मनोचिकित्सक ने 40 दिन में मरीजों को बांट दी साढ़े पांच लाख टेबलेट

pawan uppal

Publish: Mar, 12 2018 06:27:25 AM (IST) | Updated: Mar, 12 2018 06:27:26 AM (IST)

Sri Ganganagar, Rajasthan, India
मनोचिकित्सक ने 40 दिन में मरीजों को बांट दी साढ़े पांच लाख टेबलेट

-शहर में सी ब्लॉक स्थित ज्याणी कलावती हॉस्पिटल में रविवार दोपहर को श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ औषधि नियंत्रण विभाग की टीम ने जांच की।

 

श्रीगंगानगर.

शहर में सी ब्लॉक स्थित ज्याणी कलावती हॉस्पिटल में रविवार दोपहर को श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ औषधि नियंत्रण विभाग की टीम ने जांच की। कार्रवाई के दौरान सामने आया कि वहां मनोचिकित्सक ने आठ माह में चालीस दिन मरीज देखे और उन मरीजों को एक ही सॉल्ट की करीब साढ़े पांच लाख टेबलेट बांट दी। यह रिपोर्ट जयपुर भेजी जाएगी। उधर, मनोचिकित्सक का कहना है कि मरीज एक तरह की दवा अधिक लेता है। इसके अलावा तीन माह का स्टॉक भी रखना पड़ता है। दवा की खपत मरीजों के अनुसार ही होती है।


हनुमानगढ़ के सहायक औषधि नियंत्रक डीएस उप्पल ने बताया कि शहर के सी ब्लॉक स्थित ज्याणी कलावती हॉस्पिटल के डॉक्टर धर्मेन्द्र ज्याणी की डॉ. भीमराव अभिभावक संघ व अन्य की ओर से जयपुर में शिकायत की थी कि बिना लाइसेंस के नशे की दवा दी जा रही है। इसके लिए जयपुर के अधिकारियों ने हनुमानगढ़ के सहायक औषधि नियंत्रक डीएस उप्पल के नेतृत्व में टीम बनाई, जिसमें औषधि निरीक्षक पंकज जोशी, रामपाल, हनुमानगढ़ के औषधि निरीक्षक प्रेम मीणा को शामिल किया गया। इस टीम ने रविवार को हॉस्पिटल में जांच की। जांच के दौरान पाया गया कि डॉक्टर रजिस्ट्रर्ड प्रेेक्टिशर्न है और सभी दस्तावेज आदि सही पाए गए। डॉक्टर मरीज देखने, मरीजों को दवा देने व अपने नाम से दवा मंगाने के लिए क्वालीफाई है। टीम ने यहां से चार दवाओं के नमूने भी लिए हंै, जिनको जांच के लिए भेजा जाएगा।


अधिकारी ने बताया कि जांच में यह भी सामने आया है कि डॉक्टर हॉस्पिटल में केवल रविवार को मरीजों को देखते हैं। आठ माह में करीब चालीस दिन उन्होंने मरीजों को देखा और दवा दी। लेकिन इस दवा की मात्रा बहुत अधिक है। इन चालीस दिन के दौरान डॉक्टर की ओर से एक ही सॉल्ट की करीब साढ़े पांच लाख टेबलेट मरीजों को दे दी।

जांच रिपोर्ट जयपुर भेजी जाएगी। जिसमें भारी मात्रा में दवा मंगाने व मरीजों को देने की रिपोर्ट भी शामिल की जाएगी तथा जांच मेडिकल काउंसिल से जांच कराने की सिफराशि की जाएगी। इस संबंध में मनोचिकित्सक धर्मेन्द्र ज्याणी का कहना है कि हर रविवार डेढ़ सौ मरीज आते हैं, इनमें सौ नशा छुड़ाने के लिए आते हैं। डोज कम होने पर दवा अधिक लेते हैं। मरीजों में दवा की खपत अधिक है। इसके अलावा तीन माह का स्टॉक रखना पड़ता है। दवा की अधिक खपत जैसा कोई मामला नहीं है।


नशा छुड़ाने की है ये टेबलेट
अधिकारियों ने बताया कि डॉक्टर की ओर से जो दवा भारी मात्रा में खरीदी गई है। वह नशा छुड़ाने की दवा है। जो मरीज को दी जाती है। यह जीभ के नीचे रखने वाली टेबलेट है। दवा मंगाना, मरीजों को देना, बेचने के लिए डॉक्टर क्वालीफाई है लेकिन इतनी भारी मात्रा में दवा मंगाना संदेह पैदा करता है।

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