वायु प्रदूषण की चपेट में आ रहा श्रीगंगानगर शहर, जांच में सामान्य से तीन गुना मिला वायु प्रदूषण

दिल्ली की एक कंपनी ने शहर के रविन्द्र पथ पर जांचा था वायु प्रदूषण

By: Raj Singh

Updated: 03 Dec 2019, 12:11 AM IST

श्रीगंगानगर. जहां आएदिन देश की राजधानी वायु प्रदूषण को लेकर सुर्खियों में रहती है लेकिन श्रीगंगानगर जैसे छोटे शहर भी वायु प्रदूषण की समस्या से मुक्त नहीं है। यहां भी धूल व धुआं के चलते हर साल वायु प्रदूषण सामान्य से अधिक होता जा रहा है। कुछ माह पहले दिल्ली की एक कंपनी की ओर से की गई जांच में वायु में सामान्य से चार गुना प्रदूषण पाया गया था।


जानकारी के अनुसार पिछले दिनों दिल्ली की एक कंपनी व आईआईटी के इंजीनियरों दल यहां आया था। इस दल की ओर से शहर के व्यस्तम चौराहों व बाजारों में वायु प्रदूषण की जांच की गई थी। जांच के दौरान तथ्य सामने आए कि सिटी में वायु प्रदूषण सामान्य से अधिक पाया गया।

दिल्ली की कंपनी के इंजीनियरों ने यहां का वायु प्रदूषण वल्र्ड हैल्थ ऑर्गनाइजेशन के मानक के हिसाब से तीन से चार गुना अधिक पाया गया है। इस कंपनी की ओर से दिल्ली, चडीगढ़ के बाद राजस्थान के उदयपुर व भिवाड़ी में भी सर्वे किया था, जहां भी वायु प्रदूषण सामान्य से काफी अधिक पाया गया। इसके बाद कंपनी की ओर से श्रीगंगानगर में सर्वे किया गया।


वाहनों का धुआं व धूल, मिट्टी से बढ़ रहा प्रदूषण
वाहनों के आवागमन से उडऩे वाली धूल, मिट्टी, वाहनों से निकलने वाला धुआं सांस के साथ अंदर ले रहे हैं। जो आने वाले समय में उनके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। इससे फेंफड़ों को काफी नुकसान पहुंचता है। वायु प्रदूषण बढऩे के कारण वहां मौजूद रहने वाले लोगों को सांस, फेफड़ों की समस्या हो सकती है।


पुलिसकर्मियों के फेंफड़ों की हुई थी जांच
- कंपनी के इंजीनियरों की ओर से सर्वे में वायु प्रदूषण अधिक पाए जाने के बाद चौराहों व मुख्य मार्गों पर ड्यूटी करने वाले ट्रेफिक पुलिसकर्मियों के फेंफड़ों की जांच कराई थी। इसके बाद कंपनी की ओर से नाक में प्रदूषण जाने से रोकने के लिए एक स्ट्रिप उपलब्ध कराई गई थी।


टेम्पो व ट्रेक्टर से सबसे अधिक फैल रहा वायु प्रदूषण
यातायात पुलिसकर्मियों का कहना है कि शहर में हर साल वाहनों की संख्या बढ़ती जा रही है। इसके चलते शहर के मुख्य मार्ग शिव चौक से लेकर कोडा चौक के बीच पूरा दबाव बना रहता है। इसके चलते जाम लगने व वाहनों के धुएं व धूल उडऩे के कारण यहां वायु प्रदूषण भी बढ़ रहा है। जो काफी है। आने वाले सालों में यह प्रदूषण काफी बढ़ जाएगा। जिससे मुख्य बाजार में लोगों को सांस लेने में भी परेशानी हो सकती है।


तेजी से बढ़ रही वाहनों की संख्या
- परिवहन विभाग के आंकड़ों को देखा जाए तो 31 मार्च 2019 तक जिले में 4 लाख 96 हजार 172 वाहनों का पंजीकरण हो चुका है। इसके अलावा पंजाब व हनुमानगढ़ के वाहनों का दबाव भी यहां रहता है। पंजाब की तरफ से आने वाले छोटे वाहन कलक्ट्रेट के सामने से होते हुए रविन्द्र पथ से ही निकलते हैं। वहीं करणपुर से आने वाले वाहनों का दबाव भी इसी मार्ग पर रहता है। रोडवेज, लोक परिवहन व निजी बसों का पूरा दबाव भी यहीं पर है। इसके चलते धूल व धुआं से प्रदूषण बढ़ता जा रहा है।


इनका कहना है
-शहर में मुख्य मार्ग रविन्द्र पथ पर जांच के दौरान वायु प्रदूषण सामान्य से तीन-चार गुना अधिक पाया गया था। इस वायु प्रदूषण से सबसे अधिक प्रभावित ट्रेफिक पुलिसकर्मी व दुकानदार हो रहे हैं। यहां टेम्पो व ट्रेक्टर सबसे अधिक वायु प्रदूषण कर रहे हैं।
कुलदीप सिंह चारण, यातायात प्रभारी श्रीगंगानगर।

Raj Singh Reporting
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