ढाई करोड़ रुपए खर्च कर बना डाले सार्वजनिक शौचालय, अब सफाई लिए तरस गई आंखें

 

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By: surender ojha

Updated: 04 Apr 2019, 12:37 AM IST

श्रीगंगानगर। सरकारी मूत्रालय और शौचालय में यदि कोई लघु शंका करने गलती से चला जाएं तो वह एकाएक बीमार हो सकता है। गंदगी इतनी कि सडांध सीधे नाकों में घुसने का प्रयास करती है। पानी का बंदोबस्त किसी भी मूत्रालय या शौचालय में नहीं है। यह कही कसर नगर परिषद प्रशासन की लापरवाही ने पूरी कर दी है। परिषद प्रशासन के पास सफाई कर्मियों की फौज है लेकिन वहां सफाई तक नहीं हो रही है। स्वच्छत भारत मिशन में आए लाखों रुपए का बजट भी इन शौचालय के निर्माण और रखरखाव के एवज में खर्च किया जा चुका है। स्वच्छता सर्वेक्षण में जब केन्द्र सरकार की ओर से अधिकृत एक टीम जब शहर में स्वच्छता जांचने आई तो वहां कोई भी कर्मचारी नहीं मिला था। इस टीम ने जब नगर परिषद आयुक्त से ऐसे सार्वजनिक स्थल पर बने शौचालय और मूत्रालय की सफाई कराने की नसीहत तक दी थी, तब आयुक्त ने नियमित सफाई का आश्वासन भी दिया था लेकिन स्थिति ज्यो की त्यों है। केन्द्रीय बस स्टैण्ड से लेकर कृष्णा टाकीज वाल्मीकि मोहल्ले तक बने इन शौचालय की स्थिति ऐसी है कि वहां सफाई के लिए आंखें तरस गई है। इंदिरा वाटिका जवाहरनगर इस पार्क में एक लेडिज शौचालय है तो दूसरा कॉमन लघुशंका का शौचालय। इन दोनों पर ताला जड़ दिया गया है। इन दोनों शौचालय के बाहर नशीली दवा की खाली शीशियां और देसी मदिरा के पव्वे इस कदर पड़े है जैसे यहां किसी कबाड़ी ने डाले हो। नशेड़ी आते है और वहां नशा करने के बाद फेंककर चले जाते है। इन दोनों शौचालय के आसपास इतनी गंदगी है कि वहां खड़ा रहने का मन नहीं करता। पार्क के एक कोने में बने इन दोनों शौचालय के बाहर ही लोग लघुशंका करने से परहेज नहीं करते।

इस बीच सुखाडिय़ा बस स्टैण्ड पर नगर परिषद ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय का निर्माण पिछले साल सुखाडिय़ा पार्क में बनाया। रंग रोगन और चित्रकारी देखकर यह शौचालय राहगीरों को अपनी ओर आकर्षित भी करता है। लेकिन अंदर जाते ही गंदगी ही गदंगी नजर आती है। वॉशबेशन पर लगी टंूटी गायब है। वहां पानी की पाइप भी उखाड़ी जा चुकी है। यहां तक कि टॉयलेट के लिए पानी का मग भी नशेड़ी ले गए। इंग्लिश टायलेट का पोट गंदगी से बुरी तरह खराब हो चुका है। उसके आसपास पाइप भी उखाड़ी जा चुकी है। पानी का बंदोस्त नही है। सफाई कार्मिक कभी नहीं आते है। इधर, केन्द्रीय बस स्टैण्ड इस बस स्टैण्ड पर तीन शौचालय है। इसमें से एक सुलभ कॉम्पलैक्स है। इसके अलावा दो अन्य शौचालय पर रोडवेज प्रशासन ने वहां ताला जड़ दिया है। गंतव्य स्थल पर फेरा लगाकर बसें इस स्टैण्ड पर खड़ी होती है वहां रोडवेज के चालक, परिचालक, राहगीर, पुरुष यात्री दीवार की ओट में लघुशंका करते सरेआम नजर आते है। हालांकि रोडवेज प्रशासन ने वहां चेतावनी भरे स्लोगन भी लिखे थे लेकिन असर किसी पर नहीं हो रहा है। रोडवेज पूछताछ के पास शौचालय को जानबूझकर बंद कर दिया गया है।
उधर, कृष्णा टाकीज के पास नगर परिषद प्रशासन ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत लाखों रुपए का बजट खर्च कर इस शौचालय का निर्माण कराया गया। नियमित सफाई का दावा किया गया था लेकिन हकीकत में ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला। वहां सफाई कार्मिक नजर आएं। सफाई नहीं होने के कारण गंदगी इस कदर थी कि वहां लघुशंका करने भी मुसीबत है। शहर के स्वच्छता सर्वेक्षण के दौरान इस शौचालय को भी जांचा गया था, तब दिन में दो बार सफाई करने का दावा भी किया गया था। इस शौचालय में टूंटियां लगी हुई है लेकिन पानी की सप्लाई बाधित रहती है।
वहीं कलक्ट्रेट कैम्पस जेल की दीवार के साथ इस नए शौचालय का निर्माण करीब डेढ़ साल पहले कराया गया था। कलक्ट्रेट में सुरक्षा बंदोबस्त होने के बावजूद वहां से वेशबेशन पर लगी टूंटी और पाइप को नशेड़ी ले जा चुके है। कलक्टर कक्ष से चंद दूरी होने के कारण इस शौचालय में सफाई नियमित जरूर होती है। लेकिन हाथ धोने के लिए वहां सुविधा नहीं है। कलक्ट्रेट के अधिकारियों ने वहां गंदगी पसरे नहीं सके लिए एक तरीका अपनाया है, सीसी कैमरे आपकी नजर में स्लोगन अंकित कर दिया है। इस शौचालय के पास पुराने शौचालय की अब तक बंद नहीं किया गया है, ऐसे में वहां गंदगी अधिक रहती है।

surender ojha Reporting
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