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ग्रामीण न शहरी, उलझी सरहद

श्रीगंगानगर. शहर की करीब 100 कॉलोनियां ऐसी है जिनके बाशिदें
श्रीगंगानगर जिला मुख्यालय से सटी कॉलोनियों में रहते हैं लेकिन वे ग्राम पंचायत क्षेत्र में है। बिजली-पानी के बिल भी शहरी दरों से भरते हैं। ये कॉलोनियां नगर विकास न्यास के क्षेत्राधिकार में हैं। इनके पट्टे जारी करने और लीज आदि का काम भी न्यास ही करता है लेकिन ठप्पा ग्रामीण का है। प्रशासनिक नियंत्रण पंचायतों के हाथों में होने के कारण इससे इनमें निवास करने वाले बाशिंदे दोहरी समस्या से जूझ रहे हैं।

श्री गंगानगर

Published: March 05, 2022 01:28:23 am

पंचायत व शहर के फेर में उलझे नागरिक
योगेश तिवाड़ी. श्रीगंगानगर. शहर की करीब 100 कॉलोनियां ऐसी है जिनके बाशिदें
श्रीगंगानगर जिला मुख्यालय से सटी कॉलोनियों में रहते हैं लेकिन वे ग्राम पंचायत क्षेत्र में है। बिजली-पानी के बिल भी शहरी दरों से भरते हैं। ये कॉलोनियां नगर विकास न्यास के क्षेत्राधिकार में हैं। इनके पट्टे जारी करने और लीज आदि का काम भी न्यास ही करता है लेकिन ठप्पा ग्रामीण का है। प्रशासनिक नियंत्रण पंचायतों के हाथों में होने के कारण इससे इनमें निवास करने वाले बाशिंदे दोहरी समस्या से जूझ रहे हैं।
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कमाई न्यास की, वोट पंचायत को
नगर विकास न्यास क्षेत्र की कॉलोनियों में पट्टे आदि जारी करने का अधिकार नगर विकास न्यास को है। बिजली के लिए खंभे आदि डालने और पेयजल कनेक्शन की स्वीकृति के लिए पाइप लाइन डालने का काम भी न्यास ही करता है। इससे न्यास को मोटी आय होती है। इन कॉलोनियों के बाशिंदों को वोट डालने के लिए ग्राम पंचायत मुख्यालय पर जाना पड़ता है। इससे लोग विकास कार्यों के लिए ग्राम पंचायत को कहते हैं परन्तु इन पंचायतों की निजी आय शून्य होने से वह चाहकर भी ऐसा नहीं कर पाती।
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यहां बदल जाती है विधानसभा सीमा
सद्भावना नगर श्रीगंगानगर की सबसे पुरानी कॉलोनी है। इसकी आबादी करीब 5 से 6 हजार के बीच है। करीब 30 वर्ष पहले नगर विकास न्यास ने यह कॉलोनी काटी थी परन्तु विडम्बना है कि न्यास की यह कॉलोनी आज तक शहर के वार्ड में शामिल नहीं हो पाई है। सबसे बड़ी विडम्बना है कि शहर से सटी कॉलोनी होने के बावजूद इस कॉलोनी के बाशिंदों को श्रीगंगानगर विधानसभा क्षेत्र के प्रत्याशी को वोट देने का अधिकार भी नहीं है। इस कॉलोनी का विधानसभा क्षेत्र सादुलशहर लगता है जो श्रीगंगानगर से 35 किलोमीटर दूर है जबकि जिला मुख्यालय महज 5 किलोमीटर। इस क्षेत्रवासियों की यह भी पीड़ा है कि श्रीगंगागर विधानसभा क्षेत्र नजदीक होने के बावजूद वहां के जनप्रतिनिधि दूरियां रखते है जबकि सादुलशहर में होने पर भी वहां के जनप्रतिनिधि चुनावी सीजन में दिखाई देते है।
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उनकी कॉलोनी नगर विकास न्यास की ओर से काटी गई थी। ग्राम पंचायत मुख्यालय चार किलोमीटर दूर होने से राशनकार्ड, आधार कार्ड और जन आधार कार्ड के लिए लोगों को पंचायत मुख्यालय पर जाना पड़ता है। नालियां तो यूआइटी ने बनवा दी परन्तु इनकी सफाई के लिए कोई नहीं आता।
-जोरावर सिंह, सद्भावना नगर, श्रीगंगानगर
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शहर की कॉलोनी में निवास करने के बावजूद प्रशासनिक क्षेत्राधिकार ग्राम पंचायत है। ग्राम पंचायत को पट्टे आदि जारी करवाने का अधिकार भी नहीं है। पंचायत विकास करवाना चाहती है परन्तु निजी आय शून्य होने से परेशानी आ रही है। दीपावली पर सरपंच अपने निजी खर्च से सफाई करवाते हैं।
-विकास लाडवाल, साधु कॉलोनी, श्रीगंगानगर
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पट्टों का अधिकार मिले तो नागरिकों को लाभ
कॉलोनियां न्यास के क्षेत्राधिकार में होने के कारण इनमें पट्टे आदि जारी करने का अधिकार भी न्यास को ही है। इसके लिए नागरिकों को भारी-भरकम राशि भी खर्च करनी पड़ती है। यदि इन कॉलोनियों में पट्टे जारी करने का अधिकार उन्हें मिले इससे पंचायत और नागरिकों को दोनों को लाभ होगा।
-सुनीता सीगड़, सरपंच, ग्राम पंचायत 3 ई छोटी (श्रीगंगानगर)
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निजी आय शून्य, नालियों की सफाई कौन करे
ग्राम पंचायत के पास आय का कोई जरिया नहीं है। कॉलोनियों में नालियां आदि बनाने का काम ग्राम पंचायत ने करवा दिया परन्तु अब सफाई की समस्या है। पंचायत क्षेत्र में कोई आवारा पशु की मौत होने पर उसे उठवाने के लिए लोगों की मान-मनौव्वल करनी पड़ती है। उन्हें पट्टे तक बनाने का अधिकार नहीं है।
-सुरेश कुमार, सरपंच, ग्राम पंचायत 5 ई छोटी (श्रीगंगानगर)
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