मौसमी बीमारियों की मार, चिकित्सालय में बैड का टोटा

vikas meel

Publish: Oct, 13 2017 09:47:13 PM (IST)

Sri Ganganagar, Rajasthan, India
मौसमी बीमारियों की मार, चिकित्सालय में बैड का टोटा

इलाका भले ही मौसमी बीमारियों की चपेट में हो लेकिन राजकीय चिकित्सालय प्रशासन इस ओर बिलकुल भी ध्यान नहीं दे रहा।

श्रीगंगानगर.

इलाका भले ही मौसमी बीमारियों की चपेट में हो लेकिन राजकीय चिकित्सालय प्रशासन इस ओर बिलकुल भी ध्यान नहीं दे रहा। चिकित्सालय में प्रसूता वार्ड सहित विभिन्न वार्डों के हालात ऐसे हैं कि रोगियों के लिए अलग से बैड ही उपलब्ध नहीं है। ऐसे में कई वार्डों में एक ही बैड पर दो-दो रोगी सोने को मजबूर हैं। आलम यह है कि चिकित्सालय में इतनी अधिक अव्यवस्था होने के बावजूद न तो मौके पर मौजूद नर्सिंग स्टाफ और अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे।


बैड ही नहीं मिला

चिकित्सालय में भर्ती रोगी नरेश शर्मा का कहना था कि उसके बैड पर उसके साथ एक अन्य रोगी को भी सुलाया गया है। ऐसे में उसे परेशानी हो रही है। उसका कहना था कि जब इस बारे में मौके पर मौजूद नर्सिंग स्टाफ को कहा गया तो उन्होंने भी उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया।


बैड पर बिखरा मल मूत्र

रोगी उदय ने बताया कि उसके वार्ड में बैड की कमी होने के कारण एक ऐसे रोगी को सुला दिया गया, जिसे मल-मूत्र के लिए उठने में ही परेशानी आ रही थी। ऐसे में उसने बैड पर ही मल-मूत्र कर दिया। बाद में इस बारे में विरोध जताने पर बैड पर मौजूद को अन्य वार्ड में व्यवस्था कर स्थानांतरित किया गया।
वार्ड में मौजूद डॉ. ख्यालीराम का कहना था कि वे चिकित्सालय में भर्ती हैं लेकिन चिकित्सालय प्रशासन उनकी ड्रिप लगाने की ओर भी ध्यान नहीं दे रहा है।

यह समस्या सामान्य
चिकित्सालय में यह सामान्य समस्या है और मौसमी बीमारियों के समय में यह अधिक बढ़ जाती है। चिकित्सालय में बैड की क्षमता करीब 360 बैड है जबकि इनडोर रोगी लगभग चार सौ के आसपास रहते हैं। ज्यादा समस्या प्रसूता वार्ड में ही आती है। ऐसे में परेशानी तो आती है लेकिन यह वर्ष के कुछ समय ही रहती है।

-डॉ. प्रेम बजाज, उपनियंत्रक, राजकीय चिकित्सालय, श्रीगंगानगर

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