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बुखार से पीडि़त, प्लेटलेट्स की कमी, डेंगू का खौफ

जिला चिकित्सालय की लैब में एलाइजा टेस्ट की जांच रिपोर्ट में जिले में अभी तक 67 डेंगू रोगी मिले

श्री गंगानगर

Published: October 29, 2021 10:05:41 am


जिला चिकित्सालय की लैब में एलाइजा टेस्ट की जांच रिपोर्ट में जिले में अभी तक 67 डेंगू रोगी मिले--बुखार से पीडि़त, प्लेटलेट्स की कमी, डेंगू का खौफ

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1. आठ हजार प्लेटलेट्स

जिला चिकित्सालय के डेंगू वार्ड में गुरुवार की शाम को शहर की गुरुनानक बस्ती का पूर्णराम भर्ती हुआ है। इसको बुखार है तथा इसकी डेंगू के लिए एलाइजा जांच के लिए सैंपल लिया गया है जबकि इस मरीज के प्लेटलेट्स आठ हजार तक पहुंच गई है। इसको लेकर मरीज के परिजन परेशान हैं। डॉक्टर्स का कहना है कि सामान्य मरीज के एक लाख प्लेटलेट्स होनी चाहिए।
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बुखार से पीडि़त, प्लेटलेट्स की कमी, डेंगू का खौफ
बुखार से पीडि़त, प्लेटलेट्स की कमी, डेंगू का खौफ
2. तीन दिन पहले भर्ती हुआ,22 हजार प्लेटलेट्स
सूरतगढ़ के वार्ड 27 निवासी अजय कुमार 25 नवंबर को चिकित्सालय में भर्ती हुआ है। यह मरीज बुखार से पीडि़त है और इसके प्लेटलेट्स 22 हजार है। तीन दिन से चिकित्सालय में भर्ती है और इसका डेंगू का उपचार चल रहा है। अब प्लेटलेट्स कम होने पर एसडीपी और आरडीपी चढ़ानी पड़ती है।
-कृष्ण राम चौहान

प्लस फोटो--श्रीगंगानगर.कोरोना संक्रमण समाप्त होने के बाद इस बार डेंगू का कहर श्रीगंगानगर सहित राज्य भर में जारी है। जिला चिकित्सालय, तपोवन प्रन्यास और शहर के अन्य निजी अस्पतालों में संभावित डेंगू रोगियों में प्लेटलेट्स की कमी के मरीज बहुत अधिक भर्ती हो रहे हैं। प्लेटलेट्स कम होने पर रोगी के जहन में डेंगू का खौफ बना हुआ है। डॉक्टर्स का कहना है कि सामान्य मरीज में एक लाख प्लेटलेट्स होनी चाहिए जबकि जिला चिकित्सालय में गुरुवार दोपहर बाद एक मरीज भर्ती हुआ। इसकी प्लेटलेट्स आठ हजार ही थी। हालांकि मरीज की स्थिति सामान्य है लेकिन मरीज के परिजन और मरीज में डेंगू का खौफ बना हुआ है। श्रीगंगानगर जिला के विभिन्न निजी अस्पतालों में गुरुवार तक तीन सौ संभावित डेंगू रोगी भर्ती हैं और इनका डेंगू का उपचार चल रहा है जबकि राजकीय जिला चिकित्सालय की लैब में 67 एलाइजा टेस्ट की जांच रिपोर्ट में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। इनमें एलाइजा टेस्ट की जांच रिपोर्ट में चार रोगी नए मिले हैं। जबकि बीकानेर संभाग में 416 डेंगू रोगियों की पुष्टि हो चुकी है और चार डेंगू रोगियों की मौत हो चुकी है। इनमें एक डेंगू रोगी अनूपगढ़ से है इनकी भी पीबीएम मेडिकल कॉलेज बीकानेर में ही उपचार के दौरान मौत हुई थी।
जिला मुख्यालय पर सबसे ज्यादा डेंगू रोगी मिले
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श्रीगंगानगर जिले में सबसे ज्यादा डेंगू के रोगी जिला मुख्यालय पर मिले हैं। जिले में 67 डेंगू रोगी मिले हैं। इनमें 33 रोगी जिला मुख्यालय पर मिले हैं। इनमें शहर की पुरानी आबादी व गुरुनानक बस्ती आदि क्षेत्र के मरीज ज्यादा मिले हैं। चिकित्सा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार जिले के नौ ब्लॉक में डेंगू रोगियों में सबसे ज्यादा डेंगू रोगी श्रीगंगानगर शहर में 50 प्रतिशत मिले हैं। जबकि अनूपगढ़ में सात और एक रोगी की यहां पर मौत तक हो चुकी है। सादुलशहर और सूरतगढ़ में छह-छह रोगी, श्रीगंगानगर ग्रामीण में चार, रायसिंहनगर में तीन, घड़साना में दो, श्रीकरणपुर व पदमपुर में एक-एक डेंगू रोगी मिले थे।
लेटलेट्स की मांग ज्यादा
डेंगू रोगियों में प्लेटलेट्स कम होने पर ब्लड बैंकों से सिंगल डोनर प्लेटलेट्स एसडीपी और रेंडम डोनर प्लेटलेट्स आरडीपी की मांग काफी बढ़ गई है। श्रीगंगानगर जिला मुख्यालय पर दो ब्लड बैंकों में एसडीपी और तीन में आरडीपी बनाने की सुविधा है। इन ब्लड बैंक के अनुसार प्रतिदिन औसत दो दर्जन एसडीपी और करीब 100 आरडीपी यूनिट की खपत हो रही है। तपोवन प्रन्यास के अध्यक्ष महेश पेड़ीवाल ने बताया कि तपोवन ब्लड बैंक में एसडीपी की 12 किट गुरुवार शाम को आई है और 60 किट सुबह तक आ जाएगी। जिस कंपनी की मशीन है उसी कंपनी की किट का उपयोग किया जाता है। इस कारण भी किट में दिक्कत आ रही है।
सबसे ज्यादा रेकॉर्ड रोगी 2018 में मिले

