scriptStudents from Ukraine said to MP, now there should be arrangements for | यूक्रेन से आए छात्र एमपी से बोले, अब भारत में हो पढ़ाई का इंतजाम | Patrika News

यूक्रेन से आए छात्र एमपी से बोले, अब भारत में हो पढ़ाई का इंतजाम

यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध शुरू होने के बाद वहां से आए छात्रों ने एमबीबीएस की पढ़ाई भारत के मेडिकल कॉलेजों से पूरी करवाने की मांग की है। छात्रों का कहना है कि इस युद्ध से अनिश्चितता का जो माहौल बना है उसमें यूक्रेन जाकर पढ़ाई पूरी करना असंभव है। रूस के हमलों से जो स्थिति बनी है उससे उबरने में यूक्रेन को सालों लग जाएंगे। खारकीव और कीव जैसे शहरों में जहां भारत के सर्वाधिक छात्र पढ़ाई कर रहे थे वहां इतनी तबाही हो चुकी है कि रहने का ठिकाना ही नहीं बचा है।

श्री गंगानगर

Published: March 05, 2022 03:05:52 am

श्रीगंगानगर. यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध शुरू होने के बाद वहां से आए छात्रों ने एमबीबीएस की पढ़ाई भारत के मेडिकल कॉलेजों से पूरी करवाने की मांग की है। छात्रों का कहना है कि इस युद्ध से अनिश्चितता का जो माहौल बना है उसमें यूक्रेन जाकर पढ़ाई पूरी करना असंभव है। रूस के हमलों से जो स्थिति बनी है उससे उबरने में यूक्रेन को सालों लग जाएंगे। खारकीव और कीव जैसे शहरों में जहां भारत के सर्वाधिक छात्र पढ़ाई कर रहे थे वहां इतनी तबाही हो चुकी है कि रहने का ठिकाना ही नहीं बचा है। हमलों में कई शिक्षण संस्थाएं भी पूरी तरह तबाह हो चुकी है।यूक्रेन से लौटे श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों के छात्रों ने शुक्रवार को यह मुद्दा क्षेत्रीय सांसद निहालचंद के समक्ष उठाया और उन्हें प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में यूक्रेन के मौजूदा हालातों की जानकारी देते हुए बताया गया कि भारत के हजारों छात्र यूक्रेन के अलग-अलग शहरों में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। युद्ध के कारण उन्हें पढ़ाई बीच में छोड़ कर वापस आना पड़ा है। युद्ध की विभिषिका से यूक्रेन कब तक उबरेगा, इसके बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। ज्ञापन देने वाले शिष्टमंडल में पुलकित पारीक नेतेवाला, लवदीप ङ्क्षसह संगरिया, अंजली भाखर साहूवाला, अंकुर चावला अनूपगढ़ तथा कौमल चौधरी अनूपगढ़ शामिल थे।
भविष्य का सवाल है
छात्रों का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए भारत के हजारों युवाओं के भविष्य पर प्रश्नचिन्ह लग गया है। भारत सरकार को अब उनके प्रति उदार रवैया अपनाते हुए उनकी शेष पढ़ाई यहां के मेडिकल कॉलेजों में दाखिला देकर पूरी करवानी चाहिए। ऐसा नहीं हुआ तो हजारों छात्रों का भविष्य अंधकार में चला जाएगा।
सोशल मीडिया पर ग्रुप
यूक्रेन से लौटे एमबीबीएस फोर्थ ईयर के छात्र पुलकित पारीक ने बताया कि प्रधानमंत्री तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए हम छात्रों ने सोशल मीडिया ग्रुप बनाया है। इस ग्रुप से अब तक एक हजार छात्र जुड़ चुके हैं। सांसद निहलाचंद ने भी हमें दिल्ली ले जाकर संबंधित केन्द्रीय मंत्री से मिलवाने का आश्वासन दिया है
हंगरी पहुंचा तो लगा जैसे घर आ गया
श्रीगंगानगर. यूक्रेन के लवीव से हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट पहुंचने पर राहत मिली। वहां से विमान ने उड़ान भरी तो शुक्रवार दोपहर बारह बजे मुंबई और रात आठ बजे जयपुर में लैण्ड। विमान से बाहर निकले तो लगा घर आ गए। अपने देश की जमीन पर पैर रखते ही अपनापन महसूस हुआ। बुडापेस्ट से जयपुर पहुंचे हनुमानगढ़ जिले के गांव पक्का सहारणा के छात्र रितिक गोदारा ने जयपुर एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही इस संवाददाता को फोन किया तो उसकी आवाज में खुशी की खनक थी। उसके साथ राजस्थान के नौ और छात्र आए हैं जो सीकर, जयपुर और अजमेर से हैं।रितिक ने बताया कि लवीव में उन्होंने युद्ध की विभिषिका तो नहीं देखी। अलबत्ता हंगरी सीमा तक पहुंचने से पहले सिर पर मंडरा रहे खतरे को हर कोई महसूस जरूर कर रहा था। कीव और खारकीव से मिल रही खबरों से परिजन परेशान थे और वह बार-बार फोन कर हालचाल पूछते थे। जिसे भी देखो चेहरा उतरा हुआ। हंसता हुआ तो कोई दिख ही नहीं रहा था। हंगरी सीमा पार कर बुडापेस्ट पहुंचे तो भारतीय दूतावास ने रहने और खाने-पीने की अच्छी व्यवस्था कर दी। कई छात्रों को दूतावास में ही ठहराया गया तो कइयों को होटल में। इस वातावरण में हंसी-ठ_े भी चलने लगे। हम तो आ गए लेकिन हमारे साथी जो कीव और खारकीव में फंसे हैं वह भी सकुशल आ जाए तभी होली मनाने में मजा आएगा।
हंगरी तक पहुंचना नया जीवन मिलने जैसा
सूरतगढ़ की नीरजा यादव भी हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में है। लवीव से कीव पहुंची नीरजा को भीषण गोलीबारी के बीच हंगरी तक पहुंचना नया जीवन मिलने जैसा लगता है। उसने बताया कि हंगरी में सब कुछ ठीकठाक है। शायद शनिवार को हमें फ्लाइट मिल जाएगी। यहां ठहरने और खाने-पीने की व्यवस्था ठीकठाक है। नीरजा ने बताया कि खारकीव और कीव से मिलने वाली खबरें अच्छी नहीं। इन शहरों से अभी भी छात्र आपातकालीन रेल सेवा से आ रहे हैं।
यूक्रेन से आए छात्र एमपी से बोले, अब भारत में हो पढ़ाई का इंतजाम
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