सरहदी से सटे ग्रामीण इलाके में नेटवर्क बना जी का जंजाल

The network became a network in the rural areas adjacent to the border- टावर लगाने में मोबाइल कंपनियों ने साधी चुप्पी

By: surender ojha

Published: 15 Jun 2021, 09:41 PM IST

श्रीगंगानगर. सरहदी इलाके में नेटवर्क जी का जंजाल बन गया है। बॉर्डर एरिया से सटे ग्रामीण इलाके में नेटवर्क की समस्या इतनी अधिक है कि स्कूलों, ग्राम पंचायत और आंगनबाड़ी से जुड़े कार्मिकों को ऑनलाइन रिपोर्ट भिजवाने में आए दिन समस्या आती है।

नियमित रिपोर्ट देने की बाध्यता होने के कारण कई कार्मिक जिला मुख्यालय आकर रिपोर्ट प्रेषित करने को मजबूर है।

बॉर्डर एरिया में नेटवर्क की समस्या का समाधान करने के लिए इलाके में एक मात्र श्रीकरण्पुर के विधायक गुरमीत सिंह कुन्नर ने जिला प्रशासन, जिला परिषद और बीएसएनएल से स्थायी समाधान करने के लिए अवगत भी कराया है।

कुन्नर के अलावा श्रीगंगानगर, अनूपगढ और रायसिंहनगर के विधायकों ने नेटवर्क की इस समस्या को लेकर कोई भी कदम नहीं उठाया है। यहां तक कि पत्र व्यवहार तक नहीं किया है। दूसरी ओर जिला परिषद प्रशासन ने भी बीएसएनएल अधिकारियों को नेटवर्क की समस्या को दूर करने के लिए मोबाइल टावर लगाने का आग्रह भी किया है।

सांसद निहालचंद को भी बॉर्डर से सटे ग्राम पंचायतों के सरपंचों ने भी कई बार वास्तुस्थिति से अवगत कराया लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठ सका है। मोबाइल कंपनियों ने सुरक्षा का हवाला देकर कन्नी काट ली है।
श्रीगंगानगर पंचायत समिति के पांच गांव एेसे है जो बॉर्डर से सटे हुए है। इसमें कोठां, हिन्दुमलकोट, मदेरां, संगतपुरा, दौलतपुरा शामिल है।

इसी प्रकार श्रीकरणपुर पंचायत समिति क्षेत्र की 12 ग्राम पंचायतें बॉर्डर से सटी हुई है। इसमें ग्राम पंचायत नग्गी, 8वीं, मोहल्लां, मलकाना खुर्द्, कीकरवाली, धनूर, दो एक्स, 14 एस, रेड़वाला, मुक्कन, 61 एफ और 42 एच है।

इसी तरह रायसिंहनगर पंचायत समिति के छह पंचायतें बॉर्डर पर है, इसमें 43 पीएस, लखाहाकम, 75 एनपी, समेजा, संगराणा, 22पीटीडी शामिल है। इधर, घड़साना पंचायत समिति की पांच ग्राम पंचायतें 17 केएनडी, ग्राम पंचायत 12 केएमडी, 6 एसकेएम, 19 जीडी, 17 एमडी बॉर्डर एरिया में है। अनूपगढ़ पंचायत समिति की छह ग्राम पंचायतें बॉर्डर के नजदीक है। इसमें ग्राम पंचायत 27 एम, 30 एपीडी, बांडा, खोखरांवाली, 12 एच, 18 पी शामिल है।
ज्ञात रहे कि बीएडीपी योजना में बॉर्डर से सटे गांवों में आधारभूत सुविधाओं के नाम पर करोड़ों रुपए का बजट खर्च किया गया है।

लेकिन इसमें नेटवर्क की समस्या का स्थायी समाधान का प्रावधान नहीं किया गया। हालांकि तत्कालीन जिला परिषद सीईओ टीना डाबी ने इस संबंध में नेटवर्क सुविधा उपलब्ध कराने के लिए बीएडीपी के प्लान में यह पहलू शामिल करने का आग्रह किया था।

लेकिन उनके तबादले के बाद यह काम अधूरा रह गया। भारत-पाक बॉर्डर से सटे चार जिलों श्रीगंगानगर, बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर को सालाना एक सौ करोड़ रुपए का बजट औसतन खर्च होता है।

surender ojha Reporting
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned