श्रीगंगानगर मेडिकेटेड नशे की गिरफ्त में, आठ माह में पकड़ी पांच लाख गोलियां

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26 अप्रेल को हुई थी एनडीपीएस घटक में शामिल : नशा मुक्ति अभियान में कार्रवाई में आई तेजी

-राजसिंह शेखावत
श्रीगंगानगर. नशे के जाल की जकड़ में आए जिले को नशीली गोली को एनडीपीएस घटक में शामिल करने और कुछ माह पहले पुलिस की ओर से चलाए गए नशा मुक्ति अभियान के तहत लगातार हुई कार्रवाई में पांच लाख से अधिक नशे की गोलियां युवाओं के पेट तक जाने से बचा ली गई। पाकिस्तान से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा और पंजाब की सीमा से लगते इस जिले में नशे का कारोबार बढ़ता गया था।

पिछले कुछ सालों में हेरोइन, अफीम और स्मैक जैसे महंगे नशे ने सस्ती गोलियों व सीरप, पोस्त आदि ने ले ली थी। यहां मरीजों को दी जाने वाली बीमारियों की दवाओं से नशा तेजी से फैल गया। नशा पकडऩे में औषधि नियंत्रक विभाग व पुलिस की संयुक्त कार्रवाई चलती थी। इसमें बिना लाइसेंस के मिलने पर ही कार्रवाई की जा ही थी। इसके चलते इस पर प्रभावी रोक नहीं लगा पा रही थी।

इस पर ट्रॉमाडोल गोली को एनडीपीएस घटक में शामिल करने की मांग उठी थी। जिसके चलते 26 अपे्रल को इस गोली को एनडीपीएस घटक में शामिल कर दिया गया। इसके बाद पुलिस ने इसकी धरपकड़ में तेजी की। पुलिस अधीक्षक योगेश यादव ने जुलाई में एसपी पद संभाला।

उन्होंने नशा मुक्ति को अपनी प्राथमिकता शामिल किया। इसके बाद जिले में नशे की गोलियों और तस्करों की धरपकड़ में काफी तेजी आई और नशे की लाखों गोलियां व अन्य मादक पदार्थ पकड़े गए। पुलिस के आंकड़ों को देखा जाए तो एक साल में पुलिस की ओर से पांच लाख से भी अधिक नशे की गोलियां, कैप्सूल आदि जब्त किए गए। जिसके चलते एक साल में पांच लाख से अधिक नशे की गोलियां युवाओं के तक पहुंचने से बचा ली गई।

जिले में एक साल में हुई कार्रवाई
मामले------ जब्त मादक पदार्थ--------- गिरफ्तारी
69--------- 24 क्विंटल पोस्त----- -----97 व्यक्ति
8 -------- 3 किलो 80 ग्राम अफीम----- 13 व्यक्ति
19 ------ 443 ग्राम स्मैक-------------- 27 व्यक्ति
76------ 518404 गोली, कैप्सूल ------ 111 व्यक्ति
4------ साढ़े चार किलोग्राम गांजा------ -5 व्यक्ति
1------ 9 ग्राम हेरोइन----------------- एक व्यक्ति

दिल्ली व जयपुर से आती हैं नशे की गोलियां
जिले में पकड़े जाते रहे नशे की गोलियां सप्लायर व बेचने वालों से पूछताछ में अभी तक यही सामने आया है कि यह गोलियां निजी बसों के जरिए दिल्ली व जयपुर से यहां सप्लाई की जा रही है। यहां नशे की गोलियां बेचने वाले इन दवाओं को दिल्ली या जयपुर से यहां मंगवाते हैं। दवाएं ज्यादातर निजी बसों में आने के खुलासे हुए हैं।

मुख्य सप्लायर नहीं चढ़ पाए पुलिस के हत्थे
नशे की गोलियां बेचने व लाने वालों की धरपकड़ के दौरान लाखों गोलियां बरामद की गई और गिरफ्तारियां हुई। आरोपियों ने यह दवाएं दिल्ली व जयपुर से लाना बताया। लेकिन पुलिस कभी भी जयपुर या दिल्ली के मुख्य सप्लायरों को नहीं पकड़ पाई। पुलिस की ओर से जयपुर में मुख्य सप्लायर की तलाश में पुलिस टीमें भेजी गई लेकिन हर बार खाली हाथ लौटकर आ गई।

युवाओं को जेल व अस्पताल की तरफ धकेल रहा नशा
न शा कोई भी हो वह मानसिक व शारीरिक रूप से व्यक्ति को खराब करता है लेकिन गोलियों से नशा करने वालों का हस्र अधिक खराब होता है। राजकीय चिकित्सालय के मनोरोग विशेषज्ञ के डॉ. प्रेम अग्रवाल का कहना है कि सभी नशे व्यक्ति के मानसिक व शारीरिक रूप से असर डालता है लेकिन गोलियां का नशा व्यक्ति को अपराध और अस्पताल की तरफ धकेल रहा है।

जिसके चलते उनका पूरा परिवार ही बर्बाद हो जाता है। इस तरह का नशा करने वाले युवा नशा नहीं मिलने पर चोरी, छीना झपटी, मारपीट आदि की वारदात करने लगते हैं। जिसके चलते उन्हें जेल की हवा खानी पड़ती है। लगातार ऐसे नशे से उसके किडनी, लीवर आदि अंग खराब होने लगते हैं।

क्या करें युवाओं के परिजन
मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. प्रेम अग्रवाल का कहना है कि परिजन अपने जवान होते बच्चों पर विशेष नजर रखें। कौन लोग उनके यार-दोस्त हैं और कहां जाते हैं। उनके व्यवहार आदि में कोई परिवर्तन तो नहीं आ रहा है। जिससे वे नशे की दलदल की तरफ भटक नहीं जाए। यदि परिजनों को कुछ गलत लगता है तो तत्काल गंभीरता लें।

इनका कहना हैइनका कहना है
गोली को एनडीपीएस घटक में शामिल करने व पुलिस की ओर से चलाए गए नशा मुक्ति अभियान के तहत अच्छी कार्रवाई हुई है। नशे की गोलियों से नशा करने वालों पर प्रभावी रोक लगी है। ऐसी कार्रवाई और धरपकड़ चलती रहे तो आने वाले समय जिले को फायदा मिलेगा।-पंकज जोशी, इंस्पेक्टर, ड्रग कंट्रोल विभाग, श्रीगंगानगर

मेडिकेटेड नशा पूरे परिवार को बर्बाद कर देता है। पुलिस की ओर से इस नशे की रोकथाम के लिए जिले में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस लगातार ऐसे लोगों पर कार्रवाई कर रही है। नशे की रोकथाम को प्राथमिकता में शामिल किया गया है। लोगों को इससे जोड़ा गया है। आगे भी यह मुहिम जारी रहेगी।-योगेश यादव, पुलिस अधीक्षक श्रीगंगानगर।

Rajaender pal nikka Photographer
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