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इस बार अभी तक 67 डेंगू रोगियों की पुष्टि हुई है जबकि पिछले वर्ष 49 डेंगू रोगी मिले थे। जबकि वर्ष 2018 में रेकॉर्ड 282 डेंगू रोगियों की पुष्टि हुई थी। इसमें श्रीगंगानगर जिले के नौ ब्लॉक में सबसे ज्यादा डेंगू रोगी घड़साना शहरी व ग्रामीण अंचल में मिले थे। बीकानेर संभाग में घड़साना में सबसे ज्यादा करीब 200 डेंगू पीडि़त रोगियों की पहचान हुई थी। इनमें एक दर्जन दर्जन डेंगू पीडि़त रोगियों की मौत तक हुई थी।
निजी चिकित्सालयों में कार्ड का ज्यादा उपयोग

krishan chauhan,
जिला चिकित्सालय के फिजिशियन डॉ.पवन सैनी ने बताया कि एक यूनिट एसडीपी रोगी के चढ़ाने पर 30 से 40 हजार प्लेटलेट्स बनती है जबकि एक आरडीपी चढ़ाने पर 10 हजार तक प्लेटलेट्स बढ़ जाती है। डेंगू की जांच के लिए एलाइजा टेस्ट की विश्वसनीय है। जबकि रेपिड कार्ड की सेंस्टेविटी 70 प्रतिशत तक मानी जाती है। जबकि एलाइजा टेस्ट की 90 प्रतिशत तक। एक कार्ड में तीन तरह के टेस्ट होते हैं इनमें एनएस-वन,आइजीएम और आइजीजी की रिपोर्ट आती है। जबकि निजी डॉक्टर्स ज्यादा कार्ड टेस्ट ही करवाते हैं। वहीं,तपोवन प्रन्यास अस्पताल में ज्यादा कार्ड का ही उपयोग किया जा रहा है।
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जिला चिकित्सालय में इन दिनों बुखार, संभावित डेंगू व डेंगू रोगियों की संख्या काफी आ रही है। इसके लिए चिकित्सालय में अलग से डेंगू वार्ड बनाया गया है। इन दिनों काफी संख्या में ऐसे मरीज आ रहे हैं जिनको बुखार है और संभावित डेंगू के लक्षण है जबकि इनके प्लेटलेट्स बहुत कम आ रही है। सामान्य मरीज में एक लाख प्लेटलेट्स होने चाहिए लेकिन यहां पर आठ हजार प्लेटलेट्स तक के मरीज भर्ती हो रहे हैं।
डॉ.देवकांत शर्मा,डेंगू वार्ड प्रभारी,राजकीय जिला चिकित्सालय,श्रीगंगानगर।

चिकित्सालय की ओडीपी बढकऱ दो हजार तक पहुंच गई है और इनमें 17 संभावित डेंगू रोगी भर्ती है और इनमें पांच डेंगू रोगी है। मरीजों को देखते हुए डेंगू वार्ड में 20 बेड और बढ़ाए गए हैं। साथ ही चिकित्सालय में 15 दिन में ब्लड बैंक में रक्त तत्व विभाजन की मशीन आ जाएंगी।
डॉ.बलदेव सिंह चौहान,पीएमओ,जिला चिकित्सालय,श्रीगंगानगर।

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