scriptSuch a village, where there is a litterateur-artist in every house | ऐसा गांव, जहां घर-घर में है साहित्यकार-कलाकार | Patrika News

ऐसा गांव, जहां घर-घर में है साहित्यकार-कलाकार

पड़ोसी जिले हनुमानगढ़ में नोहर-भादरा सड़क मार्ग के बीच आबाद परलीका गांव आया हुआ है जो संगीत, साहित्य एवं सृजन के मामले में प्रदेश में अलहदा स्थान रखता है। गांव में दर्जनों साहित्यकार बसते हैं। इन्हीं खूबियों और खासियतों के चलते इस गांव की साहित्यग्राम के नाम से भी पहचान है। यहां के लोगों की बातचीत के विशिष्ट अंदाज ने बहुत से स्थानीय मुहावरों व कहावतों को जन्म दिया है।

श्री गंगानगर

Updated: January 10, 2022 12:50:54 am

जरा हटके: विरासत में मिले साहित्य प्रेम के प्रति नई पीढी में भी है ललक
साहित्यग्राम से है पहचान है परलीका गांव की
महेन्द्र सिंह शेखावत
श्रीगंगानगर. पड़ोसी जिले हनुमानगढ़ में नोहर-भादरा सड़क मार्ग के बीच आबाद परलीका गांव आया हुआ है जो संगीत, साहित्य एवं सृजन के मामले में प्रदेश में अलहदा स्थान रखता है। गांव में दर्जनों साहित्यकार बसते हैं। इन्हीं खूबियों और खासियतों के चलते इस गांव की साहित्यग्राम के नाम से भी पहचान है। यहां के लोगों की बातचीत के विशिष्ट अंदाज ने बहुत से स्थानीय मुहावरों व कहावतों को जन्म दिया है। गांव में राजस्थानी साहित्य सृजन की शुरुआत बीसवीं सदी के अंतिम दशक के प्रारंभ में हुई। कालांतर में यहां सरस्वती साहित्यिक संस्था का गठन हुआ तथा साहित्यिक गतिविधियां शुरू हुईं। छहसाल पहले साहित्यकारों एवं शिक्षकों से सहयोग से यहां मक्सीम गोर्की पुस्तकालय एवं वाचनालय भी शुरू हुआ। खास बात यह है कि गांव के बुजुर्गों की ओर से शुरू साहित्य सृजन की परंपरा को गांव की युवा पीढी शिद्दत से आगे बढ़ा रही है। यहां के साहित्य की धमक देशभर में हैं।
ऐसा गांव, जहां घर-घर में है साहित्यकार-कलाकार
ऐसा गांव, जहां घर-घर में है साहित्यकार-कलाकार
इन साहित्यकारों ने बढ़ाया गांव का नाम
रामस्वरूप किसान 70 वर्ष की उम्र में कृषिकर्म के साथ साहित्यकर्म कर रहे हैं। वर्ष 2019 के साहित्य अकादेमी पुरस्कार से नवाजा गया। डॉ. सत्यनारायण सोनी भी राना केलिफोर्निया व राजस्थानी अकादमी सहित कई संस्थानों से पुरस्कृत हैं तथा रामस्वरूप किसान के साथ मिलकर राजस्थानी तिमाही पत्रिका कथेसर का संपादन करते हैं। सत्तर वर्षीय मेहरचंद धामू भी बढ़ईगिरी के साथ साहित्य सृजन में लगे हैं। रामेश्वर गोदारा ग्रामीण व विनोद स्वामी भी साहित्य साधना में जुटे हुए हैं। गांव के राजेराम बेनीवाल ने अंधविश्वास व पाखंड पर कटाक्ष तथा लोकजीवन को बिंबित करते करीब ढाई हजार दोहों का सृजन किया।
यह नाम भी हैं चर्चा में
युवक थानेश शर्मा, अजय परलीका, राजेश स्वामी, प्रियंका चौधरी, संज्या बौद्ध, मुकेश मानव आदि राजस्थानी व हिंदी लेखन में सक्रिय हैं। वहीं युवा दीपक चौहान व कयूम खान संगीत के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परिचय दे रहे हैं। शिशपाल बेनीवाल सोशल मीडिया पर नई—नई कहानियां रचकर प्रस्तुत करते हैं। डिजिटल प्लेटफार्म पर सतपाल स्वामी तथा रामकुमार रोणजोगो के हास्य-व्यंग्य के वीडियो बड़े लोकप्रिय रहे हैं।

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