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अठाइस तरह की औषधियों के पौधे
आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ.शर्मा ने चिकित्सालय परिसर में २८ तरह की औषधियों के पौधे लगा रखे हैं। इनसे दवाइयां तैयार कर रोगियों का नि:शुल्क उपलब्ध करवाई जाती है।

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जनसहयोग से मिली सफलता
चार साल पहले पद संभाला था तब काफी अभाव था। व्यवस्था सुधारने का मन में था। ग्रामीणों ने भरपूर सहयोग दिया। स्टाफ ने भी अच्छा साथ दिया जिससे आज हम संभाग में बेहतर स्थिति में हैं।
-विनोद कुमार शर्मा, आयुर्वेदिक चिकित्सक, नेतेवाला

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ग्रेडिंग हो तो संभवत: संभाग में पहला
आयुष्मान भारत में नेतेवाला का औषधालय भी शामिल होने की संभावना है। जनसहयोग से इस चिकित्सालय का आधुनिकीकरण करवाना काबिलेतारीफ है। संभाग में ग्रेडिंग होती है तो निश्चित रूप से यह औषधालय पहले नंबर पर आएगा।
-डॉ. हरिन्द्र दाबड़ा, उपनिदेशक (आयुर्वेदिक चिकित्सा), श्रीगंगानगर।

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