आरबीएसइ: जिले के 112 स्कूलों में हो रही विज्ञान की पढ़ाई

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर विशेष-वैज्ञानिक सोच के साथ हर साल बढ़ रहा नामांकन

By: Krishan chauhan

Published: 01 Mar 2021, 09:38 AM IST

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर विशेष-वैज्ञानिक सोच के साथ हर साल बढ़ रहा नामांकन

आरबीएसइ: जिले के 112 स्कूलों में हो रही विज्ञान की पढ़ाई

पत्रिका एक्सक्लूसिव-कृष्ण चौहान

श्रीगंगानगर. यूं तो मनुष्य जीवन के विकास में कला, वाणिज्य और विज्ञान तीनों ही विधाओं का अतुल्य महत्व है। परंतु विज्ञान के अनवरत विकास के कारण हम चंद्रमा से लेकर मंगल ग्रह तक पहुंच पाए हैं। पुरातन काल में जो चीजें असंभव होती थी लेकिन तकनीक के बढ़ते प्रयोग की वजह से साधारण सी महसूस होती है। इसी विकास के चलते गंगानगर-हनुमानगढ़ सहित प्रदेश के विद्यार्थियों ने भी स्कूल स्तर से ही विज्ञान की पढ़ाई को अपनाया है। जिससे राजकीय विद्यालयों में विज्ञान वर्ग के बच्चों की संख्या हर साल बढ़ती जा रही है। अजमेर बोर्ड से संबद्धता जिले में 112 राजकीय व निजी स्कूल 11वीं व12वीं में विज्ञान विषय के चयन का अवसर प्रदान कर रहे हैं। जबकि कृषि विज्ञान की पढ़ाई करवाने वाले विद्यालयों की संख्या जिले में 75 है।
-प्रयोगशालाओं पर खर्च होते हैं लाखों रुपए

विज्ञान संकाय के अंतर्गत पीसीएम व पीसीबी समूह के विद्यार्थी सम्मिलित होते है। जिन्हें सैद्धांतिक के साथ-साथ प्रायोगिक ज्ञान की भी जरूरत होती है। इसलिए सरकारी स्कूलों में भौतिक, रसायन, जीव विज्ञान व कंप्यूटर आदि विषयों की सुसज्जित व आधुनिक उपकरणों से समृद्ध प्रयोगशालाओं की स्थापना की गई है। उल्लेखनीय है कि इन लैब और सामग्री पर कई लाखों रुपए की लागत आती है।
-विज्ञान में चौथी औद्योगिक क्रांति

विशेषज्ञों का मानना है कि पहली औद्योगिक क्रांति को भाप इंजन व कारखानों की स्थापना से था और दूसरी औद्योगिक क्रांति का संबंध कम्बशन इंजन एवं बिजली के आविष्कार से रहा है। कंप्यूटर और इंटरनेट के आगमन ने तीसरी औद्योगिक क्रांति को जन्म दिया। अब चौथी औद्योगिक क्रांति के उपकरण के रूप में साइबर भौतिक प्रणालियों, इंटरनेट सेवाओं पर जोर दिया जा रहा है।

उद्देश्य--विद्यार्थियों को विज्ञान के प्रति आकर्षिक व प्रेरित करना, वैज्ञानिक सोच पैदा करना तथा जनसाधारण को विज्ञान एवं वैज्ञानिक उपलब्धियों के प्रति सजग बनाना है।

कब हुई शुरुआत--28 फरवरी 1928 को रमन प्रभाव की खोज की हुई। इसी उपलक्ष्य में भारत में 1986 से हर वर्ष 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाता है।
-पांच साल में औसतन 88 प्रतिशत से अधिक रहा परिणाम

जिले में अजमेर बोर्ड से संबद्ध विद्यालयों में पढऩे वाले विज्ञान वर्ग के नियमित और स्वयंपाठी विद्यार्थियों का गत 5 वर्षों का औसत परीक्षा परिणाम 88.15 फीसदी रहा है। जोकि विद्यार्थियों की इस विषय में रुचि को दर्शाता है। गौरतलब है कि जिले में 12वीं विज्ञान वर्ग से 2016 में 88.19, 2017 में 88.33, 2018 में 88.10, 2019 में अभी तक के श्रेष्ठ 90.17 व 2020 में 85.95 प्रतिशत विद्यार्थी उतीर्ण हुए हैं।
फैक्ट फाइल

राजकीय स्कूलों में हर साल बढ़ रहा नामांकन
शैक्षणिक सत्र छात्र छात्राएं कुल

2017-18 983 646 1629
2018-19 1166 751 1917

2019-20 1238 876 2124
2020-21 1170 997 2167

-जिले में विज्ञान संकाय के विद्यालय-112
-जिले में कृषि संकाय के विद्यालय-75

जिले में उच्च माध्यमिक स्तर पर विज्ञान संकाय के विद्यार्थियों की संख्या में हर साल बढ़ोतरी हो रही है। इसका कारण है कि तुलनात्मक रूप से विज्ञान वर्ग के विद्यार्थियों के पास कॅरियर के विकल्प खूब रहते हैं। तकनीक और ऑनलाइन माध्यम के इस दौर में विद्यार्थी वर्ग को भी साइबर अपराधों से सतर्क व सजग रहना बेहद जरूरी है।

भूपेश शर्मा,समन्वयक, विद्यार्थी सहायता केंद्र,शिक्षा विभाग,श्रीगंगानगर

जिले में विज्ञान संकाय व कृषि संकाय के प्रति विद्यार्थियों की पढ़ाई के प्रति रूझान बढ़ता जा रहा है। वर्ष 2021 में भी जिले में 2167 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। साथ ही विज्ञान की लैब में भी पर्याप्त सुविधाएं मिलेगी।
हंसराज यादव,सीडीओ,शिक्षा विभाग,श्रीगंगानगर।

Krishan chauhan Reporting
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